मिलिए Tarun Sharma से, पंजाब के पहले पैरा-कराटे खिलाड़ी, जिन्होंने बचपन में Paralyzed होने और बोलने की परेशानी जैसी चुनौतियों के बावजूद हार नहीं मानी। छह साल की उम्र में शुरू हुई मुश्किलों को उन्होंने अपनी ताकत बना लिया और आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन कर रहे हैं। Tarun ने World Championship में ब्रॉन्ज और Commonwealth पैरा-कराटे चैंपियनशिप में दो गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया। खेल के साथ-साथ वे एक कराटे एकेडमी भी चलाते हैं, जहां 1,400 से ज्यादा underprivileged गर्ल्स को सेल्फ-डिफेंस की ट्रेनिंग दी जाती है। Tarun Sharma आज दृढ़ संकल्प और प्रेरणा की मिसाल हैं, जो न सिर्फ पैरा-स्पोर्ट्स में barriers तोड़कर नई राह बना रहे हैं, बल्कि दिव्यांगजन खिलाड़ियों के लिए बेहतर समर्थन की आवाज भी बुलंद कर रहे हैं।This is a sponsored feature.