World Longest Railway Tunnel : जब इंसानी हौसला और आधुनिक तकनीक एक साथ काम करते हैं, तो असंभव लगने वाले काम भी पूरे हो जाते हैं। स्विट्जरलैंड में बनी गोटहार्ड बेस टनल (Gotthard Base Tunnel) इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। आल्प्स पर्वत की विशाल चट्टानों को काटकर बनाई गई यह सुरंग दुनिया की सबसे लंबी और सबसे गहरी रेलवे सुरंगों में शामिल है। यह सिर्फ एक सुरंग नहीं, बल्कि इंजीनियरिंग, मेहनत और धैर्य की ऐसी कहानी है जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। गोटहार्ड बेस टनल की कुल लंबाई 57.09 किलोमीटर है। यह सुरंग उत्तरी स्विट्जरलैंड के एर्स्टफेल्ड (Erstfeld) को दक्षिणी हिस्से के बोदियो (Bodio) से जोड़ती है। लंबाई के मामले में इसने जापान की सीकान टनल और यूरोप की चैनल टनल जैसे बड़े प्रोजेक्ट को पीछे छोड़कर नया रिकॉर्ड बनाया था।
आल्प्स पहाड़ों के नीचे बना दुनिया का सबसे लंबा रेलवे सुरंग (प्रतीकात्मक तस्वीर-istock)
17 साल की मेहनत के बाद मिली सफलता
इस विशाल परियोजना को पूरा होने में करीब 17 साल लगे। हालांकि, इस सुरंग का विचार कई दशक पहले आया था, लेकिन उस समय तकनीक और लागत की वजह से इसे शुरू नहीं किया जा सका। 1992 में स्विट्जरलैंड के लोगों ने जनमत संग्रह के जरिए इस परियोजना को मंजूरी दी। इसके बाद नवंबर 1999 में सुरंग की खुदाई का काम शुरू हुआ। अक्टूबर 2010 में इंजीनियरों ने दोनों तरफ से खुदाई करते हुए पहाड़ के अंदर आखिरी चट्टान को हटाया और एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। इसके बाद 1 जून 2016 को सुरंग का उद्घाटन किया गया और दिसंबर 2016 से इसमें नियमित रेल सेवाएं शुरू हो गईं।
पहाड़ के अंदर से निकाला गया 2.8 करोड़ टन मलबा
गोटहार्ड बेस टनल का निर्माण आसान काम नहीं था। आल्प्स की कठोर चट्टानों को काटने के लिए आधुनिक टनल बोरिंग मशीनों (TBM) का इस्तेमाल किया गया। ये मशीनें इतनी विशाल थीं कि कई मामलों में किसी बड़े भवन जितनी लंबी थीं। इस परियोजना के दौरान पहाड़ के अंदर से करीब 2.8 करोड़ टन चट्टान और मलबा बाहर निकाला गया। इतनी बड़ी मात्रा में निकले पत्थरों को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह काम कितना कठिन रहा होगा।
2300 मीटर गहराई और 45 डिग्री तापमान में काम
इस सुरंग की सबसे बड़ी चुनौती इसकी गहराई थी। यह जमीन के अंदर करीब 2,300 मीटर तक जाती है। इतनी गहराई में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता था। इस मुश्किल माहौल में काम करने के लिए सुरंग के अंदर विशेष कूलिंग और वेंटिलेशन सिस्टम लगाए गए। इसके अलावा कई जगहों पर कमजोर चट्टानों और पानी के दबाव जैसी समस्याओं का भी सामना करना पड़ा। इस पूरे प्रोजेक्ट में 2,400 से ज्यादा इंजीनियरों, वैज्ञानिकों, भूवैज्ञानिकों और मजदूरों ने दिन-रात मेहनत की।
यूरोप के परिवहन में आया बड़ा बदलाव
गोटहार्ड बेस टनल के निर्माण में करीब 12.2 अरब स्विस फ्रैंक खर्च हुए। आज यह सुरंग यूरोप के परिवहन नेटवर्क का अहम हिस्सा बन चुकी है। इस सुरंग की वजह से ज्यूरिख से मिलान के बीच ट्रेन यात्रा का समय लगभग एक घंटे तक कम हो गया है। यहां से यात्री ट्रेनें 200 से 250 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती हैं। इसके अलावा भारी मालगाड़ियों के लिए भी यह सुरंग बेहद उपयोगी साबित हुई है। पहले कई मालवाहक ट्रक आल्प्स के पहाड़ी रास्तों से गुजरते थे, जिससे प्रदूषण बढ़ता था। अब बड़ी संख्या में मालगाड़ियां इस सुरंग से होकर गुजरती हैं, जिससे सड़क यातायात और कार्बन उत्सर्जन दोनों में कमी आई है।
इंसानी इच्छाशक्ति की मिसाल
गोटहार्ड बेस टनल यह दिखाती है कि मजबूत इरादे, आधुनिक तकनीक और लंबे समय तक की गई मेहनत से प्रकृति की बड़ी से बड़ी चुनौती को भी पार किया जा सकता है। यह सुरंग सिर्फ स्विट्जरलैंड की उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए इंजीनियरिंग की एक प्रेरणादायक मिसाल है।
