Train के सफर में क्या होता है TDR; इसे क्यों और कब फाइल किया जाता है

अक्सर ट्रेन से सफर करने वाले लोग समझते हैं कि चार्ट बनने के बाद टिकट कैंसिल नहीं हो सकता और पैसा डूब जाता है लेकिन असल में यहीं TDR काम आता है।

ट्रेन से सफर करते हैं तो आपने कभी न कभी TDR यानी Ticket Deposit Receipt का नाम जरूर सुना होगा। हालांकि, बहुत से यात्री यह नहीं जानते कि आखिर TDR कब और क्यों भरा जाता है। इसे कुछ यूं समझें कि ट्रेन टिकट होने के बावजूद अगर आप कुछ कारणों से ट्रेन से सफर ही नहीं करते हैं तो TDR भर कर अपना टिकट का रिफंड वापस पा सकते हैं। इस आर्टिकल में आपको TDR से जुड़ी सारी जरूरी जानकारी दे रहे हैं-

TDR in Indian Railways

Train (Photo: iStock)

TDR क्या है

भारतीय रेलवे (Indian Railways) में TDR (Ticket Deposit Receipt) एक ऐसी सुविधा है, जिसके जरिए यात्री कुछ खास परिस्थितियों में टिकट का रिफंड क्लेम कर सकते हैं। अगर यात्रा के दौरान किसी तरह की परेशानी आ जाए या यात्री ट्रेन में सफर ही न कर पाए, तो ऐसे मामलों में TDR भरना जरूरी होता है।

कब भरा जाता है TDR

Train (Photo: iStock)

TDR तब भरा जाता है जब यात्री टिकट होने के बावजूद यात्रा नहीं कर पाता या रेलवे की वजह से उसे दिक्कत होती है। उदाहरण के तौर पर अगर ट्रेन बहुत ज्यादा लेट हो जाए और यात्री सफर न करे, ट्रेन रद्द हो जाए, सीट कन्फर्म न मिले या कोच में समस्या हो तो यात्री TDR फाइल कर सकता है। इसके जरिए रेलवे से रिफंड मांगा जाता है।

End of Feed