Teak Wood: उत्तर प्रदेश के अयोध्या में भगवान श्री राम का भव्य राम मंदिर का काम काफी तेजी से चल रहा है। मंदिर में विराजे जाने वाले भगवान राम की मूर्ति नेपाल से आई शालिग्राम शिला से बनाई जाएगी। इसके अलावा मंदिर में लगाए जाने वाले दरवाजों को सागौन की लकड़ी से बनाया जाएगा. दरवाजों को बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाली सागौन की लकड़ी को महाराष्ट्र के चंद्रपुर से लाया जा रहा है। सागौन की लकड़ी अपनी कई जबरदस्त विशेषताओं के लिए जानी जाती है। आपको जानकर हैरानी होगी की सागौन की लकड़ी में 600 साल तक दीमक नहीं लगता। लेकिन, यहां एक बड़ा सवाल ये है कि आखिर सागौन की लकड़ी में ऐसा क्या होता है जिससे इसमें 600 साल तक दीमक नहीं लगता।
Teak Wood: सागौन की लकड़ी में 600 साल तक नहीं लगता दीमक
खूबियों की वजह से जबरदस्त डिमांड में रहता है सागौन
सागौन की लकड़ी में कई तरह की विशेषताएं होती हैं, जो इसे बाकी लकड़ियों से अलग और स्पेशल बनाती हैं। सागौन की खूबियों की वजह से ही मार्केट में इसकी काफी डिमांड भी रहती है। मार्केट में अच्छी डिमांड के कारण ही इसकी कीमत भी हमेशा बाकी लकड़ियों से काफी ज्यादा रहती है। दरअसल, सागौन में टेक्टोनिक नाम का एक खास किस्म का तेल पाया जाता है। ये तेल ही सागौन को बाकी लकड़ियों के मुकाबले ज्यादा स्पेशल बनाता है।
किस वजह से सागौन में नहीं लगता दीमक
सागौन में पाए जाने वाले टेक्टोनिक तेल से इसकी लकड़ी को न सिर्फ शानदार और प्राकृतिक चमक मिलती है बल्कि इस तेल की वजह से ही इसमें 600 साल तक दीमक नहीं लगता। टेक्टोनिक तेल से मिलने वाली प्राकृतिक चमक की वजह से इससे बनने वाले फर्नीचर को बार-बार पॉलिश करने की भी जरूरत नहीं होती है। सागौन में टेक्टोनिक तेल के अलावा अच्छी-खासी मात्रा में रबर भी उपलब्ध होता है। ये तेल और रबर के गुण ही सागौन की लकड़ी को काफी मजबूत और ताकतवर बनाते हैं।
