यदि आप भी चालान माफ करवाने के लिए किसी लोक अदालत का इंतजार कर रहे हैं तो आपके लिए अच्छी खबर है। बिहार की राजधानी पटना में 14 मार्च को नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा। इस लोक अदालत का आयोजन जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) द्वारा किया जा रहा है।
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इसका उद्देश्य लंबित मामलों का तेज और आपसी सहमति से समाधान करना है, ताकि लोगों को लंबे समय तक चलने वाली अदालती प्रक्रिया से राहत मिल सके। जिला प्रशासन की ओर से जारी सूचना के अनुसार, यह लोक अदालत सुबह 10:30 बजे से शुरू होगी और पटना सदर सिविल कोर्ट के साथ-साथ जिले के अन्य उपमंडलीय न्यायालयों में भी आयोजित की जाएगी।
इन अदालतों में होगी सुनवाई
नेशनल लोक अदालत का आयोजन पटना के कई न्यायालयों में किया जाएगा। इनमें पटना सदर सिविल कोर्ट, पटना सिटी, दानापुर, बाढ़, मसौढ़ी, पालीगंज के उपमंडलीय न्यायालय शामिल हैं। इन अदालतों में लंबित मामलों को आपसी समझौते के आधार पर सुलझाने की कोशिश की जाएगी।
किन-किन मामलों की होगी सुनवाई
लोक अदालत में कई प्रकार के मामलों को लिया जाएगा। इनमें मुख्य रूप से छोटे आपराधिक मामले, नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट 138 से जुड़े चेक बाउंस मामले, बिजली से जुड़े विवाद, बिजली बिल, मोटर वाहन दुर्घटना मुआवजा दावे, दीवानी मुकदमे, वजन और माप से जुड़े विवाद, श्रम से संबंधित मामले, बैंक लोन रिकवरी मामले, गाड़ियों के ट्रैफिक चालान सर्टिफिकेट केस आदि शामिल होंगे।
13 मार्च तक कर सकते हैं आवेदन
जिन लोगों के मामले अदालत में लंबित हैं और वे लोक अदालत के माध्यम से समझौते के जरिए समाधान चाहते हैं, उन्हें 13 मार्च तक संबंधित अदालत में जाकर संपर्क करना होगा। इसके बाद उनके मामले को 14 मार्च को होने वाली लोक अदालत में शामिल किया जा सकता है। लोक अदालत में भाग लेने के लिए इच्छुक लोग सीधे डीएलएसए कार्यालय में भी आवेदन दे सकते हैं।
लोक अदालत के क्या हैं फायदे
लोक अदालत के माध्यम से विवाद सुलझाने के कई फायदे हैं। सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसमें कोई कोर्ट फीस नहीं लगती। यदि किसी मामले में पहले कोर्ट फीस जमा की गई है और मामला लोक अदालत में सुलझ जाता है, तो वह फीस भी वापस कर दी जाती है। इसके अलावा लोक अदालत का फैसला अंतिम और कानूनी रूप से बाध्यकारी होता है। इस फैसले के खिलाफ किसी भी उच्च अदालत में अपील नहीं की जा सकती।
लोगों से अधिक भागीदारी की अपील
पटना के जिला मजिस्ट्रेट और डीएलएसए के उपाध्यक्ष थियागराजन एस एम ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि जिले में इस कार्यक्रम का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए, ताकि अधिक से अधिक लोग इसका लाभ उठा सकें। उन्होंने लंबित मामलों से जुड़े सभी पक्षों से अपील की है कि वे लंबी अदालती प्रक्रिया के बजाय आपसी सहमति से विवाद निपटाने के इस अवसर का उपयोग करें।
