भारत में बढ़ते सड़क हादसों को कम करने के लिए केंद्र सरकार एक नई तकनीक लाने की तैयारी कर रही है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने वाहन-से-वाहन (Vehicle-to-Vehicle या V2V) संचार प्रणाली को चरणबद्ध तरीके से लागू करने का प्रस्ताव रखा है। इस तकनीक की मदद से सड़क पर चल रहे वाहन एक-दूसरे से जानकारी साझा कर सकेंगे, जिससे दुर्घटनाओं को रोकने में काफी मदद मिलने की उम्मीद है।
क्या है V2V संचार प्रणाली?/Photo-AI
क्या है V2V संचार प्रणाली?
V2V यानी Vehicle-to-Vehicle Communication ऐसी तकनीक है, जिसमें आसपास चल रहे वाहन आपस में सीधे संपर्क में रहते हैं। यह सिस्टम वाहन की गति, दिशा, लोकेशन और ब्रेक लगाने जैसी जानकारी दूसरे वाहनों तक तुरंत पहुंचाता है। इससे पीछे या आसपास चल रहे वाहन समय रहते सतर्क हो जाते हैं।
कैसे काम करेगी यह तकनीक?
मान लीजिए आपके आगे चल रही कार अचानक ब्रेक लगा देती है। ऐसे में V2V सिस्टम आपके वाहन को तुरंत अलर्ट भेज देगा, जिससे आप समय रहते ब्रेक लगा सकेंगे। इसके अलावा अगर कोई वाहन अचानक लेन बदलता है, ब्लाइंड स्पॉट में कोई गाड़ी होती है या एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड जैसी इमरजेंसी गाड़ी पास आती है, तब भी यह सिस्टम पहले से चेतावनी देगा।
सड़क हादसे कम करने में मिलेगी मदद
सरकार का मानना है कि अधिकांश सड़क दुर्घटनाएं मानवीय गलती की वजह से होती हैं। V2V तकनीक ड्राइवर को समय रहते खतरे की जानकारी देकर ऐसे हादसों को कम कर सकती है। भविष्य में इसे ऑटोमैटिक ब्रेकिंग और एडवांस ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) जैसी आधुनिक तकनीकों के साथ भी जोड़ा जा सकता है।
कब से लागू होंगे नए नियम?
परिवहन मंत्रालय ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन का प्रस्ताव भी रखा है। प्रस्ताव के अनुसार:- 1 अक्टूबर 2027 या उसके बाद बनने वाले L, M और N श्रेणी के जिन वाहनों में V2V सिस्टम लगाया जाएगा, उन्हें AIS-230 मानक का पालन करना होगा।
- 1 अक्टूबर 2028 से L, M और N श्रेणी के सभी नए वाहनों में AIS-230 मानक के अनुरूप V2V संचार प्रणाली लगाना अनिवार्य करने का प्रस्ताव है।
किन बातों पर देना होगा ध्यान?
यह तकनीक भारत में सड़क सुरक्षा के लिए बड़ा बदलाव साबित हो सकती है, हालांकि इसे सफल बनाने के लिए वाहनों में जरूरी हार्डवेयर, एक समान तकनीकी मानक और डेटा सुरक्षा जैसे पहलुओं पर भी विशेष ध्यान देना होगा।
