ऑनलाइन शॉपिंग करते समय आपने कई बार किसी प्रोडक्ट पर 60% या 70% तक की छूट देखकर उसे खरीदने का मन बनाया होगा। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस कीमत को वेबसाइट 'पुरानी कीमत' बताकर डिस्काउंट दिखा रही है, क्या उस प्रोडक्ट की कीमत वास्तव में हाल में इतनी थी? इसी तरह कई बार सर्च करने पर सबसे ऊपर ऐसे प्रोडक्ट दिखाई देते हैं, जो आपकी जरूरत से पूरी तरह मेल नहीं खाते या अपेक्षाकृत महंगे होते हैं।
ऑनलाइन शॉपिंग के ऐसे ही तरीकों पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने Consumer Protection (E-Commerce) Rules, 2020 में बदलाव किए हैं। नए नियमों का उद्देश्य ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर कीमत, डिस्काउंट, सर्च रिजल्ट, विज्ञापन, शिकायत और ग्राहक डेटा से जुड़ी जानकारी को ज्यादा पारदर्शी बनाना है। ये नए नियम 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि इन नियमों से ऑनलाइन खरीदारी करते समय आपको क्या-क्या बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
1. अब पता चलेगी प्रोडक्ट की असली पुरानी कीमत
ऑनलाइन शॉपिंग में सबसे बड़ा बदलाव डिस्काउंट को लेकर है। अगर कोई ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म किसी प्रोडक्ट पर कीमत कम करके दिखाता है, तो उसे अब कम की गई कीमत के साथ 'Prior Price' यानी पिछली कीमत भी बतानी होगी। खास बात यह है कि पिछली कीमत कोई मनमानी कीमत नहीं होगी। नियमों के मुताबिक इसे उस प्रोडक्ट या सर्विस की पिछले 30 दिनों में ऑफर की गई सबसे कम कीमत के आधार पर दिखाना होगा।
अब पता चलेगी प्रोडक्ट की असली पुरानी कीमत
इसका फायदा यह होगा कि ग्राहक आसानी से समझ पाएगा कि वास्तव में उसे कितनी छूट मिल रही है। उदाहरण के लिए, अगर किसी जूते की कीमत हाल में ₹1,000 थी और अब उसे ₹800 में बेचा जा रहा है, तो सिर्फ किसी बहुत ज्यादा कीमत के मुकाबले 60% डिस्काउंट दिखाकर ग्राहक को भ्रमित करना आसान नहीं होगा।
2. सर्च रिजल्ट में नहीं चलेगी मनमानी
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर ग्राहक किसी प्रोडक्ट का नाम या कैटेगरी सर्च करता है तो सबसे ऊपर दिखने वाले रिजल्ट खरीदारी के फैसले पर बड़ा असर डालते हैं। नए नियमों के तहत ई-कॉमर्स कंपनियां ऐसे तरीके से सर्च रिजल्ट को मैनिपुलेट नहीं कर सकेंगी, जिससे ग्राहक को गुमराह किया जाए या उसकी सर्च से जुड़े सही और प्रासंगिक रिजल्ट पीछे चले जाएं।
इसका मतलब है कि सिर्फ ज्यादा महंगा प्रोडक्ट होने, प्लेटफॉर्म के अपने ब्रांड का होने या किसी अन्य व्यावसायिक वजह से किसी प्रोडक्ट को इस तरह ऊपर दिखाना नियमों के दायरे में आएगा, जिससे सर्च रिजल्ट की प्रासंगिकता प्रभावित हो।
3. Sponsored प्रोडक्ट को पहचानना होगा आसान
कई बार किसी शॉपिंग वेबसाइट पर विज्ञापन या पेड लिस्टिंग सामान्य सर्च रिजल्ट जैसी ही दिखाई देती है। ग्राहक को तुरंत पता नहीं चलता कि कोई प्रोडक्ट इसलिए ऊपर दिख रहा है क्योंकि उसके लिए पैसे दिए गए हैं। नए नियमों के तहत Sponsored या Paid Listings को साफ और प्रमुख तरीके से डिस्क्लोज करना होगा। यानी ग्राहक को यह समझने में आसानी होगी कि सामने दिख रहा प्रोडक्ट सामान्य सर्च रिजल्ट है या पैसे देकर प्रमोट किया गया है।
4. Dark Patterns पर प्लेटफॉर्म को खुद करना होगा ऑडिट
ऑनलाइन शॉपिंग में Dark Patterns ऐसे डिजाइन या तरीके हैं, जिनके जरिए ग्राहक को उसकी इच्छा के खिलाफ कोई फैसला लेने के लिए प्रभावित किया जा सकता है। नए नियमों के तहत ई-कॉमर्स कंपनियों को Dark Patterns से जुड़े मौजूदा दिशानिर्देशों का पालन करना होगा। कंपनियों को हर साल अपना Self-Audit भी करना होगा और नियमों के पालन का सर्टिफिकेट प्रमुखता से दिखाना होगा। इसमें ऐसी चीजें शामिल हो सकती हैं जैसे बिना पूछे कार्ट में कोई सामान जोड़ना, झूठी जल्दबाजी दिखाना, कैंसिलेशन को जानबूझकर मुश्किल बनाना, विज्ञापन को सामान्य कंटेंट जैसा दिखाना या जरूरी जानकारी को छिपाना।
Dark Patterns पर प्लेटफॉर्म को खुद करना होगा ऑडिट
5. शिकायत करने पर ग्राहक को मिलेगी कॉपी
अगर ग्राहक किसी ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के खिलाफ शिकायत करता है, तो कंपनी के Grievance Officer द्वारा दर्ज की गई शिकायत की एक कॉपी ग्राहक को भी देनी होगी। इससे ग्राहक के पास इस बात का स्पष्ट रिकॉर्ड रहेगा कि उसने क्या शिकायत की थी और प्लेटफॉर्म ने उसे किस रूप में दर्ज किया है। विवाद की स्थिति में यह जानकारी आगे काम आ सकती है।
6. ऑनलाइन कंपनियों को National Consumer Helpline से जुड़ना होगा
नए नियमों के तहत हर ई-कॉमर्स कंपनी को National Consumer Helpline (NCH) के convergence process का हिस्सा बनना होगा। इसका मकसद ऑनलाइन खरीदारी से जुड़ी शिकायतों को राष्ट्रीय उपभोक्ता शिकायत निवारण व्यवस्था से ज्यादा मजबूती से जोड़ना है।
सरकार के आंकड़ों के मुताबिक 2025 में NCH को 17,71,622 शिकायतें मिली थीं। इनमें से 5,11,196 शिकायतें यानी करीब 29% ई-कॉमर्स से संबंधित थीं। ऐसे में ऑनलाइन शॉपिंग से जुड़ी शिकायतों के लिए यह बदलाव काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
7. प्रोडक्ट और Seller की ज्यादा जानकारी मिलेगी
अब ऑनलाइन मार्केटप्लेस को ग्राहकों को प्रोडक्ट और विक्रेता से जुड़ी जरूरी जानकारी उपलब्ध करानी होगी। इसमें Best Before/Use Before Date, Return और Refund Terms, Warranty, Delivery और Payment Details जैसी जानकारी शामिल होगी। इससे ग्राहक खरीदारी करने से पहले प्रोडक्ट और Seller की शर्तों को ज्यादा अच्छी तरह समझ सकेगा और बाद में होने वाले विवादों की संभावना कम हो सकती है।
8. बिना मतलब के Hidden Charges पर लगेगी रोक
नए नियमों में ऐसे शुल्क को लेकर भी प्रावधान किया गया है, जो ऑनलाइन खरीदारी से सीधे संबंधित नहीं हैं। Marketplace ई-कॉमर्स कंपनियां कुछ निर्धारित अपवादों को छोड़कर ऐसे Bundled Fees नहीं वसूल सकेंगी, जिनका ऑनलाइन लेनदेन से कोई सीधा संबंध नहीं है।
मान लीजिए आपने ₹1,000 के जूते खरीदे और चेकआउट के समय आपकी जानकारी या अनुमति के बिना 'Account Protection' के नाम पर ₹50 जोड़ दिए गए। इस तरह के असंबंधित शुल्क पर नए नियमों के तहत रोक लगाने का प्रयास किया गया है।
9. Imported सामान में Country of Origin और Importer की जानकारी
अगर कोई प्रोडक्ट विदेश से इंपोर्ट किया गया है, तो ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को उसके Importer का नाम और विवरण और Country of Origin भी बताना होगा। इससे ग्राहक को यह जानने में मदद मिलेगी कि सामान किस देश में बना है और उसे भारत में कौन इंपोर्ट कर रहा है। इससे प्रोडक्ट खरीदने से पहले जानकारी के आधार पर फैसला लेना आसान होगा।
10. ग्राहक का डेटा मनमाने तरीके से इस्तेमाल नहीं होगा
नए नियम ग्राहक की जानकारी और डेटा को लेकर भी महत्वपूर्ण बदलाव करते हैं। मार्केटप्लस ई-कॉमर्स कंपनियां कुछ निर्धारित उद्देश्यों के लिए ग्राहक की जानकारी का इस्तेमाल उसकी स्पष्ट और सहमति-सूचक मंजूरी (Express and Affirmative Consent) के बिना नहीं कर सकेंगी यानी कुछ खास व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए ग्राहक की स्पष्ट सहमति जरूरी होगी। इससे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर ग्राहक की गतिविधियों से मिलने वाली जानकारी के इस्तेमाल को लेकर ज्यादा स्पष्ट सीमाएं तय होंगी।
ग्राहक के लिए आखिर क्या बदलेगा?
इन सभी बदलावों को एक साथ देखें तो नए नियम ऑनलाइन शॉपिंग के लगभग हर महत्वपूर्ण चरण को प्रभावित करते हैं। प्रोडक्ट सर्च करने से लेकर डिस्काउंट देखने, Sponsored Listing पहचानने, सेलर की जानकारी लेने, Hidden Charges से बचने और खरीदारी के बाद शिकायत दर्ज करने तक ग्राहक को ज्यादा पारदर्शिता मिलने की उम्मीद है।
हालांकि, इन नियमों का असली असर इनके लागू होने के बाद प्लेटफॉर्म द्वारा किए जाने वाले अनुपालन और निगरानी पर निर्भर करेगा। फिलहाल ग्राहकों के लिए सबसे बड़ी राहत यह है कि 1 जनवरी 2027 से ऑनलाइन शॉपिंग में फेक डिस्काउंट, भ्रामक सर्च रिजल्ट, छिपे हुए शुल्क और कुछ तरह के Dark Patterns पर ज्यादा स्पष्ट नियम लागू होंगे।
