पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष का असर अब भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर भी दिखने लगा है। दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा LPG आयातक देश होने के कारण भारत काफी हद तक होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भर है। इस रूट पर सप्लाई प्रभावित होने से गैस की उपलब्धता पर दबाव बढ़ा है।
महंगे LPG की छुट्टी, अब DME पर बनेगा खाना, चूल्हा भी बदलने की जरूरत नहीं
LPG की कमी से बदला कुकिंग ट्रेंड
गैस सप्लाई में आई दिक्कतों के चलते कई लोग अब इंडक्शन कुकटॉप और अन्य विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं, हालांकि सरकार का कहना है कि देश में पर्याप्त LPG सप्लाई बनाए रखने के प्रयास जारी हैं।
DME ब्लेंडिंग से 20% तक आयात घटाने का दावा
एक नई रिपोर्ट के अनुसार, भारत LPG में 20% डाइमिथाइल ईथर (DME) मिलाकर हर साल करीब 6.3 मिलियन टन तक आयात कम कर सकता है। यह रिपोर्ट EY-Parthenon और New Era Cleantech Solution Ltd ने जारी की है।
क्या है DME और क्यों है खास
वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद के अनुसार, DME एक स्वच्छ और पर्यावरण के अनुकूल ईंधन है। यह एक सिंथेटिक गैस है, जो कोयला गैसीफिकेशन से तैयार होती है। यह न केवल कम प्रदूषण फैलाती है, बल्कि इसकी ऊर्जा क्षमता भी पारंपरिक ईंधनों के बराबर मानी जाती है।
घरेलू गैस में भी हो सकता है इस्तेमाल
DME को LPG के विकल्प या उसके साथ मिलाकर इस्तेमाल किया जा सकता है। इसे घरेलू रसोई गैस और औद्योगिक ईंधन के रूप में भी उपयोग में लाया जा सकता है। भारतीय मानक ब्यूरो ने पहले ही 20% तक DME-LPG ब्लेंडिंग की अनुमति दे दी है। फिलहाल भारत में DME का उत्पादन सीमित स्तर पर ही हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार स्पष्ट ब्लेंडिंग नीति बनाती है, तो इससे निवेश बढ़ेगा और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा।
चीन इस क्षेत्र में सबसे आगे
DME उत्पादन के मामले में चीन दुनिया में सबसे आगे है और उसकी हिस्सेदारी लगभग 90% है। इसका कारण वहां की मजबूत कोल-टू-केमिकल इंडस्ट्री है।
