Mutual Funds: पिछले कुछ सालों के दौरान म्यूचुअल (Mutual Funds) एक बेहद आकर्षक इन्वेस्टमेंट के रूप में लोगों के सामने आए हैं। अगर आप भी म्यूचुअल फंड्स में इन्वेस्ट करते हैं या फिर इन्वेस्ट करने के बारे में विचार कर रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बहुत काम की साबित हो सकती है। म्यूचुअल फंड्स कई प्रकार के होते हैं और विभिन्न प्रकार के फंड्स में इन्वेस्टमेंट के अपने बेनेफिट्स और रिस्क भी होते हैं। आज हम आपको एक्टिव और पैसिव म्यूचुअल फंड्स के बारे में बताने जा रहे हैं। आइये जानते हैं कि एक्टिव और पैसिव फंड्स क्या होते हैं और आपके लिए कौन सा ऑप्शन ज्यादा बेहतर साबित हो सकता है।
क्या होते हैं एक्टिव और पैसिव फंड, इन्वेस्ट करने से पहले जान लें
क्या होते हैं एक्टिव फंड्स?
एक्टिव फंड्स ऐसे फंड्स को कहा जाता है जिनमें एक फंड मैनेजर आपके फंड्स की देखरेख करता है। इन्वेस्ट करने से पहले फंड मेनेजर आपके बजट और अन्य चीजों के आधार पर रणनीति तैयार करते हैं। रणनीति तैयार करने के बाद फंड मेनेजर लगातार फंड्स की खरीद और बिक्री से संबंधित जरूरी फैसले लेते हैं। इन्वेस्टर्स इस तरह के फंड्स को इसलिए ज्यादा पसंद करते हैं क्योंकि इन्हें इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स द्वारा मैनेज किया जाता है।
अब समझते हैं पैसिव फंड्स
पैसिव फंड्स को लोग ज्यादा पसंद करते हैं। पैसिव फंड्स में इन्वेस्ट करना आसान होता है क्योंकि इसमें बहुत ज्यादा रिसर्च करने की जरूरत नहीं पड़ती और न ही किसी प्रकार की रणनीति बनानी पड़ती है। पैसिव फंड में कोई एक्सपर्ट नहीं होता है। आसान शब्दों में कहें तो आपके पोर्टफोलियो में कौन सी कंपनियां शामिल होंगी ये निर्धारित करने का काम आप खुद करते हैं। इस तरह के फंड्स में रिसर्च पर कोई खर्च नहीं आता है और इसीलिए लोग ऐसे फंड्स को ज्यादा पसंद करते हैं।
