8th Pay Commission में पेंशन रिविजन का मुद्दा अब पेंशनरों की सबसे बड़ी मांगों में शामिल हो गया है। भारत पेंशनर समाज (Bharat Pensioners Samaj) और अखिल भारतीय रक्षा कर्मी संघ (All India Defence Employees Federation) जैसे संगठन सरकार से कह रहे हैं कि पेंशन और फैमिली पेंशन में बदलाव को वेतन आयोग के के टर्म ऑफ रेफरेंस यानी TOR में साफ तौर पर शामिल किया जाए। पेंशनर संगठनों की चिंता खास तौर पर उन केंद्रीय कर्मचारियों को लेकर है, जो 1 जनवरी, 2026 से पहले रिटायर हो चुके हैं।
TOR में पेंशन बढ़ोतरी की मांग
क्यों उठी यह मांग?
दरअसल, 8th Pay Commission का गठन 3 नवंबर, 2025 को हुआ था और इसे अपनी रिपोर्ट तैयार करने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। आयोग की बैठकों और चर्चाओं का दौर आगे बढ़ रहा है। ऐसे में पेंशनर संगठन चाहते हैं कि इस चरण में ही सरकार अपनी स्थिति साफ कर दे, ताकि बाद में पेंशन रिविजन को लेकर कोई भ्रम न रहे।
क्या होता है TOR?
TOR यानी टर्म ऑफ रेफरेंस का मतलब है कि आयोग को कौन-कौन से मुद्दों पर काम करना है और किन विषयों पर सरकार से सिफारिश करनी है।
आसान भाषा में समझें तो TOR असल में आयोग के लिए एक तरह का काम का दायरा तय करता है। इसमें यह बताया जाता है कि आयोग किन चीजों की समीक्षा करेगा, किन वर्गों को ध्यान में रखेगा और किन मामलों पर अपनी सिफारिश देगा। इसी वजह से पेंशनर संगठन चाहते हैं कि, पेंशन रिविजन का मुद्दा TOR में स्पष्ट रूप से लिखा हो। उनका तर्क है कि अगर किसी मुद्दे का आयोग के काम के दायरे में साफ उल्लेख हो, तो उस पर चर्चा, समीक्षा और सिफारिश का आधार ज्यादा मजबूत होता है।
TOR में पेंशन रिविजन का क्या मतलब?
पेंशनर संगठनों का कहना है कि मौजूदा TOR में पुराने पेंशनरों की पेंशन के रिविजन, पुराने और भविष्य के पेंशनरों के बीच समानता और फैमिली पेंशन के रिविजन का स्पष्ट उल्लेख नहीं है।
यही सबसे बड़ा सवाल है।
अगर कोई कर्मचारी ने 1 जनवरी, 2026 से पहले रिटायर हुआ है, तो नई सिफारिशों का उसकी पेंशन पर क्या असर होगा? क्या उसे भी उसी आधार पर रिवाइज्ड पेंशन मिलेगी, जिस आधार पर 2026 के बाद रिटायर होने वाले कर्मचारियों की पेंशन तय होगी? पेंशनर संगठन चाहते हैं कि इस मामले में पहले से स्पष्टता हो। उनका कहना है कि पेंशन केवल वेतन का कोई सामान्य लाभ नहीं है, बल्कि लंबे समय तक सरकारी सेवा देने के बाद मिलने वाला रिटायरमेंट बेनिफिट है। इसलिए पुराने पेंशनरों को नई वेतन और पेंशन व्यवस्था से बाहर नहीं किया जाना चाहिए।
1 जनवरी, 2026 की इतनी अहम क्यों है?
8th Pay Commission से जुड़े मामलों में 1 जनवरी, 2026 की तारीख अहम है। पेंशनर संगठन चाहते हैं कि पेंशन रिविजन का प्रभाव भी इसी तारीख से स्पष्ट किया जाए। इसका सीधा मतलब यह है कि जो कर्मचारी इस तारीख से पहले रिटायर हो चुके हैं, उनके लिए भी यह तय किया जाए कि नई पेंशन सिफारिशों का लाभ किस तरह मिलेगा। यही वजह है कि BPS ने सरकार से आधिकारिक तौर पर यह स्पष्ट करने की मांग की है कि 1 जनवरी 2026 से पहले रिटायर हुए पेंशनरों को सिर्फ उनकी रिटायरमेंट तारीख के आधार पर नई व्यवस्था से बाहर नहीं किया जाएगा।
फैमिली पेंशन भी बड़ी मांग
पेंशन रिविजन के साथ फैमिली पेंशन का मुद्दा भी पेंशनर संगठनों ने उठाया है। फैमिली पेंशन उन परिवारों के लिए बेहद अहम होती है, जिन्हें सरकारी कर्मचारी या पेंशनर की मृत्यु के बाद यह लाभ मिलता है। इसलिए संगठनों की मांग है कि 8th Pay Commission के दायरे में फैमिली पेंशन का स्पष्ट उल्लेख भी किया जाए। उनका कहना है कि केवल कर्मचारी या मौजूदा पेंशनर की पेंशन की समीक्षा पर्याप्त नहीं है। पेंशन से जुड़े सभी संबंधित रिटायरमेंट बेनिफिट की समीक्षा एक साथ होनी चाहिए।
पेंशनरों में समानता की मांग
पेंशनर संगठन पेंशन पैरिटी यानी पुराने और भविष्य के पेंशनरों के बीच समानता की भी मांग कर रहे हैं। मसलन, अगर समान पद और समान सेवा से जुड़े दो कर्मचारियों में एक पहले रिटायर हो गया और दूसरा बाद में, तो सिर्फ रिटायरमेंट की तारीख के कारण दोनों की पेंशन में बहुत बड़ा अंतर नहीं होना चाहिए। इसी वजह से पेंशनर चाहते हैं कि 8th Pay Commission पेंशन पैरिटी से जुड़े मामलों की भी समीक्षा करे और पुराने पेंशनरों को नई व्यवस्था के अनुरूप उचित लाभ मिले।
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