Monsoon Travel Trend: कभी मानसून आते ही घूमने का सारा प्लान चौपट हो जाता था। पहाड़ों पर फिसलन, रास्तों पर पानी और अचानक बिगड़ते मौसम के डर से लोग बारिश थमने का इंतजार करते थे। लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। यात्रियों को धूप से चमकते नजारे ही नहीं, बादलों में छिपे पहाड़, भीगी सड़कें और बारिश से धुली हरियाली भी लुभाने लगी है। यही कारण है कि मानसून भारत में तेजी से एक पसंदीदा ट्रैवल सीजन बन रहा है।
मानसून में ये दो जगहें हुई हिट- कहां जा रहे इंडिया वाले
खबरों के मुताबिक, इस मानसून होटल बुकिंग में पिछले साल के मुकाबले 53.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। बसों की बुकिंग तो 140 प्रतिशत तक बढ़ गई। ये आंकड़े बताते हैं कि बारिश अब सफर में रुकावट नहीं, बल्कि यात्रा की एक नई वजह बन रही है।
मानसून में कहां जा रहे इंडियावाले
मानसून में बदलते ट्रैवल ट्रेंड का सबसे खूबसूरत रंग पूर्वोत्तर भारत में दिखाई दे रहा है। Cleartrip के PeekABoo Trends Tracker के अनुसार, शिलॉन्ग में होटल बुकिंग 65 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ी है, जबकि गुवाहाटी में यह बढ़ोतरी 60 प्रतिशत से अधिक रही। वहीं नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश के लिए फ्लाइट बुकिंग में 62 प्रतिशत तथा होटल बुकिंग में 90 प्रतिशत से ज्यादा की ग्रोथ देखी गई है।
दरअसल, शिलॉन्ग को मॉनसून में देखने का अनुभव ही अलग होता है। घुमावदार सड़कों पर उतरते बादल, बारिश के बाद गहरा हुआ पेड़ों का हरा रंग और पहाड़ियों से अचानक फूट पड़ते झरने- यहां पहुंचकर लगता है जैसे मौसम खुद ही यात्रियों का स्वागत कर रहा हो। उमियम झील पर तैरती धुंध और एलीफेंट फॉल्स का उफनता पानी तस्वीरों से कहीं ज्यादा खूबसूरत दिखाई देता है।
वायनाड बना मॉनसून का नया सितारा
वहीं इस ट्रेंड ट्रेकर के अनुसार, केरल के वायनाड में होटल बुकिंग 160 प्रतिशत से अधिक बढ़ी है। बारिश के दिनों में यहां कॉफी के बागानों पर ठहरी बूंदें, धुंध से ढकी पहाड़ियां और जंगलों के बीच गुजरती सड़कें सफर को किसी फिल्मी दृश्य जैसा बना देती हैं। इसी तरह केरल के अलप्पुझा में भी होटल बुकिंग 145 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ी है। कोडाइकनाल और ऊटी में भी 70 प्रतिशत से अधिक लोगों ने जाने में दिलचस्पी दिखाई है।
मानसून में भी भा रहा गोवा
इंडिया के टॉप टूरिस्ट स्पॉट्स में से एक गोवा भी अब सिर्फ सर्दियों या समुद्र किनारे धूप सेंकने वाला ठिकाना नहीं रह गया है। मॉनसून में यहां होटल बुकिंग 110 प्रतिशत से अधिक बढ़ी। इस मौसम में गोवा का एक दूसरा चेहरा सामने आता है% कम भीड़ वाले समुद्र तट, बारिश में नहाते नारियल के पेड़ और हरे-भरे रास्तों के बीच शांत ड्राइव।
वैसे और भी कई जगहें हैं जहां लोग मानसून में जाने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। इनमें पुडुचेरी में बुकिंग 104 प्रतिशत, विशाखापट्टनम में 85 प्रतिशत और उदयपुर में 50 प्रतिशत - से ज्यादा बढ़ी है।
छोटी छुट्टियां, अकेले सफर और नए ठिकाने
मानसून ट्रैवल को बढ़ाने में युवाओं की बड़ी भूमिका है। सोलो फ्लाइट बुकिंग में 65 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। यात्री अब लंबी छुट्टियों का इंतजार करने के बजाय दो-तीन दिन के छोटे ब्रेक, मध्यम बजट वाले होटल और कम भीड़ वाले ठिकाने चुन रहे हैं। साथ ही वे 'परफेक्ट मौसम' खोजने के बजाय हर मौसम का अपना रंग देखना चाहते हैं।
हालांकि बारिश में सफर रोमांटिक जरूर है, लेकिन इसी के साथ ही तैयारी भी जरूरी है। पहाड़ी इलाकों में निकलने से पहले मौसम और रास्तों की स्थिति जांचें, नदी-झरनों के बहुत करीब जाने से बचें और स्थानीय प्रशासन की सलाह को नजरअंदाज न करें। थोड़ी सावधानी के साथ यह वही मौसम है, जिसमें रास्ते भी मंजिल जितने खूबसूरत नजर आते हैं।
