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वो यात्री: एक व्यापारी कैसे बना दुनिया का सबसे बड़ा घुमक्कड़, देश पहुंचने पर हो गया जेल में कैद

Great travellers of the world (Marco Polo Travelogue): जब भी दुनिया के सबसे मशहूर घुमक्कड़ों की बात होती है, तो मार्को पोलो का नाम जरूर सामने आता है। उनकी जिंदगी किसी रोमांचक कहानी से कम नहीं थी। यहां पढ़ें इस शख्स की अनूठी कहानी। कौन थे मार्को पोलो और कैसे उन्होंने घूमने को लेकर लोगों का नजरिया ही बदल दिया था। अपनी इस 'वो यात्री' सीरीज में हम ऐसे ही कुछ चुनिंदा ट्रैवलर्स की कहानी लेकर आए हैं जिन्होंने अपनी यात्राओं से कभी देश ढूंढे तो कभी संस्कृतियों के सेतु बने। लेकिन अब इतिहास में उनकी कहानी कुछ किताबों में ही दबी है। अगर आप भी ट्रैवल के शौकीन हैं और ऐसी कहानियों से जुड़ना चाहते हैं तो हमारी वो यात्री सीरीज से जुड़ जाएं।

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मार्को पोलो की अद्भुत यात्रा
Authored by: prabhat sharma
Updated Mar 6, 2026, 14:55 IST

Great travellers of the world (Marco Polo Travelogue): पूल में खेले जाने वाले गेम मार्को पोलो के बारे में तो आपने जरूर सुना होगा। इस खेल में एक व्यक्ति आंखें बंद करके बाकी लोगों को ढूंढने की कोशिश करता है। वह सिर्फ उनकी आवाज के सहारे पानी में आगे बढ़ता है और अनजान जगह में रास्ता तलाशता है। कुछ ऐसा ही सफर असली मार्को पोलो ने भी किया था, बस फर्क इतना था कि उनका एडवेंचर कहीं ज्यादा बड़ा और असली था।

अगर यह समझना चाहते हैं कि मार्को पोलो की यात्राओं ने इतिहास को कैसे बदला, तो पहले यह जानना जरूरी है कि आखिर वह थे कौन। 1254 में इटली में जन्मे मार्को पोलो पेशे से एक व्यापारी थे। उनका परिवार पहले से ही व्यापार में काफी नाम कमा चुका था लेकिन मार्को पोलो सिर्फ अपने परिवार की दौलत की वजह से मशहूर नहीं हुए। असली पहचान उन्हें उनकी रोमांचक यात्राओं से मिली। यात्रा का शौक उन्हें परिवार से ही मिला था। उनके पिता निकोलो पोलो और चाचा माफेओ पोलो भी व्यापारी और यात्री थे।

मार्को पोलो दुनिया का सबसे बड़ा घुमक्कड़

मार्को पोलो दुनिया का सबसे बड़ा घुमक्कड़

एक धमाकेदार सफर की कहानी

मार्को पोलो जब 17 साल के थे तब वह अपनी पहली बड़ी एडवेंचर यात्रा पर निकले थे। पिता और चाचा के साथ उनका ये सफर शुरू हुआ था। उन्हें कुछ जरूरी सामान और नए पोप का एक पत्र मंगोल सम्राट कुबलाई खान तक पहुंचाने का काम मिला था। यहीं से शुरू हुआ था उनके जीवन का असली एडवेंचर। परिवार ने लंबा सफर तय किया, जो आज के सिल्क रोड के नाम से जाना जाता है।

लेकिन यह कोई आसान सफर नहीं था। रास्ते में बहुत मुश्किलें थीं। सबसे पहले उन्हें मेडिटेरेनियन और ब्लैक सी पार करना पड़ा, उसके बाद वो पहुंचे मिडिल ईस्ट में। फिर आया सबसे खतरनाक वाला चैलेंज दुनिया के सबसे ऊंचे पहाड़ों में से एक पामीर के बर्फीले पहाड़ जहां ठंड इतनी कि हड्डियां जम जाएं। इसके बाद उन्हें तकलामकान रेगिस्तान पार करना पड़ा, करीब 96,000 स्क्वायर माइल का रेगिस्तान, जहां रेत के ऊंट की तरह लहरें उठती हैं।

ये सफर साल 1271 में शुरू हुआ, लेकिन सम्राट के महल तक वो 1275 में पहुंचे यानि उन्हें वहां पहुंचने में लगभग 4 साल का समय लगा। बीच में तमाम मुश्किलें झेलनी पड़ीं जैसे- प्यास लगी तो पानी का नामोनिशान नहीं, जंगली जानवरों से खतरा और भी तमाम तरह की मुश्किलें जिसका उन्होंने सामना किया। लेकिन, सारी मेहनत रंग लाई। सम्राट ने उनका स्वागत किया और मार्को पोलो को चीन और आसपास के इलाकों में राजदूत नियुक्त किया। मार्को पोलो ने वहां की भाषाएं और रिवाज जल्दी सीख लिए और तकरीबन 17 साल तक कुबलाई खान के दरबार में सेवा दी।

मार्को पोलो के धमाकेदार सफर की कहानी

मार्को पोलो के धमाकेदार सफर की कहानी

इस्तांबुल की यात्रा

मार्को पोलो जब चीन (काथे) से वापस लौट रहे थे, तो रास्ते में उन्होंने इस्तांबुल का भी दौरा किया था। यह साफ नहीं है कि मार्को पोलो वहां कितने दिन रुके, लेकिन उनकी यात्रा के बारे में जो पुरानी किताबें हैं, उनमें इस्तांबुल की झलक मिलती है। ले डेविसमेंट डु मोंडे किताब के पहले चैप्टर में पोलो परिवार की एक छोटी पेंटिंग है। जो आज फ्रांस की बिब्लियोथेक नेशनल डे फ्रांस में देखी जा सकती है।

घर वापसी की यात्रा

17 साल कुबलाई खान के दरबार में सेवा देने के बाद, 1292 में मार्को पोलो और उनके परिवार को चीन छोड़ने की अनुमति मिली। लेकिन जाने से पहले उन्हें एक और काम मिला। फारसी राजकुमार को मंगोलियाई राजकुमारी के पास शादी के लिए भेजना था। असली रोमांच यहीं से शुरू हुआ। घर वापस लौटने में उन्हें लगभग तीन साल लग गए।

भारतीय महासागर के रास्ते वेनिस तक यात्रा उन्हें करनी थी लेकिन, सफर इतना कठिन था कि कई नाविकों की रास्ते में ही मौत हो गई। राजकुमार की भी यात्रा के दौरान मौत हो गई, जिससे यात्रा और लंबी हो गई, क्योंकि राजकुमारी की शादी के लिए नया वर ढूंढना पड़ा।

मार्को पोलो की अद्भुत यात्रा

मार्को पोलो की अद्भुत यात्रा

वापसी और जेल की कहानी

मार्को पोलो लंबी यात्रा करके वेनिस पहुंचे थे। वह इतने लंबे समय तक घर से दूर रहे कि वेनेस के लोग उन्हें पहचान ही नहीं पाए। ऊपर से इटैलियन लैंग्वेज भूल चुके थे जिसके चलते उन्हें फिर से अपनी भाषा सुधारनी पड़ी। घर लौटने के बाद मार्को पोलो वेनेस और जिनोआ के बीच हुए युद्ध में शामिल हो गए थे। युद्ध के दौरान उन्हें पकड़कर जिनोआ की जेल में डाल दिया गया था।

यही वो जगह थी जहां उनकी यात्राओं की कहानी लिखने का सिलसिला शुरू हुआ। जेल में रस्टिचेलो दा पिसा नाम का लेखक मिला जिसने मार्को पोलो की स्टोरीज को पन्नों पर उतारने का काम किया था। जेल में बैठे-बैठे ट्रैवल डायरी बनी- द ट्रैवल्स ऑफ मार्को पोलो।

युद्ध खत्म हुआ और मार्को पोलो 1299 में जेल से रिहा हुए। 1300 में उनकी यात्राओं की कहानियां छपीं- फार ईस्ट के खजाने, सोने-चांदी के पहाड़। ये किताबें यूरोप के लोगों के दिमाग में घर कर गईं और उनके दिलों में विदेश जाने को लेकर जिज्ञासा पैदा हो गई।

मार्को पोलो का दुनिया बदल देने वाला सफर

मार्को पोलो का दुनिया बदल देने वाला सफर

एक लंबी विरासत

मार्को पोलो की किताब- 'द ट्रैवल्स ऑफ मार्को पोलो' आज भी फेमस है। ये किसी एंडलेस ट्रैवल व्लॉग से कम नहीं है जो सदियों बाद भी मैपमेकर्स के लिए बाइबल बनी रही। माना जाता है कि कोलंबस को भी इसने इंस्पायर किया था। नोट्स बना-बनाकर वो तो किताब की कॉपी रखकर घूमते थे। यह सब 1492 से पहले की बात है, जब कोलंबस ने अमेरिका की खोज की थी।

मार्को पोलो ने अपनी यात्राओं के दौरान कई अनोखे अनुभव भी किए। कहा जाता है कि उन्होंने चीन में आइसक्रीम खाई और फिर उसे यूरोप में लोकप्रिय बनाया। वहीं, मार्को पोलो पहले यूरोपीय थे, जिन्होंने कुछ विदेशी जानवर देखे जैसे कि गैंडा। मजेदार बात यह है कि उन्होंने इसे पहले यूनिकॉर्न (मिथिकल बीस्ट) समझा था।

घर लौटकर मार्को पोलो ने सेटल होने का फैसला किया। उन्होंने शादी की, तीन बेटियां हुईं। बाकी जिंदगी कोई नया एडवेंचर नहीं उन्होंने शांत और सादा जीवन बिताया और फिर कभी लंबी यात्राओं पर नहीं गए। लेकिन, जब वह अपने जीवन के अंत में थे तब आसपास के लोगों और दोस्तों ने दबाव डाला और पूछा कि उनकी यात्रा की कहानियां कितनी सच हैं तो मार्को ने ठहाका लगाया और बोला- 'मैंने तो केवल आधी बातें ही लिखी हैं, असली दुनिया इससे भी ज्यादा अद्भुत है।'

NREC कॉलेज खुर्जा के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉक्टर नीरज सिंह के मुताबिक मार्को पोलो को सिर्फ घुमक्कड़ नहीं, बल्कि इतिहास बदलने वाला यात्री भी कहा जा सकता है। उस दौर में जब ना ठीक से नक्शे थे और ना ही सुरक्षित रास्ते, तब उन्होंने हजारों किलोमीटर की यात्रा की थी। उनकी खास बात यह थी कि वो जहां भी गए, वहां की संस्कृति, लोगों की जिंदगी और व्यापार के बारे में समझने की कोशिश की।

डॉक्टर नीरज सिंह ने कहा, 'आज के ट्रैवलर्स को मार्को पोलो से सबसे बड़ी सीख जिज्ञासा और खुले दिमाग से यात्रा करने की लेनी चाहिए। आज हम फ्लाइट, इंटरनेट और गूगल मैप के सहारे आसानी से दुनिया घूम सकते हैं, लेकिन मार्को पोलो ने बिना सुविधाओं के सफर किया। उनसे यह सीख मिलती है कि यात्रा सिर्फ घूमने के लिए नहीं होती, बल्कि नई जगहों की संस्कृति, लोगों और उनकी सोच को समझने का मौका भी देती है। अगर सच में दुनिया को समझना चाहते हो तो मार्को पोलो की तरह सीखने की उत्सुकता और साहस रखना चाहिए।'

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