बारिश में लोहागढ़ फोर्ट की हरियाली और बादलों से घिरी पहाड़ियां ट्रेकिंग का शानदार अनुभव देती हैं। लेकिन मानसून में फिसलन, तेज हवा और बदलता मौसम ट्रेक को चुनौतीपूर्ण भी बना सकता है। इसलिए अगर आप महाराष्ट्र के इस ऐतिहासिक किले की ट्रेकिंग का प्लान बना रहे हैं, तो कुछ जरूरी तैयारियां पहले से कर लेना बेहतर रहेगा।
लोहागढ़ फोर्ट का ट्रेक बारिश के मौसम में ट्रेकिंग लवर्स के लिए जन्नत माना जाता है। हालांकि ट्रेक की प्लानिंग सही से करना जरूरी है। अगर आप भी लोहागढ़ फोर्ट ट्रेक पर जाना चाहते हैं, तो सही समय, सही जूते और मौसम की जानकारी आपकी ट्रिप को सुरक्षित और यादगार बना सकती है। देखें बारिश के मौसम में लोहागढ़ फोर्ट ट्रेक पर जाने से पहले किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
Lohagad Fort Trek
सुबह जल्दी शुरू करें ट्रेक
मानसून में दोपहर बाद बारिश तेज हो सकती है। इसलिए सुबह जल्दी ट्रेक शुरू करें ताकि आराम से ऊपर पहुंचकर समय पर वापस लौट सकें।
अच्छे ग्रिप वाले ट्रेकिंग शूज पहनें
बारिश के दौरान रास्ते पर काई और कीचड़ जमा हो जाता है। मजबूत ग्रिप वाले ट्रेकिंग शूज फिसलने का खतरा काफी कम कर देते हैं।
हल्का और जरूरी सामान ही रखें
पीठ पर हल्का बैग रखें। उसमें रेनकोट, पानी की बोतल, कुछ स्नैक्स, फर्स्ट एड किट, टॉर्च और मोबाइल के लिए वॉटरप्रूफ कवर जरूर रखें।
मौसम का अपडेट जरूर देखें
ट्रेक पर निकलने से पहले मौसम का पूर्वानुमान देख लें। यदि भारी बारिश या तेज हवा की चेतावनी हो, तो ट्रिप को आगे बढ़ाना बेहतर रहेगा।
फिसलन वाली जगहों पर सावधानी रखें
किले की सीढ़ियां और पत्थर बारिश में बेहद चिकने हो जाते हैं। जल्दबाजी न करें और जहां जरूरत हो वहां रेलिंग या चट्टानों का सहारा लेकर चलें।
ग्रुप में ट्रेक करना बेहतर है
अगर पहली बार लोहागढ़ फोर्ट जा रहे हैं, तो अकेले जाने के बजाय दोस्तों या किसी ट्रेकिंग ग्रुप के साथ जाएं। इससे जरूरत पड़ने पर तुरंत मदद मिल सकती है।
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लोहागढ़ फोर्ट की चढ़ाई आना जाना मिलाकर करीब 5-6 किलोमीटर है। इसको पूरा करने में 1 से 2 घंटे लग सकते हैं, ट्रेक के दौरान हरे-भरे पहाड़, बादलों से ढकी घाटियां, छोटे झरने और ऊपर से दिखने वाला शानदार नजारा मानसून में बेहद खूबसूरत लगता है।
