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मेरी मणिकरण यात्रा, गर्म पानी के कुंड से लेकर दिव्य एहसास तक का सफर

Manikaran Himachal Pradesh: दिल्ली से शुरू हुआ मेरा मणिकरण का सफर सिर्फ एक यात्रा नहीं बल्कि आस्था और रोमांच का अनोखा अनुभव था। पहाड़ों, गर्म कुंडों और आध्यात्मिक माहौल ने मेरा दिल छू लिया।

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दिल्ली से मणिकरण तक का सफर (फोटो: AI)
Authored by: prabhat sharma
Updated Jun 29, 2026, 13:26 IST
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Manikaran Himachal Pradesh: जिंदगी में कुछ सफर ऐसे होते हैं जो सिर्फ जगह नहीं दिखाते, बल्कि आपको अंदर से बदल देते हैं। मणिकरण की मेरी ये यात्रा भी बिल्कुल वैसी ही रही। दिल्ली से शुरू हुआ ये सफर धीरे-धीरे एक ऐसी कहानी में बदल गया जो मैं कभी नहीं भूल सकता। इस आर्टिकल के माध्यम से मैं कोशिश करूंगा कि आपको उसी एहसास तक ले चलूं। एक उम्मीद और उत्साह के साथ दिल्ली से मेरे सफर की शुरुआत हुई। दिल्ली की भीड़, ट्रैफिक और भागदौड़ से निकलते ही जैसे ही बस ने रफ्तार पकड़ी, वैसे ही मन थोड़ा हल्का होने लगा। सफर की शुरुआत में भी एक अलग सा रोमांच था, क्योंकि मंजिल थी- मणिकरण, जो अपने आप में रहस्यमयी और आध्यात्मिक जगह मानी जाती है।

शहर से पहाड़ों की ओर बदलाव

दिल्ली से निकलकर चंडीगढ़ पहला बड़ा पड़ाव था। यहां मैंने थोड़ी देर रुककर हल्का-फुल्का नाश्ता किया। यहां से सफर शहरों से निकलकर पहाड़ों की तरफ बढ़ने वाला था। चंडीगढ़ से आगे बढ़ते ही सड़कें अब सीधी नहीं थीं, हवा में ठंडक बढ़ने लगी थी और दूर-दूर तक पहाड़ों की झलक दिखने लगी। असली पहाड़ी सफर की शुरुआत मंडी के रास्ते पर हुई। यहां रास्ते टेढ़े-मेढ़े, घुमावदार और बेहद खूबसूरत थे। एक तरफ ऊंचे पहाड़, दूसरी तरफ नीचे बहती नदी ऐसा लग रहा था जैसे किसी फिल्म का सीन हो।

रास्ते में एक छोटी सी ढाबे वाली जगह पर रुककर दाल, चावल, सब्जी और गर्म-गर्म रोटी खाया और आगे की तरफ बढ़ गया। कुल्लू की तरफ बढ़ते ही नजारा पूरी तरह बदल गया। चारों तरफ हरियाली ही हरियाली, सेब के पेड़, देवदार के जंगल और दूर बहती ब्यास नदी। माहौल ऐसा कि मन खुद-ब-खुद शांत होने लगा।

यहां एक जगह रुककर मैंने मैगी और चाय ली। पहाड़ी हवा में मैगी का स्वाद बिल्कुल अलग ही था। इसके बाद कसोल और पार्वती वैली की ओर बस निकल पड़ी। भुंतर पहुंचकर असली रोमांच शुरू हुआ। यहीं से रास्ता मणिकरण और कसोल की तरफ जाता है।

गाड़ी के साथ-साथ पार्वती नदी चल रही थी उसका तेज बहाव और नीला-हरा पानी देखकर ऐसा लगा जैसे कोई जादुई दुनिया में आ गया हूं। कसोल का माहौल थोड़ा अलग है। यहीं से रास्ता मणिकरण की ओर जाता है।

एहसास है मणिकरण (फोटो: Pinterest)

एहसास है मणिकरण (फोटो: Pinterest)

मणिकरण पहुंचते ही पहला एहसास

मणिकरण कोई साधारण जगह नहीं है। गर्म पानी की भाप और हवा में एक अजीब सा सुकून मणिकरण की पहचान है। यहां एक तरफ गुरुद्वारा है और दूसरी तरफ शिव मंदिर। दोनों ही आस्था के केंद्र हैं और दोनों के बीच एक अलग ही आध्यात्मिक ऊर्जा महसूस होती है।

1- लंगर का अनुभव

यहां पहुंचकर सबसे खास अनुभव जो मैंने लिया वो था गुरुद्वारे का लंगर। सादा खाना- दाल, चावल, सब्जी और हलवा। लेकिन उस खाने में जो अपनापन था, वो शायद किसी 5 स्टार होटल में भी नहीं मिले। यहां लोग एक साथ बैठकर खाना खा रहे थे, कोई भेदभाव नहीं बस सेवा और आस्था।

2- गर्म पानी का कुंड

प्रकृति का चमत्कार या फिर मणिकरण का सबसे चौंकाने वाला हिस्सा गर्म पानी का कुंड है। बाहर ठंडी हवा चल रही होती है, लेकिन पानी इतना गर्म कि हाथ डालते ही अलग एहसास होता है। लोगों का मानना है कि यह पानी प्राकृतिक रूप से गर्म होता है और इसमें औषधीय गुण भी हैं।

खूबसूरत मणिकरण की यात्रा (फोटो: Pinterest)

खूबसूरत मणिकरण की यात्रा (फोटो: Pinterest)

3- मंदिर और आस्था का माहौल

यहां शिव मंदिर का माहौल बहुत शक्तिशाली है जहां घंटों बैठकर लोग ध्यान लगाते हैं। मुझे भी यहां बैठकर ऐसा लगा जैसे समय रुक गया हो।

ना भविष्य की चिंता ना कोई भागदौड़ बस एक शांति और घंटों में यहां बैठा रहा।

4- रात का अनुभव

पहाड़ों की ठंड और सन्नाटे ने मेरे रात के अनुभव को बेहद खास बना दिया। रात में जब मैं वहां रुका, तो असली पहाड़ी ठंड महसूस हुई ये दिल्ली वाली ठंड से काफी अलग और सुखद होती है। चारपाई पर लेटे हुए आसमान में तारे इतने साफ दिख रहे थे जैसे हाथ बढ़ाकर छू सकते हों। चारों तरफ बस नदी की आवाज और हल्की हवा ने मेरे अनुभव को और भी ज्यादा खास बना दिया।

हिमाचल की गोद में बसा स्वर्ग (फोटो: Pinterest)

हिमाचल की गोद में बसा स्वर्ग (फोटो: Pinterest)

एहसास है मणिकरण

अगर सच कहूं तो मणिकरण की ये यात्रा सिर्फ घूमने की नहीं थी। दिल्ली की भागदौड़ से निकलकर ये एक ऐसा अनुभव था जिसने मुझे अंदर से शांत कर दिया। समय धीमा, लोग सरल और यहां आकर ऐसा लगा जैसे मैं किसी दूसरी दुनिया में आ गया हूं। मणिकरण मुझे सिर्फ एक जगह नहीं लगी, बल्कि एक एहसास लगी। ऐसा एहसास जो शायद बार-बार नहीं मिलता।

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