World Wide Web: ब्रिटिश कंप्यूटर वैज्ञानिक और CERN के सॉफ्टवेयर इंजीनियर टिम बर्नर्स-ली ने 1989 में वर्ल्ड वाइड वेब (WWW) का आविष्कार किया था। वर्ष 1990 तक HTTP, URI, HTML जैसी तीन एडवांस टेक्नोलॉजी का आविष्कार किया गया, जिसने कंप्यूटर इंडस्ट्री में क्रांति ला दी। लेकिन WWW जिसे W3 भी कहते हैं, को 30 अप्रैल, 1993 को CERN द्वारा पहली बार सार्वजनिक डोमेन में लाया गया। इस ऐतिहासिक दिन को आज पूरे 31 साल हो गए हैं।
World Wide Web
क्यों खास है यह दिन?
31 साल पहले आज ही के दिन सब कुछ बदल गया, जब 30 अप्रैल, 1993 को वर्ल्ड वाइड वेब नाम की चीज को सार्वजनिक डोमेन के लिए लॉन्च किया गया। कंप्यूटर वैज्ञानिक टिम बर्नर्स-ली ने इस दिन दुनिया के पहले वेब ब्राउजर और एडिटर के लिए सोर्स कोड जारी किया। जिस ब्राउजर को उन्होंने वर्ल्ड वाइड वेब नाम दिया, वह उभरते इंफॉर्मेशन नेटवर्क को ब्राउज करने का पहला रॉयल्टी-फ्री, उपयोग में आसान साधन बन गया, जो इंटरनेट में विकसित हुआ जिसे हम आज जानते हैं।
इसके बाद वेब ने किसी के लिए भी इंटरनेट नेविगेट करना आसान बना दिया था। यूजर्स को बस "ब्राउजर" प्रोग्राम लॉन्च करना था, एक यूआरएल (URL) टाइप करना था और रिटर्न दबाना था। इसने इंटरनेट के उस जीवंत ऑनलाइन कैनवास में परिवर्तन की शुरुआत की जिसका हम आज उपयोग करते हैं।
कैसे आया WWW का आइडिया?
बर्नर्स-ली ने 1996 में एक मीडिया इंटरव्यू में कहा था कि "लगभग वह सब कुछ (जानकारी और डेटा) जो आपको अपने दैनिक जीवन में जानना आवश्यक था, कहीं न कहीं लिखा हुआ था। 1980 के दशक में निश्चित रूप से यह कहीं न कहीं कंप्यूटर पर लिखा हुआ था। यह बहुत निराशाजनक था कि इसे टाइप करने में लोगों के प्रयास का उपयोग नहीं किया जा रहा था, जबकि इसे एक साथ बांधा जा सकता था ताकि हर कोई इसका इस्तेमाल कर सके।"
बर्नर्स-ली ने बाद में CERN को वर्ल्ड वाइड वेब को बिना किसी पेटेंट या फीस के सार्वजनिक डोमेन में जारी करने के लिए मना लिया। यही कारण है कि वर्ल्ड वाइड वेब को सभी के लिए ओपन बनाया गया था।
