हम में से लगभग हर किसी के घर में रात को सोने के लिए एक हल्के लाल, हरे और पीले रंग का बल्ब का इस्तेमाल किया जाता है। इस छोटे से बल्ब को हम सभी लोग बचपन से जीरो वॉट बल्ब के तौर पर जानते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर इस बल्ब को 'Zero Watt' बल्ब क्यों कहा जाता है। क्या सच में यह बल्ब जीरो वॉट बिजली की खपत करता है या फिर यू ही इसका नाम रख दिया गया है।
जीरो वाट बल्ब भी बढ़ाता है बिजली बिल। (फोटो क्रेडिट-iStock)
भारतीय घरों में 'जीरो वॉट बल्ब' एक बेहद आम शब्द है। रात के समय हल्की रोशनी के लिए, बच्चों के कमरे में, मंदिर में या गलियारे में अक्सर इसी बल्ब का इस्तेमाल किया जाता है। इस बल्ब को लेकर अक्सर लोगों में इस बात को लेकर डाउट रहता है कि वास्तव में यह कितने वॉट का होता है? क्या उसकी बिजली खपत सचमुच शून्य होती है? आइए आज सालों पुराने इस कंफ्यूजन को हमेशा के लिए दूर करते हैं और जानते हैं इसके पीछे का असली विज्ञान बताते हैं।
क्या वाकई 'जीरो वॉट' का होता है यह बल्ब?
इसका सीधा और साफ जवाब है- नहीं! विज्ञान और तकनीक की दुनिया में ऐसा कोई भी बल्ब नहीं है जो शून्य वॉट की बिजली की खपत करता हो। अगर कोई भी ऐसा बल्ब जो बिजली ले रहा है और रोशनी दे रहा है, तो वह शू्न्य वॉट का हो ही नहीं सकता।
फिर इसे 'जीरो वॉट' क्यों कहा जाने लगा?
इस बल्ब के नाम के पीछे की कहानी हमारे घरों में लगने वाले पुराने एनालॉग बिजली मीटरों से जुड़ी है। दशकों पहले जब घरों में डिजिटल मीटर नहीं होते थे, तब सुई और चक्राकार घूमने वाले एनालॉग मीटर हुआ करते थे। इन मीटरों की एक सीमा होती थी कि ये बहुत कम बिजली की खपत को रिकॉर्ड नहीं कर पाते थे। जब घर के सारे पंखे, ट्यूबलाइट और भारी उपकरण बंद कर दिए जाते थे और सिर्फ यह 10 या 12 वॉट का छोटा बल्ब जलता था, तो मीटर की डिस्क (चकरी) घूम ही नहीं पाती थी। मीटर की सुई शून्य (0) पर ही टिकी रहती थी।
लोगों ने देखा कि इस बल्ब को रातभर जलाने के बाद भी मीटर की रीडिंग नहीं बढ़ रही है, यानी मीटर 'जीरो' दिखा रहा है। बस यहीं से आम बोलचाल में इसका नाम 'जीरो वॉट का बल्ब' पड़ गया, जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी आज भी चला आ रहा है।
डिजिटल मीटर ने खोल दी 'पोल'
आजकल लगभग हर घर में डिजिटल बिजली मीटर (Digital Meters) लग चुके हैं। ये मीटर बेहद संवेदनशील होते हैं। डिजिटल मीटर 1 वॉट से भी कम की खपत को सटीकता से माप सकते हैं। इसलिए, जब आप आज के समय में इस पारंपरिक 10-15 वॉट वाले 'जीरो वॉट बल्ब' को जलाते हैं, तो डिजिटल मीटर इसकी खपत को तुरंत रिकॉर्ड कर लेता है और आपका बिजली बिल बढ़ता है।
वास्तव में कितने वॉट का होता है जीरो वॉट बल्ब?
पुराने पारंपरिक जीरो वॉट बल्ब आमतौर पर 10 वॉट से 15 वॉट तक बिजली की खपत करते थे। कुछ मॉडल 5 वॉट के भी होते थे, लेकिन वे कभी भी 0 वॉट के नहीं थे। आज के दौर में एलईडी तकनीक आने के बाद "जीरो वॉट एलईडी बल्ब" बाजार में उपलब्ध हैं। इनकी बिजली खपत आमतौर पर 0.3 वॉट, 0.5 वॉट, 0.8 वॉट या फिर 1 वॉट के आसपास होती है। यानी आधुनिक जीरो वॉट एलईडी बल्ब वास्तव में 1 वॉट से भी कम बिजली खर्च कर सकते हैं, लेकिन फिर भी उनकी खपत शून्य नहीं होती।
