NASA ने पिछले कुछ दशकों में कुछ ऐसे अंतरिक्ष मिशनों को अंजाम दिया है जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी तरफ खींचा है। NASA की मदद से इंसान चांद तक पहुंचा, अंतरिक्ष स्टेशन बनाए गए, अंतरिक्ष में दूरबीनें लगाई गईं और ब्रह्मांड के कई रहस्यों को समझा गया। इन उपलब्धियों से विज्ञान और शिक्षा को आगे बढ़ने में मदद मिली है। साथ ही, ऐसे मिशनों के दौरान विकसित हुई कई नई तकनीकों का फायदा धरती पर लोगों की रोज़मर्रा की जिंदगी में भी मिला है।
नासा के अंतरिक्ष प्रोग्रामों ने विज्ञान को एक नई रफ्तार दी है।
क्या आपने कभी सोचा है कि NASA के अंतरिक्ष से जुड़े प्रोग्रामों में कितने रुपये का खर्च आता होगा? अंतरिक्ष से संबंधित छोटे से छोटा मिशन भी अरबो डॉलर का होता है। नए अंतरिक्ष यान और तकनीक विकसित करना, रॉकेट लॉन्च करना, ज़रूरी सुविधाएँ तैयार करना, मिशन चलाना, जोखिम कम करना और कई साल तक मिशन को जारी रखना—इन सभी कामों में भारी लागत लगती है। इसलिए NASA के कई बड़े मिशन हमेशा से महंगे रहे हैं। आइए आपको NASA के 5 सबसे महंगे स्पेस प्रोग्रामों के बारे में बताते हैं।
Space Shuttle Program
नासा का स्पेस शटल प्रोग्राम, जिसे आधिकारिक तौर पर स्पेस ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम (STS) कहा जाता है, 1970 के दशक की शुरुआत में विकसित किया गया था। इसकी पहली अंतरिक्ष उड़ान 12 अप्रैल 1981 को हुई। यह प्रोग्राम जुलाई 2011 तक चला और इस दौरान कुल 135 मिशन पूरे किए गए।
2011 तक इस पूरे प्रोग्राम पर लगभग 113.7 बिलियन डॉलर (उस समय की कीमतों के अनुसार) खर्च हुए। अगर महंगाई को जोड़कर आज की कीमतों में देखा जाए, तो इसकी लागत लगभग 209 बिलियन डॉलर मानी जाती है। इस प्रोग्राम की मदद से इंसानों ने कई बार अंतरिक्ष की यात्रा की। 16 देशों के सैकड़ों अंतरिक्ष यात्री स्पेस शटल से अंतरिक्ष गए।
इसी के जरिए हबल स्पेस टेलीस्कोप को अंतरिक्ष में स्थापित किया गया और बाद में उसकी कई बार मरम्मत भी की गई। इसके अलावा इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) के कई बड़े हिस्से भी स्पेस शटल की मदद से अंतरिक्ष में पहुँचाए गए और जोड़े गए।
International Space Station
इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पृथ्वी की कक्षा में मौजूद एक बड़ी अंतरिक्ष प्रयोगशाला है, जिसे NASA और उसके कई अंतरराष्ट्रीय साझेदार मिलकर चलाते हैं। नवंबर 2000 से इसमें लगातार अंतरिक्ष यात्री रह रहे हैं और यह आज भी काम कर रहा है।
हाल के वर्षों में ISS को चलाने पर अकेले NASA का हर साल लगभग 3 बिलियन डॉलर खर्च होता रहा है, जो उसके ह्यूमन स्पेसफ्लाइट बजट का लगभग एक-तिहाई है। हालांकि, एक हालिया ऑडिट के अनुसार, वित्त वर्ष 2023 (FY2023) में यह खर्च लगभग 4.1 बिलियन डॉलर था। 2014 तक ISS के निर्माण, अंतरिक्ष में पहुँचाने और संचालन पर अमेरिका का कुल खर्च लगभग 75 बिलियन डॉलर आंका गया था। इसके बाद भी हर साल इसके रखरखाव और संचालन पर अरबों डॉलर खर्च किए जा रहे हैं।
ISS ने अंतरिक्ष विज्ञान में कई बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। इसने अंतरिक्ष में इंसानों की लगातार मौजूदगी बनाए रखी है और कई देशों को एक साथ मिलकर काम करने का मौका दिया है। यह माइक्रोग्रैविटी (बहुत कम गुरुत्वाकर्षण) में वैज्ञानिक प्रयोग करने की एक महत्वपूर्ण प्रयोगशाला है। इसके जरिए पृथ्वी का अध्ययन किया जाता है और बायोलॉजी, मटेरियल साइंस तथा नई तकनीकों से जुड़े कई प्रयोग किए जाते हैं।
Apollo Program
अपोलो प्रोग्राम NASA का वह ऐतिहासिक मिशन था, जिसका मुख्य उद्देश्य इंसानों को चाँद पर उतारना और उन्हें सुरक्षित वापस पृथ्वी पर लाना था। यह प्रोग्राम 1960 के दशक में शुरू हुआ। 1960 से 1973 के बीच इस पर अमेरिका ने लगभग 25.8 अरब डॉलर (उस समय की कीमतों के अनुसार) खर्च किए। अगर आज की कीमतों (2020 के डॉलर) में इसकी लागत देखी जाए, तो यह लगभग 257 अरब डॉलर मानी जाती है।
इस प्रोग्राम में बड़ी सफलताओं के साथ एक दुखद हादसा भी हुआ। 27 जनवरी 1967 को अपोलो 1 के ग्राउंड टेस्ट के दौरान स्पेसक्राफ्ट के केबिन में आग लग गई, जिसमें तीन अंतरिक्ष यात्री गस ग्रिसम, एड व्हाइट और रोजर बी. चैफी की मौत हो गई। इस दुर्घटना के बाद NASA को स्पेसक्राफ्ट के डिज़ाइन, इस्तेमाल होने वाले मटेरियल और सुरक्षा व्यवस्था में कई बड़े बदलाव करने पड़े। इससे प्रोग्राम की लागत भी काफी बढ़ गई।
अपोलो प्रोग्राम की सबसे बड़ी सफलता जुलाई 1969 में मिली, जब अपोलो 11 मिशन के जरिए पहली बार इंसानों ने चाँद पर कदम रखा और सुरक्षित पृथ्वी पर लौट आए। इसके बाद चाँद पर कई वैज्ञानिक प्रयोग किए गए और वहां से लाए गए नमूनों की मदद से महत्वपूर्ण रिसर्च हुई।
Hubble Space Telescope
हबल स्पेस टेलीस्कोप को अप्रैल 1990 में स्पेस शटल डिस्कवरी के जरिए अंतरिक्ष में भेजा गया था। यह दुनिया की सबसे सफल और सबसे ज़्यादा वैज्ञानिक खोज करने वाली अंतरिक्ष वेधशालाओं में से एक है। NASA के अनुसार, 1977 से इसके विकास और संचालन पर लगभग 16 बिलियन डॉलर (2021 की कीमतों के अनुसार) खर्च हुए हैं। हालांकि, इसमें हबल की मरम्मत और सर्विसिंग के लिए इस्तेमाल किए गए स्पेस शटल मिशनों का खर्च शामिल नहीं है।पिछले 30 से अधिक वर्षों में हबल ने 17 लाख (1.7 मिलियन) से ज़्यादा अवलोकन किए हैं और 20,000 से अधिक वैज्ञानिक शोध-पत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसकी वजह से वैज्ञानिकों को ब्रह्मांड के बारे में पहले से कहीं ज़्यादा जानकारी मिली है।
हबल की सबसे बड़ी उपलब्धियों में ब्रह्मांड के फैलने की गति को सटीक रूप से मापना, उसकी उम्र लगभग 13.8 अरब वर्ष बताना और डार्क एनर्जी के अस्तित्व के मजबूत सबूत देना शामिल है। इसकी प्रसिद्ध डीप फील्ड और अल्ट्रा डीप फील्ड तस्वीरों में हजारों ऐसी दूर-दराज़ की गैलेक्सियाँ दिखाई दीं, जिन्हें पहले कभी नहीं देखा गया था। इन तस्वीरों ने वैज्ञानिकों को अरबों साल पुराने ब्रह्मांड की झलक दिखाई।
James Webb Space Telescope
जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (JWST) NASA की सबसे उन्नत इन्फ्रारेड अंतरिक्ष वेधशाला है। इसे कई देरी के बाद दिसंबर 2021 में लॉन्च किया गया और अब यह पूरी तरह से काम कर रहा है। NASA के आंतरिक दस्तावेजों के अनुसार, इसके विकास और शुरुआती संचालन पर लगभग 9.7 बिलियन डॉलर का खर्च आया है। इसमें से लगभग 8.8 बिलियन डॉलर स्पेसक्राफ्ट बनाने में और लगभग 861 मिलियन डॉलर शुरुआती ऑपरेशन में खर्च हुए।JWST को खास तौर पर इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह ब्रह्मांड के शुरुआती तारों और गैलेक्सियों को देख सके, एक्सोप्लैनेट (सौर मंडल के बाहर के ग्रहों) के वातावरण का अध्ययन कर सके और सौर मंडल के बनने की प्रक्रिया को समझ सके। यह पृथ्वी से लगभग 15 लाख किलोमीटर दूर L2 पॉइंट पर स्थित है, जिससे यह बहुत स्थिर तरीके से अंतरिक्ष का निरीक्षण कर सकता है। इसकी उन्नत तकनीक और जटिल इंजीनियरिंग की वजह से इसकी लागत बहुत अधिक रही।
