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मोबाइल से मिसाइल तक सेमीकंडक्टर का साम्राज्य, अब भारत बनेगा चिप निर्माण का 'चैंपियन'

भारत ने अपनी पहली स्वदेशी सेमीकंडक्टर चिप बनाने में सफलता हासिल कर ली है। बीते सितंबर महीने में केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने यह चिप प्रधानमंत्री मोदी को सौंपी। इस चिप को विक्रम नाम दिया गया है और इसे भारत की अंतरिक्ष एजेंसी इसरो की सेमीकंडक्टर लैब ने तैयार किया है। यह एक पूरी तरह से भारत में बना 32-बिट माइक्रोप्रोसेसर है, जिसे रॉकेटों में इस्तेमाल करने के लिए बनाया गया है।

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Photo : iStock
सेमीकंडक्टर निर्माण का हब बनेगा भारत।
Edited by: Alok Rao
Updated Feb 21, 2026, 09:28 IST
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Semiconductor : सेमीकंडक्टर निर्माण के क्षेत्र में भारत बड़ी पहल करने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 21 फरवरी को यमुना एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथारिटी (YEIDA) के सेक्टर 28 में सेमीकंडक्टर निर्माण इकाई की आधारशिला रखेंगे। पीएम मोदी वर्चुअली इस कार्यक्रम से जुड़ेंगे। यह एचसीएल ग्रुप और फॉक्सकॉन का संयुक्त उपक्रम होगा। रिपोर्टों के मुताबिक यह इकाई 4000 करोड़ रुपये की लागत से 48 एकड़ क्षेत्र में विकसित की जा रही है। तकनीक में सेमीकंडक्टर की उपयोगिता एवं महत्व को देखते हुए भारत इसके निर्माण में एक मजबूत वैश्विक खिलाड़ी के रूप में उभरना चाहता है।

कहां-कहां होता है सेमीकंडक्टर का इस्तेमाल

मोबाइल और कंप्यूटर

प्रोसेसर, मेमोरी चिप और माइक्रोचिप से लेकर लैपटॉप व टैबलेट तक सभी उपकरण सेमीकंडक्टर पर आधारित हैं।

ऑटोमोबाइल उद्योग

आधुनिक कारों में इंजन कंट्रोल यूनिट, एयरबैग सिस्टम, सेंसर और इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी मैनेजमेंट में चिप्स का उपयोग होता है।

दूरसंचार

4G/5G नेटवर्क, राउटर, सैटेलाइट और फाइबर ऑप्टिक सिस्टम में सेमीकंडक्टर अहम भूमिका निभाते हैं।

चिकित्सा उपकरण

MRI, CT स्कैन, डिजिटल थर्मामीटर और अन्य डायग्नोस्टिक मशीनों में माइक्रोचिप्स लगी होती हैं।

रक्षा और अंतरिक्ष

मिसाइल गाइडेंस, रडार सिस्टम और सैटेलाइट तकनीक में इनका व्यापक उपयोग होता है।

घरेलू उपकरण

टीवी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन और स्मार्ट होम डिवाइस में भी चिप्स लगे होते हैं।

21वीं सदी का 'नया तेल' है सेमीकंडक्टर

सेमीकंडक्टर के बिना डिजिटल अर्थव्यवस्था संभव नहीं है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड कंप्यूटिंग और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) जैसी तकनीकें इन्हीं पर निर्भर हैं। किसी देश की तकनीकी आत्मनिर्भरता और आर्थिक शक्ति में सेमीकंडक्टर उद्योग का बड़ा योगदान होता है। इसलिए इसे 21वीं सदी का 'नया तेल' भी कहा जाता है।

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भारत का पहला स्वदेशी सेमीकंडक्टर चिप 'विक्रम'

भारत ने अपनी पहली स्वदेशी सेमीकंडक्टर चिप बनाने में सफलता हासिल कर ली है। बीते सितंबर महीने में केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने यह चिप प्रधानमंत्री मोदी को सौंपी। इस चिप को विक्रम नाम दिया गया है और इसे भारत की अंतरिक्ष एजेंसी इसरो की सेमीकंडक्टर लैब ने तैयार किया है। यह एक पूरी तरह से भारत में बना 32-बिट माइक्रोप्रोसेसर है, जिसे रॉकेटों में इस्तेमाल करने के लिए बनाया गया है।

आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स की रीढ़ है सेमीकंडक्टर

सेमीकंडक्टर आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स की रीढ़ हैं। यह कंप्यूटर, मोबाइल उपकरण, दूरसंचार, ऑटोमोबाइल, रक्षा प्रणालियों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता में इस्तेमाल होता है। तकनीक, इलेक्ट्राॉनक्स एवं विज्ञान में सेमीकंडक्टर की उपयोगिता को देखते हुए भारत अपने यहां इसके इको-सिस्टम को मजबूत करने पर तेजी से काम कर रहा है। हाल के वर्षों में भारत ने अपने यहां सेमीकंडक्टर की डिजाइन क्षमताओं का विस्तार किया है और देश भर में निर्माण, असेंबली तथा परीक्षण अवसंरचना को आगे बढ़ाया है। यह गति आत्मनिर्भर भारत के व्यापक दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने वाली है।

इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन पर जोर

बजट 2026–27 ने भारत की प्रौद्योगिकी महत्वाकांक्षाओं के लिए एक निर्णायक क्षण का संकेत दिया, जिसमें भारत सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 की घोषणा की गई। नया चरण ऐसे समय में घरेलू सेमीकंडक्टर क्षमताओं को गहरा करने के लिए स्पष्ट नीतिगत धक्का देता है जब चिप्स हर महत्वपूर्ण डिजिटल और औद्योगिक प्रणाली का आधार हैं। आईएसएम 2.0 भारत में सेमीकंडक्टर उपकरण और सामग्री उत्पादन पर केंद्रित होगा, पूर्ण स्टैक भारतीय सेमीकंडक्टर बौद्धिक संपदा डिजाइन करेगा, और घरेलू तथा वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करेगा। वित्तीय वर्ष 2026–27 के लिए आईएसएम 2.0 के लिए ₹1,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जिसमें उद्योग-नेतृत्व वाले अनुसंधान और प्रशिक्षण केंद्रों पर मजबूत जोर दिया गया है ताकि प्रौद्योगिकी विकास को बढ़ावा मिले और भविष्य के लिए तैयार कुशल कार्यबल तैयार हो।

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2030 तक 110 बिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद

भारत धीरे-धीरे वैश्विक सेमीकंडक्टर केंद्र के रूप में उभर रहा है। बड़े पैमाने पर निवेश, विनिर्माण क्षमता का विस्तार, और SEMICON India 2025 जैसे मंच भारत की सेमीकंडक्टर यात्रा में बढ़ते वैश्विक विश्वास को प्रतिबिंबित करते हैं। घरेलू चिप बाजार तेजी से वृद्धि कर रहा है। उद्योग अनुमानों के अनुसार, भारतीय सेमीकंडक्टर बाजार का आकार 2030 तक 100-110 बिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। यह विस्तार 'मेक इन इंडिया' और 'मेक फॉर द वर्ल्ड' के राष्ट्रीय दृष्टिकोण पर आधारित है, जो भारत को विनिर्माण आधार और वैश्विक आपूर्तिकर्ता दोनों के रूप में स्थापित कर रहा है।

  • भारत में मंजूर की गई सेमीकंडक्टर निर्माण परियोजनाएं
  • माइक्रॉन टेक्नोलॉजी इंक. की गुजरात में सेमीकंडक्टर निर्माण सुविधा स्थापित
  • टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स प्राइवेट लिमिटेड (टीईपीएल) की गुजरात में सेमीकंडक्टर निर्माण सुविधा
  • सीजी पावर एंड इंडस्ट्रियल सॉल्यूशंस लिमिटेड की गुजरात में सेमीकंडक्टर निर्माण संयंत्र
  • केन्स टेक्नोलॉजी इंडिया लिमिटेड की गुजरात में सेमीकंडक्टर निर्माण सुविधा स्थापित
  • वामा सुंदरी इन्वेस्टमेंट्स (दिल्ली) प्राइवेट लिमिटेड (वीएसआईपीएल) की उत्तर प्रदेश में सेमीकंडक्टर निर्माण इकाई
  • 3डी ग्लास सॉल्यूशंस इंक. (3डीजीएस) की ओडिशा में सेमीकंडक्टर निर्माण सुविधा
  • सिक्सेम प्राइवेट लिमिटेड की ओडिशा में सेमीकंडक्टर निर्माण सुविधा स्थापित कर रही है।

ताइवान बनाता है दुनिया का 60% सेमीकंडक्टर

आज सेमीकंडक्टर उद्योग कुछ ही देशों द्वारा हावी है, जिनमें ताइवान, दक्षिण कोरिया, जापान, चीन और संयुक्त राज्य शामिल हैं। ताइवान अकेले दुनिया के 60 प्रतिशत से अधिक सेमीकंडक्टर और लगभग 90 प्रतिशत सबसे उन्नत चिप्स का उत्पादन करता है, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएं बाहरी झटकों और भू-राजनीतिक तनावों के प्रति संवेदनशील हो जाती हैं। इसके जवाब में प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं अपनी रणनीतियां फिर बना रही हैं। संयुक्त राज्य, यूरोपीय संघ, जापान और दक्षिण कोरिया ने घरेलू चिप विनिर्माण को मजबूत करने और आपूर्ति श्रृंखलाओं को विविधीकृत करने के लिए राष्ट्रीय पहलें शुरू की हैं।

एक विश्वसनी साझेदार के रूप में खुद को स्थापित कर रहा भारत

भारत इस वैश्विक बदलाव में खुद को एक विश्वसनीय और भरोसेमंद साझेदार के रूप में स्थापित कर रहा है। भारत सेमीकंडक्टर मिशन इस क्षण का सीधा जवाब है। डिजाइन, विनिर्माण और नवाचार में घरेलू क्षमता निर्माण द्वारा, आईएसएम स्वावलंबन और तकनीकी संप्रभुता की ओर एक महत्वपूर्ण कदम है, साथ ही अधिक लचीली वैश्विक सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र में भारत की भूमिका को मजबूत करता है।इस रणनीति का मूल में सेमीकंडक्टर डिजाइन और प्रतिभा विकास पर मजबूत फोकस है, जो तकनीकी स्वावलंबन का आधार बनाते हैं।

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