Elon Musk,Twitter: ट्विटर के मालिक एलन मस्क ने आज एक और नया बम फोड़ा है। एलन मस्क ट्विटर का लोगो बदलने जा रहे हैं। कल से ये बदलाव होगा। वो लोगो को 'X' कर सकते हैं। ग्रैग नाम के एक यूजर के साथ ट्विटर स्पेस पर बातचीत में मस्क ने ट्विटर का लोगो बदलने की बात कही है। इसके साथ ही उन्होंने ट्विटर पर एक पोल क्रिएट कर लिखा, 'डिफॉल्ट प्लेटफॉर्म कलर को ब्लैक में बदलें।' दोपहर 1 बजे तक 588,666 से ज्यादा लोग इस पोल में वोट कर चुके थे। ज्यादातर लोगों ने अभी तक ब्लैक और व्हाइट में से ब्लैक को चुना है।
एलन मस्क
इसके पहले उन्होंने ट्वीट में कहा था कि, "अगर आज रात एक अच्छा एक्स लोगो पोस्ट किया जाता है, तो हम कल इसे दुनिया भर में लाइव कर देंगे।" मस्क ने एक अन्य ट्वीट में लिखा- 'जल्द ही हम ट्विटर ब्रांड और धीरे-धीरे सभी पक्षियों को अलविदा कह देंगे।'
अरबपति के दिमाग में है 'X' नाम
अरबपति के दिमाग में पिछले कुछ समय से 'X' नाम है। अप्रैल में नए सीईओ लिंडा याकारिनो का स्वागत करते हुए उन्होंने ट्वीट किया था, "इस प्लेटफॉर्म को एक्स, द एवरीथिंग ऐप में बदलने के लिए लिंडा के साथ काम करने को वह उत्सुक हैं।" अक्टूबर में, उन्होंने कहा था, "ट्विटर ख़रीदना एक्स को एवरीथिंग ऐप बनाने की दिशा में एक कदम है।"
नीली चिड़िया हटाकर डॉग को ट्विटर का लोगो बनाया था
4 महीने पहले एलन मस्क ने ट्विटर की नीली चिड़िया हटाकर एक डॉग को ट्विटर का लोगो बनाया था। उन्होंने एक ट्वीट में कहा था- जैसा वादा किया था, वह पूरा किया। हालांकि, बाद में उन्होंने दोबारा नीली चिड़िया को ट्विटर लोगो बना लिया था।
पिछले साल खरीदा था ट्विटर, रेवेन्यू में दिख रही गिरावट
पिछले साल टेस्ला के मालिक मस्क ने प्लेटफ़ॉर्म खरीदा था। जिसके बाद उन्होंने ज्यादातर कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया था। इसके बाद भी ट्विटर को बार-बार तकनीकी विफलताओं का सामना करना पड़ा है। विज्ञापन राजस्व में लगातार गिरावट का सामना करते हुए सोशल मीडिया कंपनी प्लेटफ़ॉर्म को फिर से पटरी में लाने का प्रयास कर रही है।
ट्विटर ब्लू प्रीमियम मेंबरशिप प्लान कर चुके हैं पेश
कंपनी, बिजनेस मॉडल के साथ आने की कोशिश कर रही है जो विज्ञापन के विकल्प हों। कंपनी की ट्विटर ब्लू प्रीमियम मेंबरशिप, जिसकी लागत 8 डॉलर प्रति माह (करीब 650 रुपये) है, में बहुत कम वृद्धि देखी गई है। इस महीने ट्विटर ने कुछ ट्विटर ब्लू ग्राहकों को उनके ट्वीट के साथ जुड़ाव की मात्रा के आधार पर विज्ञापन राजस्व का एक हिस्सा देना शुरू किया।
