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केंद्र ने SC को डिजिटल अरेस्ट पर 'सर्जिकल स्ट्राइक' प्लान सौंपा: 3 घंटे में साइबर फ्रॉड का होगा गेम ओवर

रिपोर्ट का सबसे बड़ा प्रस्ताव साइबर अपराध में इस्तेमाल हो रहे सिम कार्ड्स को 2–3 घंटे के भीतर ब्लॉक करने की व्यवस्था होगी। केंद्र सरकार ने कहा है कि वर्तमान प्रक्रिया में देरी से अपराधी शुरुआती घंटों में ठगी कर लेते हैं।

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सरकार ने डिजिटिल अरेस्ट स्कैम के खिलाफ तैयार कया प्लान।
Reported by: Gaurav SrivastavEdited by: Gaurav Tiwari
Updated Apr 28, 2026, 14:06 IST
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डिजिटल अरेस्ट के नाम पर हो रही संगठित साइबर ठगी पर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में व्यापक एक्शन प्लान पेश किया है। गृह मंत्रालय के तहत भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र की इस स्टेटस रिपोर्ट में टेलीकॉम, बैंकिंग, इंटरमीडियरी प्लेटफॉर्म और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए समयबद्ध और तकनीक-आधारित उपाय सुझाए गए हैं।

ये रिपोर्ट 9 फरवरी के सुप्रीम कोर्ट अनुपालन में दाखिल की गई है, जिसमें एजेंसियों के बीच समन्वय, त्वरित कार्रवाई और पीड़ितों के मुआवजे के ढांचे को प्राथमिकता दी गई है। रिपोर्ट भारत के अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमनी ने दाखिल की है।

1. 2-3 घंटे में संदिग्ध सिम ब्लॉक: टाइमलाइन बेहतर करने पर जोर

रिपोर्ट का सबसे बड़ा प्रस्ताव साइबर अपराध में इस्तेमाल हो रहे सिम कार्ड्स को 2–3 घंटे के भीतर ब्लॉक करने की व्यवस्था होगी। केंद्र सरकार ने कहा है कि वर्तमान प्रक्रिया में देरी से अपराधी शुरुआती घंटों में ठगी कर लेते हैं। वहीं टेलीकॉम विभाग को एक महीने में रिपोर्ट देने को कहा गया है।

2. BIVS सिस्टम: पूरे देश में सिम की एकीकृत निगरानी

बायोमेट्रिक आइडेंटिटी वेरिफिकेशन सिस्टम लागू कर सिम जारी करने की प्रक्रिया को केंद्रीकृत किया जाएगा। इसके अलावा एक व्यक्ति के नाम पर जारी सभी सिम का राष्ट्रीय स्तर पर रिकॉर्ड रखा जाएगा। इसके अलावा अलग-अलग ऑपरेटर से सिम लेने पर भी निगरानी होगी। 3 महीने में नियम अधिसूचित किए जाएंगे और 6 महीने में तकनीकी क्रियान्वयन होगा।

3. प्राइमरी सिम कन्फर्मेश’ मॉडल: नए सिम से पहले अनुमति

सरकार अतिरिक्त सिम जारी करने से पहले मौजूदा (प्राइमरी) सिम से पुष्टि लेने का मॉडल तैयार कर रही है। इससे पहचान की चोरी रोकने में मदद मिलेगी।

BIVS लागू होने के बाद इसे सिस्टम में जोड़ा जाएगा।

4. PoS एजेंट पर सख्ती: जिम्मेदारी अब कंपनियों की

सिम बेचने वाले Point of Sale एजेंटों की गड़बड़ियों के लिए टेलीकॉम कंपनियों को जिम्मेदार ठहराया गया है। फर्जी पहचान पत्र पर सिम जारी होने पर कंपनी जवाबदेह होगी। एक व्यक्ति द्वारा कई PoS पहचान का दुरुपयोग रोकने के निर्देश जारी किए जा चुके हैं। PoS ट्रेसबिलिटी और वेरिफिकेशन मजबूत करने की समयसीमा 2 महीने की होगी।

5. AI आधारित निगरानी: कॉल पैटर्न से ठगी पकड़ने की तैयारी

केंद्र सरकार ने टेलीकॉम कंपनियों को निर्देश दिया है कि AI/ML आधारित सिस्टम से संदिग्ध कॉल और सिम उपयोग की पहचान करनी होगी। रियल-टाइम डेटा साझा करना डिजिटल इंटेलिजेंस यूनिट (DIU) के साथ संदिग्ध नंबरों की साझा सूची बनाकर तुरंत ब्लॉकिंग करनी होगी।

Online Scam.

Online Scam.

6. SIM सप्लाई चेन की पूरी ट्रैकिंग अनिवार्य

रिपोर्ट में पाया गया कि कई मामलों में सिम की उत्पत्ति का पता लगाना मुश्किल होता है। अब निर्देश है कि सिम सप्लाई चेन का पूरा डेटा Digital Intelligence Platform पर उपलब्ध रहेगा। सभी डेटा फील्ड अनिवार्य रूप से भरे जाएं। साथ ही 1 से 2 महीने में ट्रेसबिलिटी सुनिश्चित करने की समयसीमा होगी।

7. व्हाट्सऐप पर कड़ा शिकंजा: 180 दिन डेटा रिटेंशन अनिवार्य

डिजिटल अरेस्ट स्कैम में व्हाट्सएप के इस्तेमाल पर सख्ती होगी। डिलीट अकाउंट का डेटा कम से कम 180 दिन तक सुरक्षित रखना पड़ेगा। फर्जी डिवाइस ID ब्लॉक करने की व्यवस्था होगी। लॉ एनफोर्समेंट एजेंसियों के लोगो के दुरुपयोग पर AI आधारित रोक होगी। संदिग्ध कॉल/मैसेज पर यूजर्स को अलर्ट सिस्टम स्थापित करना होगा।

8. SIM Binding और स्कैम कॉल डिटेक्शन: 4-6 महीने की टाइमलाइन

व्हाट्सएप ने बताया कि सिम बांइडिंग फीचर पर काम जारी है। जिसे 4 से 6 महीने में लागू होने की संभावना है। स्कैम कॉल और लंबी ‘डिजिटल अरेस्ट’ बातचीत की पहचान के लिए नए टूल की व्यवस्था करनी होगी।

9. डिवाइस ID ब्लॉकिंग: नए नंबर से भी नहीं बनेगा अकाउंट

रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि स्कैम में इस्तेमाल डिवाइस ID को ब्लॉक किया जाए, ताकि अपराधी नंबर बदलकर फिर अकाउंट न बना सकें। व्हाट्सएप ने इस पर 45 दिन में रिपोर्ट देने का आश्वासन दिया है।

10. 10 करोड़ से अधिक केस: CBI की सीधी एंट्री

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर बड़े मामलों की जांच सीबीआई को सौंपी जाएगी। अब गुजरात और दिल्ली के 3 मामलों में FIR दर्ज हो चुकी है। दिल्ली में 22.92 करोड़ रुपये की ठगी हुई थी जिसकी जांच जारी है। इसमें अंतरराज्यीय नेटवर्क की पड़ताल हो रही है।

11. RBI का SOP: संदिग्ध खातों पर तुरंत डेबिट फ्रीज

रिजर्व बैंक ने नई SOP तैयार की है। बैंकों को ठगी वाले खातों में तुरंत ट्रांजैक्शन रोकना होगा। बैंकों के लिए एक समान फ्रेमवर्क होगा। सुप्रीम कोर्ट से मंजूरी के बाद पूरे देश में ये व्यवस्था लागू हो जाएगी।

12. डिजिटल पेमेंट में सुरक्षा देरी (Lagged Credits) का प्रस्ताव

आरबीआई ने डिजिटल ट्रांजैक्शन में सुरक्षा बढ़ाने के लिए कुछ ट्रांजैक्शन में समय आधारित देरी का सिस्टम लागू हुआ है। सीनियर सिटिज़न्स के लिए अतिरिक्त ऑथेंटिकेशन लागू किया गया है।

13. मनी म्यूल खातों पर PMLA के तहत कार्रवाई की तैयारी

सुप्रीम कोर्ट में जमा की गई रिपोर्ट में बताया गया है कि पीएमएलए की धारा 12AA के तहत कार्रवाई की जा सकती है। मनी म्यूल अकाउंट्स पर रोक लगाने के लिए नियम बनाए जाएंगे। इस पर राजस्व विभाग 30 से 45 दिन में निर्णय ले सकता है।

14. NCRP सिस्टम मजबूत: शिकायत और पैसा वापसी के लिए नए मॉड्यूल

  • गृह मंत्रालय ने दो नए डिजिटल मॉड्यूल विकसित किए हैं।
  • पहला ग्रीवांस रिड्रेसल मॉड्यूल (GRM)
  • दूसरा मनी रेस्टोरेशन मॉड्यूल (MRM)
  • ये दोनों पायलट फेज में चालू किए जाएंगे। जो कि एक महीने में आम नागरिकों के लिए उपलब्ध होंगे।

15. पीड़ित मुआवजा: शेयर्ड लायबिलिटी’ मॉडल पर काम

सरकार ने मुआवजा ढांचे पर भी काम शुरू कर दिया गया है। बैंक, टेलीकॉम और प्लेटफॉर्म की साझा जिम्मेदारी होगी। इसके सिंगापुर और EU के अंतरराष्ट्रीय मॉडल का अध्ययन किया जा रहा है। छोटे फ्रॉड में 85 फीसदी तक मुआवजा सीमित शर्तों के साथ प्रस्तावित होगा।

16. MeitY का नया पोर्टल: IT Act के तहत शिकायत दर्ज होगी

आईटी एक्ट की धारा 43 के तहत शिकायत दर्ज करने के लिए नया पोर्टल। बनाया जा रहा है। केंद्र सरकार इंटरमीडियरी की जिम्मेदारी तय करने पर भी विचार कर रही है। जिसके तहत सिविल दायित्व और पेनल्टी लगाने का विचार है।

17. स्पैम और अनरजिस्टर्ड टेलीमार्केटर्स पर कार्रवाई

केंद्र सरकार ने कहा है कि TRAI और दूरसंचार विभाग मिलकर नए नियम बनाए जाएंगे। यही नहीं AI सिस्टम से स्पैम कॉल की पहचान का तरीका विकसित किया जाएगा। साइबर फ्रॉड से जुड़े नंबरों की रिपोर्टिंग अनिवार्य हो गई है।

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