सोशल मीडिया पर इन दिनों एक पोस्ट तेजी से वायरल हो रही है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि बॉलीवुड अभिनेत्री अनन्या पांडे ने पाकिस्तान के क्रिकेटर अबरार अहमद को काव्या मारन की टीम द्वारा साइन किए जाने के विरोध में अपनी जियो सिम तोड़ दी। वायरल पोस्ट के अनुसार, अभिनेत्री ने तीन साल पुरानी जियो सिम को तोड़कर उसकी तस्वीर शेयर की और उसके साथ “Country first” लिखकर विरोध जताया।
ananya panday abrar ahmed
पोस्ट में किया गया यह दावा
वायरल स्क्रीनशॉट में एक टूटी हुई जियो सिम कार्ड की तस्वीर दिखाई दे रही है। इसके साथ लिखा गया है कि “अभिनेत्री अनन्या पांडे ने अपनी 3 साल पुरानी जियो सिम इसलिए तोड़ दी क्योंकि जियो, सनराइजर्स हैदराबाद (SRH) का स्पॉन्सर है।” पोस्ट में यह भी कहा गया कि अभिनेत्री ने यह तस्वीर अपने इंस्टाग्राम स्टोरीज में साझा की थी।
क्यों शुरू हुआ विवाद
यह विवाद तब शुरू हुआ जब खबर आई कि सनराइजर्स हैदराबाद के मालिकाना हक से जुड़ी एक टीम ने इंग्लैंड और वेल्स क्रिकेट बोर्ड द्वारा आयोजित फ्रेंचाइजी टूर्नामेंट ‘द हंड्रेड’ के ऑक्शन में पाकिस्तान के लेग स्पिनर अबरार अहमद को साइन किया है। बताया गया कि 27 वर्षीय पाकिस्तानी खिलाड़ी को करीब 1,90,000 पाउंड में खरीदा गया।
भारत और पाकिस्तान के बीच राजनीतिक तनाव के चलते 2009 के बाद से पाकिस्तानी खिलाड़ी इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में हिस्सा नहीं लेते हैं। इसी कारण सोशल मीडिया पर इस फैसले को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं और कुछ यूजर्स ने काव्या मारन को भी निशाना बनाया।
वायरल दावे की जांच में क्या सामने आया
जब इस वायरल दावे की पड़ताल की गई तो अनन्या पांडे के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट्स पर ऐसा कोई पोस्ट या स्टोरी नहीं मिली, जिसमें काव्या मारन, सनराइजर्स टीम, रिलायंस जियो या अबरार अहमद का जिक्र किया गया हो।
इसके अलावा किसी विश्वसनीय सोर्स ने भी इस तरह की कोई जानकारी नहीं दी कि अभिनेत्री ने जियो सिम तोड़ी हो या इस मुद्दे पर कोई प्रतिक्रिया दी हो। हाल के दिनों में उनके सोशल मीडिया पोस्ट केवल फिल्मों के प्रमोशन, ब्रांड एंडोर्समेंट और निजी अपडेट से जुड़े हुए हैं।
फर्जी है सिम तोड़ने की कहानी
जांच में सामने आया कि अनन्या पांडे द्वारा जियो सिम तोड़कर अबरार अहमद की साइनिंग का विरोध करने का दावा पूरी तरह निराधार है। इस तरह की कोई घटना या पोस्ट सामने नहीं आई है, जिससे स्पष्ट होता है कि सोशल मीडिया पर फैलाया जा रहा यह दावा भ्रामक है।
