India AI Impact Summit 2026: देशभर में साइबर ठगी आज एक गंभीर चुनौती बन चुकी है। रोजाना लोगों को फर्जी कॉल, नकली लोन ऑफर और बैंक डिटेल्स मांगने वाले धोखाधड़ी के मामलों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि इस बीच छत्तीसगढ़ के एक भाई बहन की जोड़ी ने अब इस समस्या क खत्म करने के लिए एक नया एआई टूल डिजाइन कर दिया है। नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित देश के सबसे बड़े एआई इवेंट में छत्तीसगढ़ से जुड़े युवाओं ने एक ऐसा स्मार्ट ऐप बनाकर पहला स्थान हासिल किया है, जो साइबर ठगों की चाल को कुछ सेकंट में ही पकड़ लेता है।
भाई-बहन की जोड़ी ने बनाया डिजिटल सुरक्षा देने वाला एआई टूल।
आईटी मंत्रालय के एआई इम्पैक्ट समिट के तहत आयोजित इस प्रतियोगिता में करीब 40 हजार प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया था। कड़ी छंटनी के बाद सिर्फ 800 प्रतिभागी ही ग्रैंड फिनाले तक पहुंच पाए। अंतिम चरण में टीम ने अपने समाधान को और बेहतर बनाते हुए कई भारतीय भाषाओं को भी शामिल किया और टॉप-6 में जगह बनाई। उद्योग जगत के विशेषज्ञों और सरकारी अधिकारियों के सामने प्रस्तुति देने के बाद इस टीम ने पूरे देश में पहला स्थान हासिल कर लिया।
आवाज को चेक करता है टूल
टीम द्वारा तैयार किया गया एआई ऐप किसी भी आवाज को सुनकर तुरंत पहचान लेता है कि कॉल करने वाला असली इंसान है या एआई से बनाई गई नकली आवाज। इतना ही नहीं, यह यह भी समझ जाता है कि सामने वाला व्यक्ति लोन स्कैम या बैंक डिटेल्स फ्रॉड जैसी साइबर ठगी करने की कोशिश तो नहीं कर रहा। ऐप हिंदी समेत सात भारतीय भाषाओं और अंग्रेजी को समझने में सक्षम है, जिससे देश के अलग-अलग हिस्सों के लोग सुरक्षित रह सकते हैं।
भाई बहन की जोड़ी बढ़ाई डिजिटल सुरक्षा
इस उपलब्धि के पीछे अनुराग मणिक की तकनीकी मेहनत और उनकी बहन आस्था मणिक की डिजाइन समझ का बड़ा योगदान रहा। अनुराग जनरेटिव एआई में प्रशिक्षित और आईबीएम से प्रमाणित एआई एजेंट डेवलपर हैं, जबकि आस्था ने एआई सॉल्यूशंस डिजाइनर के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। दोनों की इस सफलता को डिजिटल सुरक्षा के क्षेत्र में एक मजबूत कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ऐसे एआई टूल्स का व्यापक उपयोग शुरू होता है तो आम लोगों को फोन पर होने वाली ठगी से काफी हद तक बचाया जा सकता है। जिस तरह साइबर अपराधी नई-नई तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं, उसी गति से ऐसे स्वदेशी तकनीकी समाधान विकसित होना बेहद जरूरी है।
