Sep 06, 2026

इनकार पर शायरी: तेरा वजूद गवाही है मेरे होने की, मैं अपनी जात से इनकार किस तरह करता

Suneet Singh

​​साहिल के सुकूं से किसे इंकार है लेकिन, ​तूफ़ान से लड़ने में मज़ा और ही कुछ है​​



आल-ए-अहमद सुरूर

Credit: Pexels

​​खामोशी अच्छी नहीं इनकार होना चाहिए, ​ये तमाशा अब सर-ए-बाज़ार होना चाहिए​​



- ज़फ़र इक़बाल

Credit: Pexels

​​इकरार में कहां है इनकार की सी खूबी, ​होता है शौक़ ग़ालिब उस की नहीं नहीं पर​​



- मीर तक़ी मीर

Credit: Pexels

​​बोसा-ए-रुख़्सार पर तकरार रहने दीजिए, ​लीजिए या दीजिए इनकार रहने दीजिए​​



- हफ़ीज़ जौनपुरी

Credit: Pexels

You may also like

समाज में पाना है सम्मान तो भूलकर भी ना क...
Teacher's Day 2026: टीचर्स डे पर पढ़े डॉ...

​​साफ इनकार अगर हो तो तसल्ली हो जाए, ​झूटे वादों से तिरे रंज सिवा होता है​​



- क़ैसर हैदरी देहलवी

Credit: Pexels

​​ये अदाएं ये इशारे ये हसीं क़ौल-ओ-क़रार, ​कितने आदाब के पर्दे में है इंकार की बात​​



- ख़ालिद यूसुफ़

Credit: Pexels

​​न वो इकरार करता है न वो इनकार करता है, ​हमें फिर भी गुमां है वो हमीं से प्यार करता है​​



- हसन रिज़वी

Credit: Pexels

​​चश्म-ए-इनकार में इकरार भी हो सकता था, ​छेड़ने को मुझे फिर मेरी अना पूछती है​​



- असअ'द बदायुनी

Credit: Pexels

​​जब भी ज़मीर-ओ-ज़र्फ़ का सौदा हो दोस्तो, ​क़ाएम रहो हुसैन के इनकार की तरह​​



- अहमद फ़राज़

Credit: Pexels

इस स्टोरी को देखने के लिए थॅंक्स

Next: समाज में पाना है सम्मान तो भूलकर भी ना करें ये 5 काम, लड़कों को जया किशोरी की सलाह

ऐसी और स्टोरीज देखें