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सस्ते फोन बनी गले की फांस: सैमसंग और एप्पल की प्रीमियम रणनीति के सामने कैसे फेल हुआ शाओमी?

कभी प्रत्येक चार हाथ में से एक हाथ में Xiaomi का फोन होता था लेकिन आज हालात बदल गए हैं। आज शाओमी टॉप-5 स्मार्टफोन ब्रांड की लिस्ट से भी बाहर है। आखिर ऐसा क्यों हुआ? आइए जानते हैं...

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सस्ते फोन बनी गले की फांस: सैमसंग और एप्पल की प्रीमियम रणनीति के सामने कैसे फेल हुआ शाओमी?
Authored by: Pradeep Pandey
Updated May 6, 2026, 10:32 IST

एक समय ऐसा था जब Xiaomi भारत में हर चार में से एक स्मार्टफोन बेचती थी, लेकिन 2025 तक आते-आते कंपनी देश के टॉप-5 स्मार्टफोन ब्रांड्स की सूची से बाहर हो गई। यह गिरावट भारतीय स्मार्टफोन बाजार के इतिहास में सबसे तेज गिरावटों में से एक मानी जा रही है, जहां प्रतिस्पर्धी कंपनियों ने प्रीमियम सेगमेंट और ऑफलाइन रिटेल नेटवर्क में तेजी से पकड़ बनाई।

सुनहरे दौर से गिरावट तक का सफर

2021 में Xiaomi ने भारत में 4 करोड़ (40 मिलियन) से ज्यादा स्मार्टफोन शिप किए थे, जो किसी भी एक ब्रांड का अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा था। उस समय Samsung ने करीब 2.8 करोड़ डिवाइस बेचे थे। Xiaomi ने 2017 से 2022 तक लगातार पांच साल भारतीय बाजार में नेतृत्व किया, लेकिन 2025 तक Xiaomi की बिक्री घटकर सिर्फ 1.37 करोड़ यूनिट रह गई। IDC के अनुसार, कंपनी की मार्केट हिस्सेदारी गिरकर 9% पर आ गई और वह छठे स्थान पर पहुंच गई।

Xiaomi In India

Xiaomi In India

गिरावट के पीछे मुख्य कारण

एक्सपर्ट के अनुसार Xiaomi की इस गिरावट के पीछे कई अहम कारण रहे:

  • सरकारी कार्रवाई (2022): अप्रैल 2022 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई ने कंपनी की ब्रांड इमेज को प्रभावित किया।
  • नेतृत्व में बदलाव: जनवरी 2023 में मनु जैन और नवंबर 2024 में मुरलीकृष्णन बालकृष्णन के बाहर होने से रणनीतिक अस्थिरता बढ़ी।
  • प्रीमियम सेगमेंट में पिछड़ना: कंपनी बजट स्मार्टफोन की छवि से बाहर नहीं निकल पाई, जबकि बाजार तेजी से प्रीमियम की ओर बढ़ा।

कमाई में भी भारी गिरावट

वित्तीय आंकड़े भी इस गिरावट को साफ दर्शाते हैं। FY22 में Xiaomi इंडिया की आय ₹39,099 करोड़ और मुनाफा ₹1,058 करोड़ था, लेकिन FY25 तक यह घटकर ₹23,977 करोड़ और ₹262.5 करोड़ रह गया। यानी चार साल में 15,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई।

प्रीमियम सेगमेंट में प्रतिस्पर्धियों का दबदबा

Xiaomi की गिरावट का सबसे ज्यादा फायदा उसके प्रतिद्वंद्वियों को मिला। खासतौर पर Apple और BBK समूह के ब्रांड्स- Vivo, Oppo और Realme ने बाजार में अपनी पकड़ मजबूत की।

  • 2025 में Vivo ने 2.95 करोड़ यूनिट शिप कर बाजार में बढ़त बनाई
  • Oppo की बिक्री 2.02 करोड़ यूनिट तक पहुंच गई
  • Apple की बिक्री 2021 के 45 लाख से बढ़कर 2025 में 1.45 करोड़ यूनिट हो गई
विशेषज्ञों का मानना है कि आसान फाइनेंसिंग और प्रीमियम स्मार्टफोन की बढ़ती मांग ने Apple जैसे ब्रांड्स को आगे बढ़ाया।
xiaomi

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ऑफलाइन रिटेल में पिछड़ना पड़ा भारी

एक बड़ा कारण Xiaomi का ऑनलाइन सेल्स पर ज्यादा निर्भर रहना भी रहा। जहां Oppo और Vivo ने शुरुआत से ही ऑफलाइन रिटेल नेटवर्क को मजबूत किया, वहीं Xiaomi इस बदलाव के साथ तालमेल नहीं बैठा पाई।

  • Oppo की लगभग 70% बिक्री ऑफलाइन स्टोर्स से होती है
  • Xiaomi लंबे समय तक ऑनलाइन-फोकस्ड ब्रांड बना रहा
  • मैन्युफैक्चरिंग और मार्जिन की चुनौती

विशेषज्ञों का कहना है कि Xiaomi ने भारत में मैन्युफैक्चरिंग को उतना मजबूत नहीं किया जितना Vivo जैसी कंपनियों ने किया। साथ ही, कंपनी का मार्जिन भी बेहद कम (करीब 1%) रहा, जिससे दीर्घकालिक रणनीति कमजोर पड़ी।

कंपनी का जवाब और नई रणनीति

Xiaomi ने अपने बयान में कहा कि भारत उसके लिए अब भी एक अहम बाजार है और कंपनी की प्रतिबद्धता मजबूत है। कंपनी अब वॉल्यूम के बजाय वैल्यू-ड्रिवन ग्रोथ पर ध्यान दे रही है। कंपनी के अनुसार स्मार्टफोन के अलावा अन्य प्रोडक्ट्स पर भी फोकस बढ़ाया जा रहा है। ग्लोबल रणनीति के साथ तालमेल बैठाया जा रहा है। नए प्रोडक्ट पाइपलाइन और लीडरशिप पर काम किया जा रहा है।

Xiaomi का ‘रीसेट प्लान’

सितंबर 2024 में Xiaomi ने सुधिन माथुर को COO नियुक्त किया, ताकि भारत में रणनीति को नए सिरे से तैयार किया जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि Xiaomi भारत से बाहर नहीं जाएगी, क्योंकि 9% मार्केट शेयर भी इतने बड़े बाजार में काफी महत्वपूर्ण है।

आगे का रास्ता

अब Xiaomi अपने बिजनेस को सिर्फ स्मार्टफोन तक सीमित नहीं रखना चाहती। कंपनी टैबलेट, ऑडियो और अन्य टेक प्रोडक्ट्स के जरिए एक बड़ा इकोसिस्टम बनाने की दिशा में काम कर रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले समय में Xiaomi प्रीमियम सेगमेंट में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश करेगी, वैल्यू-फॉर-एक्सपीरियंस मॉडल अपनाएगी, लंबी अवधि की स्थिरता पर फोकस करेगी

कुल मिलाकर कहें तो Xiaomi की कहानी भारत में तेजी से सफलता और उतनी ही तेजी से गिरावट की मिसाल बन गई है। यह दिखाता है कि बदलते बाजार में समय के साथ रणनीति न बदलने पर सबसे बड़ी कंपनियां भी पीछे छूट सकती हैं। अब देखना होगा कि Xiaomi अपनी नई रणनीति के दम पर एक बार फिर भारतीय बाजार में वापसी कर पाती है या नहीं।

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