भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। आने वाले वर्षों में लोग सिर्फ सवाल पूछने या टेक्स्ट लिखने के लिए ही नहीं, बल्कि फोटो, वीडियो और आवाज के जरिए भी AI का इस्तेमाल ज्यादा करेंगे। एरिक्सन कंज्यूमर लैब की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में रोजाना मल्टीमॉडल AI का इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ताओं की हिस्सेदारी मौजूदा 22 प्रतिशत से बढ़कर 2030 तक 43 प्रतिशत हो सकती है। यानी हर 100 में से करीब 43 लोग रोजाना इस तरह की AI तकनीक का इस्तेमाल कर सकते हैं।
2030 तक भारत में 43% लोग रोज करेंगे मल्टीमॉडल AI का इस्तेमाल: रिपोर्ट/Photo-AI
क्या है मल्टीमॉडल AI, कैसे करता है काम?
मल्टीमॉडल AI ऐसी तकनीक है, जो एक से ज्यादा तरीकों से जानकारी समझ सकती है और उसका जवाब दे सकती है। इसमें टेक्स्ट, आवाज, फोटो और वीडियो जैसे अलग-अलग माध्यम शामिल हैं। उदाहरण के लिए, आप किसी AI टूल को फोटो दिखाकर उसके बारे में सवाल पूछ सकते हैं, आवाज के जरिए निर्देश दे सकते हैं या वीडियो के आधार पर जानकारी मांग सकते हैं। इस तरह AI का इस्तेमाल केवल लिखकर सवाल पूछने तक सीमित नहीं रहता।
दुनिया के मुकाबले भारत में तेजी से बढ़ेगा इस्तेमाल
PTI/भाषा ने रिपोर्ट के हवाले से कहा है कि भारत में रोजाना मल्टीमॉडल AI का इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ताओं की हिस्सेदारी अभी 22 प्रतिशत है। 2030 तक इसके 43 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है। वहीं, वैश्विक स्तर पर यह आंकड़ा फिलहाल 10 प्रतिशत है, जो 2030 तक बढ़कर 30 प्रतिशत हो सकता है। इसका मतलब है कि रोजाना मल्टीमॉडल AI अपनाने के मामले में भारत की रफ्तार वैश्विक औसत से आगे रहने का अनुमान है।
AI के बढ़ते इस्तेमाल से मोबाइल नेटवर्क पर पड़ेगा असर
AI का इस्तेमाल बढ़ने का असर केवल स्मार्टफोन और ऐप तक सीमित नहीं रहेगा। इससे मोबाइल नेटवर्क पर भी ज्यादा दबाव पड़ सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, लोग घर से बाहर, ऑफिस जाते समय या यात्रा के दौरान AI सेवाओं का इस्तेमाल करेंगे। इस दौरान वे ज्यादा फोटो, वीडियो और आवाज से जुड़ी जानकारी अपलोड कर सकते हैं।
ऐसे में मोबाइल नेटवर्क पर डेटा अपलोड करने की मांग बढ़ेगी। साथ ही, नेटवर्क पर ट्रैफिक हर जगह एक जैसा नहीं रहेगा। कुछ स्थानों और समय पर डेटा की मांग काफी ज्यादा हो सकती है। इसलिए नेटवर्क की स्पीड के साथ उसकी तुरंत प्रतिक्रिया देने की क्षमता और ज्यादा डेटा अपलोड करने की सुविधा भी महत्वपूर्ण होगी।
AI के लिए बेहतर नेटवर्क क्यों जरूरी?
एरिक्सन इंडिया के प्रबंध निदेशक नितिन बंसल के मुताबिक, AI अब लोगों के जानकारी खोजने, कंटेंट बनाने और एक-दूसरे से बातचीत करने के तरीके का अहम हिस्सा बनता जा रहा है। जैसे-जैसे टेक्स्ट, आवाज, फोटो और वीडियो के जरिए AI का इस्तेमाल बढ़ेगा, लोग चाहेंगे कि ये सेवाएं अलग-अलग डिवाइस पर और हर जगह भरोसेमंद तरीके से काम करें।
उन्होंने कहा कि भारत का मजबूत डिजिटल आधार AI को अपनाने के अगले चरण के लिए अवसर देता है। हालांकि, इस बढ़ते इस्तेमाल को बेहतर तरीके से संभालने के लिए ऐसे मोबाइल नेटवर्क की जरूरत होगी, जो तेजी से प्रतिक्रिया दें, ज्यादा डेटा संभाल सकें और भरोसेमंद कनेक्टिविटी उपलब्ध कराएं।
AI के सुपर यूजर्स बढ़ाएंगे इस्तेमाल
रिपोर्ट में AI के सुपर यूजर्स का भी जिक्र किया गया है। ये वे लोग हैं, जो AI का सामान्य यूजर्स की तुलना में काफी ज्यादा इस्तेमाल करते हैं। वैश्विक स्तर पर फिलहाल करीब 10 प्रतिशत उपभोक्ता इस श्रेणी में आते हैं। अनुमान है कि 2030 तक इनकी हिस्सेदारी बढ़कर 30 प्रतिशत हो सकती है।
खास बात यह है कि रिपोर्ट के मुताबिक, ये सुपर यूजर्स AI से जुड़ी कुल गतिविधियों में 80 प्रतिशत से ज्यादा योगदान दे सकते हैं। इससे संकेत मिलता है कि आने वाले समय में कुछ यूजर्स AI का इस्तेमाल बहुत ज्यादा करेंगे और उनकी जरूरतें नेटवर्क पर भी बड़ा असर डाल सकती हैं।
