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GDP ग्रोथ में दुनिया के धुरंधर हम, लेकिन प्रति व्यक्ति आय में बांग्लादेश से भी पिछड़ने का डर! आखिर क्यों?

भारत की GDP ग्रोथ की चर्चा पूरी दुनिया में है। हालांकि, तरक्की का सिर्फ यही पैमाना नहीं बनाया जा सकता है। इसके साथ यह भी देखना होगा कि लोगों की आय कितनी बढ़ रही है।

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भारत की प्रति व्यक्ति आय
Authored by: आलोक कुमार
Updated Oct 26, 2026, 17:17 IST
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भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया में सबसे तेज गति से बढ़ने वाली इकोनॉमी है। पिछले कई सालों में हम GDP ग्रोथ के मामले में दुनिया में नंबर-1 बने हुए हैं। हाल ही में भारत ने ब्रिटेन को पीछे छोड़, दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। भारत के आगे अब सिर्फ अमेरिका, चीन, जापान और जर्मनी हैं। इन सभी उपलब्धियों के बावजूद जब हम प्रति व्यक्ति आय के फ्रंट पर काफी नीचे हैं। प्रति व्यक्ति आय का मतलब है किसी देश की कुल आय को उसकी कुल आबादी से भाग देने पर मिलने वाली औसत आय। अब हमें प्रति व्यक्ति आय के मामले में बांग्लादेश से भी पिछड़ने का डर सता रहा है।

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के अनुसार, इस साल बांग्लादेश की प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद (GDP), एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भारत की प्रति व्यक्ति GDP से अधिक रहने का अनुमान है। वह भी तब जब भारत की GDP, बांग्लादेश की GDP से लगभग आठ गुना बड़ी है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि आखिर क्यों दुनिया की 5वीं अर्थव्यवस्था होने के बावजूद हम प्रति व्यक्ति आय में काफी पीछे क्यों हैं?

Per Capita इनकम किसकी कितनी?

IMF के अनुसार, लगभग 17.5 करोड़ की आबादी वाले बांग्लादेश की 2026 में प्रति व्यक्ति GDP 2,886 डॉलर रहने का अनुमान है, जबकि भारत के लिए यह आंकड़ा 2,749 डॉलर है। वहीं, विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में औसत प्रति व्यक्ति GDP लगभग 7,746 डॉलर है और वैश्विक औसत लगभग 15,889 डॉलर है।

IMF की रिपोर्ट में क्या है?

IMF की अक्टूबर 2026 की 'वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक' रिपोर्ट इस बात पर प्रकाश डालती है कि भारत और बांग्लादेश की अर्थव्यवस्थाएं, महंगाई और दो बड़े युद्धों के कारण पैदा हुए आर्थिक दबावों पर किस तरह अलग-अलग प्रतिक्रिया दे रही हैं। इन युद्धों ने एनर्जी मार्केट को बुरी तरह प्रभावित किया है। IMF के अनुसार, भारत में औसत उपभोक्ता मूल्य मुद्रास्फीति 5 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि बांग्लादेश में यह 8.7 प्रतिशत है। इससे पता चलता है कि ढाका में रहने की लागत का दबाव अधिक है।

भारत, बांग्लादेश की तुलना में काफी अधिक समृद्ध है और यहां एक बड़ा औद्योगिक आधार है, जिसमें एक महत्वपूर्ण टेक्नोलॉजी सेक्टर भी शामिल है। 2026 में भारत की अर्थव्यवस्था के 7 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है, जो बांग्लादेश की 3.6 प्रतिशत की विकास दर से लगभग दोगुनी है।

GDP का आकार इनकम का पैमाना नहीं

GDP यानी सकल घरेलू उत्पाद किसी देश में एक निश्चित अवधि के दौरान बनने वाली वस्तुओं और सेवाओं के कुल मूल्य को बताता है। इसके उलट, प्रति व्यक्ति GDP देश के कुल आर्थिक उत्पादन को उसकी आबादी से भाग देकर निकाली जाती है। वहीं भारत में आम लोगों की आय का आकलन करने के लिए प्रति व्यक्ति शुद्ध राष्ट्रीय आय का भी इस्तेमाल किया जाता है।

इन तीनों संकेतकों का मतलब अलग-अलग है। GDP बताती है कि अर्थव्यवस्था कितनी बड़ी है, प्रति व्यक्ति GDP औसतन कितना उत्पादन प्रति व्यक्ति के हिस्से में आता है और प्रति व्यक्ति NNI राष्ट्रीय आय के आधार पर औसत आय का संकेत देती है। इसका मतलब है कि भारत का कुल आर्थिक उत्पादन बहुत बड़ा है, लेकिन विशाल आबादी के कारण प्रति व्यक्ति औसत उत्पादन में अंतर उतना बड़ा नहीं दिखता।

आय कम लेकिन खरीदने की क्षमता अधिक

2026 में बांग्लादेश की GDP 506.4 अरब डॉलर रहने का अनुमान है, जबकि भारत की GDP 4.15 ट्रिलियन डॉलर रहने की उम्मीद है। लेकिन, जब 'परचेजिंग पावर पैरिटी' (PPP) - जो स्थानीय कीमतों के अंतर को ध्यान में रखती है के आधार पर प्रति व्यक्ति GDP को देखा जाता है, तो यह स्थिति बदल जाती है। इस पैमाने पर, भारत की प्रति व्यक्ति GDP 12,998 डॉलर रहने का अनुमान है, जबकि बांग्लादेश की 10,884 डॉलर होगी।

PPP एक आर्थिक पैमाना है जो यह बताता है कि अलग-अलग देशों में रहने की लागत को ध्यान में रखते हुए, वहां के पैसों से असल में क्या खरीदा जा सकता है। इन आंकड़ों का मतलब यह है कि बांग्लादेशियों की तुलना में भारतीयों की खरीदने की क्षमता अधिक है।

2029 में हम बांग्लादेश को पीछे छोड़ देंगे

IMF की रिपोर्ट के अनुसार, अगले साल बांग्लादेश की प्रति व्यक्ति GDP 3,219 डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जो भारत की 3,036 डॉलर की प्रति व्यक्ति GDP से अधिक है। अनुमानों के मुताबिक, 2028 में भी यह अंतर थोड़ा बहुत बना रह सकता है। IMF के अनुसार, मौजूदा विकास अनुमानों के आधार पर, 2029 में भारत की प्रति व्यक्ति GDP 3,661 डॉलर हो जाएगी, जो बांग्लादेश की 3,334 डॉलर की प्रति व्यक्ति GDP से अधिक होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही बांग्लादेश की प्रति व्यक्ति GDP भारत से थोड़ी अधिक हो, लेकिन निकट भविष्य में वहां विकास की संभावनाएं कमजोर दिख रही हैं।

हालांकि, केवल प्रति व्यक्ति GDP से अर्थव्यवस्था की पूरी तस्वीर सामने नहीं आती, क्योंकि यह आय और संपत्ति के वितरण में मौजूद असमानताओं को छिपा देती है। डॉलर में मापी जाने वाली यह संख्या विनिमय दर के साथ बदलती रहती है। इसका मतलब यह है कि आर्थिक उत्पादन में कोई बदलाव आए बिना भी, केवल मुद्रा के मूल्य में उतार-चढ़ाव से इन आंकड़ों में अंतर आ सकता है।

भारत बनाम बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था

पिछले दो दशकों में बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था का विकास मुख्य रूप से निर्यात-उन्मुख विनिर्माण (export-oriented manufacturing) पर केंद्रित रहा है। इसमें विशेष रूप से रेडीमेड कपड़ों का उद्योग शामिल है, जो निर्यात से होने वाली कमाई और रोजगार का एक बड़ा स्रोत रहा है। इसके अलावा, विदेशों में काम कर रहे बांग्लादेशियों द्वारा भेजी जाने वाली रकम भी वहां की अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका निभाती है।

हालांकि, ईरान को लेकर अमेरिका-इजरायल के बीच चल रहे तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा क्षेत्र को झटका लगा है। इसने होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री यातायात को बाधित कर दिया है, जिससे बांग्लादेश को भी बड़ा झटका लगा है। बांग्लादेश अपने तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) का 95 प्रतिशत आयात करता है, और इसमें से ज्यादातर हिस्सा मध्य पूर्व से आता है।

बांग्लादेश के रेडीमेड गारमेंट उद्योग को भी भारी नुकसान पहुंचा है, जो देश की कुल निर्यात कमाई का 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा है। ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि लाल सागर और मध्य पूर्व से होकर गुजरने वाले शिपमेंट मार्ग बाधित हो गए हैं।

दूसरी ओर, भारत की अर्थव्यवस्था काफी विविध है, जिसमें विनिर्माण और कृषि के साथ-साथ सेवा क्षेत्र भी एक बड़ी भूमिका निभाता है। भारत का घरेलू बाजार, तकनीक और व्यावसायिक सेवाएं, औद्योगिक आधार और उपभोक्ताओं की मांग, ये सभी आर्थिक गतिविधियों के कई अलग-अलग स्रोत प्रदान करते हैं।

आम आदमी की कमाई

आम आदमी की कमाई

विशाल आबादी भारत के लिए बड़ी चुनौती

भारत की आबादी 140 करोड़ से अधिक है। ऐसे में अर्थव्यवस्था की कुल वृद्धि का लाभ प्रति व्यक्ति आय में बड़े बदलाव के रूप में दिखाने के लिए बहुत बड़े स्तर पर उत्पादन और आय बढ़ानी पड़ती है। मान लीजिए किसी देश की कुल अर्थव्यवस्था 7% बढ़ती है, लेकिन उसकी आबादी भी बढ़ रही है। तब प्रति व्यक्ति उत्पादन की वृद्धि कुल GDP की वृद्धि से कम होगी। इसका अर्थ यह नहीं कि आबादी अपने आप में आर्थिक समस्या है। बड़ी आबादी एक विशाल उपभोक्ता बाजार और श्रमशक्ति भी देती है।

चुनौती यह है कि इस श्रमशक्ति को पर्याप्त उत्पादक रोजगार, बेहतर शिक्षा, कौशल और अच्छी कमाई के अवसर मिलें। यदि अर्थव्यवस्था में नए कामगारों के लिए उच्च उत्पादकता वाली नौकरियां नहीं बनतीं, तो कुल GDP में तेज वृद्धि के बावजूद औसत आय तेजी से नहीं बढ़ पाएगी।

1971 में पाकिस्तान से अलग हुआ था बांग्लादेश

पिछले दो दशकों में, ढाका दक्षिण एशिया की एक प्रमुख आर्थिक सफलता की कहानी बनकर उभरा है। बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था इस समय पाकिस्तान से बड़ी है। 1971 में बांग्लादेश इसी पाकिस्तान से अलग हुआ था। विशेषज्ञ इस तरक्की का श्रेय देश के 38 अरब डॉलर के गारमेंट उद्योग, विदेशों से आने वाली रकम (रेमिटेंस) और कार्यबल में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को देते हैं।

लेकिन, उच्च महंगाई और विकास दर में सुस्ती अब इस प्रगति पर दबाव डाल रही है। वहीं, इस साल भारतीय अर्थव्यवस्था के 7 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है, जबकि बांग्लादेश के लिए यह दर 3.6 प्रतिशत रहने की उम्मीद है।

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