सर्दियों में ठंड बढ़ने के साथ ही घर में हीटर की जरूरत भी महसूस होने लगती है। ऐसे में ज्यादातर लोग चाहते हैं कि उनका कमरा जल्दी गर्म हो जाए और ठंड से राहत मिले। इसके लिए बाजार में ब्लोअर हीटर और ऑयल हीटर जैसे कई ऑप्शन मिलते हैं। दोनों का काम कमरे को गर्म करना है, लेकिन इनके गर्म करने का तरीका अलग-अलग होता है। ब्लोअर तुरंत गर्म हवा देने लगता है, जबकि ऑयल हीटर धीरे-धीरे गर्म होता है और कुछ समय तक गर्माहट बनाए रखता है।
बाजार में आपको हर बजट में रूम हीटर्स देखने को मिल जाते हैं। (फोटो क्रेडिट- Digit)
अगर आप सर्दी के मौसम से बचने के लिए नया रूम हीटर खरीदने जा रहे हैं तो आपको इन दोनों की टेक्नोलॉजी के बारे में मालूम होना बेहद जरूरी है। आइए, आसान भाषा में इनके बारे में बताते हैं ताकि आपके पैसे बर्बाद न हों।
ब्लोअर हीटर कैसे काम करता है?
ब्लोअर हीटर बिजली से चलता है। इसके अंदर एक हीटिंग एलिमेंट लगा होता है, जो बिजली चालू करते ही गर्म होने लगता है। इसके साथ लगा पंखा इस गर्मी को हवा के जरिए कमरे में फैलाता है। यही वजह है कि ब्लोअर चलाने के कुछ ही समय बाद गर्म हवा महसूस होने लगती है।
इसका वजन आमतौर पर कम होता है, इसलिए इसे आसानी से एक कमरे से दूसरे कमरे में ले जाया जा सकता है। छोटे बेडरूम, पढ़ाई करने की जगह या ऑफिस के लिए यह अच्छा ऑप्शन हो सकता है। हालांकि, ब्लोअर में लगे पंखे की आवाज थोड़ी परेशान कर सकती है। इसके अलावा, लगातार गर्म हवा चलने से कुछ लोगों को त्वचा या गले में रूखापन महसूस हो सकता है।
ऑयल हीटर किस तरह कमरे को गर्म करता है?
ऑयल हीटर की बनावट ब्लोअर से अलग होती है। इसमें धातु के पैनल या फिन के अंदर एक खास तरह का तेल भरा रहता है। बिजली से चलने वाला हीटिंग एलिमेंट इस तेल को गर्म करता है। इसके बाद तेल की गर्मी धातु के पैनलों तक पहुंचती है और वहां से धीरे-धीरे कमरे में फैलती है।
इस प्रॉसेस में थोड़ा समय लगता है। इसलिए अगर आपको तुरंत गर्मी चाहिए, तो ऑयल हीटर शुरुआत में धीमा लग सकता है। लेकिन एक बार गर्म होने के बाद यह लगातार आरामदायक गर्माहट देता है। बिजली बंद करने के बाद भी इसके गर्म पैनल कुछ समय तक गर्म रहते हैं। इसमें पंखा नहीं होता, इसलिए यह आमतौर पर काफी शांत तरीके से काम करता है। यह उन लोगों के लिए अच्छा विकल्प हो सकता है, जिन्हें लंबे समय तक कमरे में रहना होता है। हालांकि, इसका वजन ज्यादा होता है और इसकी कीमत भी ब्लोअर के मुकाबले अधिक हो सकती है।
बिजली किस हीटर में ज्यादा खर्च होती है?
बिजली का खर्च केवल इस बात से तय नहीं होता कि हीटर ब्लोअर है या ऑयल हीटर। इसमें हीटर की वॉट क्षमता और उसे कितनी देर चलाया जाता है, इसकी बड़ी भूमिका होती है। उदाहरण के लिए, 2000 वॉट का हीटर एक घंटे तक पूरी क्षमता पर चलता है, तो वह करीब 2 यूनिट बिजली खर्च करेगा। अगर आप इसे रोज कई घंटे चलाते हैं, तो बिजली का बिल बढ़ सकता है।
इसलिए हीटर खरीदते समय उसकी वॉट क्षमता के साथ अपनी जरूरत और इस्तेमाल के समय को भी ध्यान में रखें। थर्मोस्टेट वाला मॉडल तापमान के हिसाब से हीटिंग को नियंत्रित कर सकता है, जिससे जरूरत से ज्यादा गर्मी पैदा करने से बचने में मदद मिलती है।
हीटर खरीदने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
हीटर खरीदते समय सिर्फ उसकी कीमत या गर्म करने की रफ्तार न देखें। कुछ जरूरी बातों पर भी ध्यान देना चाहिए।
कमरे का आकार: छोटे कमरे में कम क्षमता वाला हीटर पर्याप्त हो सकता है, जबकि बड़े कमरे के लिए ज्यादा क्षमता की जरूरत पड़ सकती है।
बिजली की खपत: हीटर की वॉट क्षमता देखकर अंदाजा लगाएं कि उसके इस्तेमाल से कितना बिजली खर्च हो सकता है।
सुरक्षा फीचर्स: ऐसा मॉडल चुनें, जिसमें जरूरत से ज्यादा गर्म होने पर अपने आप बंद होने की सुविधा हो। गिरने पर बंद होने वाला फीचर भी उपयोगी है।
कीमत और रखरखाव: ब्लोअर आमतौर पर सस्ता और आसानी से इधर-उधर ले जाने लायक होता है, जबकि ऑयल हीटर भारी और महंगा हो सकता है।
सही सर्टिफिकेशन: खरीदने से पहले उत्पाद पर लागू सुरक्षा मानकों और ISI मार्क की जांच करें।
