ऋषिकांत सिंह के पास था भारत को पहला गोल्ड दिलाने का मौका, इस कारण से चूके

60 किलोग्राम भारवर्ग में ऋषिकांत सिंह ने राष्ट्रमंडल 2026 में भारत को पहला सिल्वर मेडल दिलाया। इस मेडल का रंग बदल भी सकता था, लेकिन वह ऐसा नहीं कर पाए। बाद में इसके पीछे का कारण सामने आया।

घुटने की चोट ने ऋषिकांत सिंह को राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतने से वंचित कर दिया लेकिन इस भारतीय भारोत्तोलक ने मणिपुर के खेल इतिहास में नया अध्याय जरूर लिख दिया। ग्लास्गो पहुंचते समय ऋषिकांत पर उस राज्य की उम्मीदों का भार था, जिसने भारतीय भारोत्तोलन को कई दिग्गज खिलाड़ी दिए हैं, लेकिन राष्ट्रमंडल खेलों में पुरुष वर्ग में कभी कोई भारोत्तोलक नहीं उतारा था। यह 28 वर्षीय भारोत्तोलक पुरुषों के 60 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक के बेहद करीब पहुंच गए था, लेकिन चोट के कारण अंततः उन्हें रजत पदक से संतोष करना पड़ा।

Rishikanta Singh Chanambam

ऋषिकांत सिंह (साभार-x)

स्नैच स्पर्धा में 121 किलोग्राम वजन उठाकर उन्होंने राष्ट्रमंडल खेलों का नया रिकॉर्ड बनाया और बढ़त हासिल कर ली। हालांकि, प्रतियोगिता से एक सप्ताह पहले लगी घुटने की चोट क्लीन एवं जर्क के दौरान फिर उभर आई। उन्होंने ’क्लीन’ तो पूरा कर लिया, लेकिन बारबेल को सिर के ऊपर धकेलने के लिए आवश्यक ताकत नहीं लगा सके। 148 किलोग्राम और 151 किलोग्राम के दो प्रयास असफल रहे। उन्होंने इस चरण में 143 किलोग्राम का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया और कुल 264 किलोग्राम वजन उठाकर रजत पदक अपने नाम किया।

End of Feed