सूत्रों के अनुसार, खेल मंत्रालय बड़े बदलावों पर विचार कर रहा है, इसलिए राष्ट्रीय खेल पुरस्कारों (National Sports Awards) में देरी हो रही है। नेशनल स्पोर्ट्स अवार्ड्स में छह महीने से ज़्यादा की देरी हो चुकी है, जो हाल के सालों में ऐसा पहला मामला है। खेल मंत्रालय ने अभी तक इस देरी के बारे में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है, जिससे देश के सबसे बड़े खेल सम्मानों के भविष्य को लेकर अटकलें बढ़ रही हैं।
राष्ट्रीय खेल पुरस्कारों में देरीः सूत्र (AI Generated Image)
मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, यह देरी नेशनल स्पोर्ट्स अवार्ड्स के ढांचे में बड़े बदलावों से जुड़ी है। हालांकि हाल के महीनों में ऐसे संकेत मिले हैं कि मिनिस्ट्री मौजूदा चयन प्रक्रिया की समीक्षा कर रही है, लेकिन प्रस्तावित बदलावों की प्रकृति या दायरे के बारे में कोई औपचारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
सूत्रों ने आगे बताया कि प्रस्तावित बदलावों के पीछे मुख्य उद्देश्यों में से एक भारत के सर्वोच्च खेल सम्मानों की प्रतिष्ठा और विशिष्टता को बनाए रखना है। सूत्रों के अनुसार, ऐसी राय बढ़ रही है कि एक ही साल में कई खेल रत्न पुरस्कार देने से देश के सर्वोच्च खेल सम्मान का महत्व कम हो जाता है।
अर्जुन पुरस्कारों को लेकर भी ऐसी ही चिंता जताई गई है। हाल के वर्षों में, एक ही संस्करण में 20 से अधिक खिलाड़ियों को यह सम्मान मिला है, जिससे इस बात पर चर्चा शुरू हो गई है कि क्या पुरस्कार पाने वालों की संख्या को तर्कसंगत बनाया जाना चाहिए। सूत्रों का कहना है कि प्रस्तावित बदलावों का उद्देश्य इन पुरस्कारों की विशिष्टता और कद को बहाल करना है, साथ ही यह सुनिश्चित करना है कि वे वास्तव में असाधारण खेल उपलब्धियों को मान्यता देते रहें।
ऐसी भी अटकलें थीं कि पिछले साल के पुरस्कारों को इस साल के एशियाई खेलों और राष्ट्रमंडल खेलों के चक्र के साथ तालमेल बिठाने के लिए टाल दिया गया था। हालांकि, मंत्रालय के सूत्रों ने इस सिद्धांत को खारिज कर दिया है, यह कहते हुए कि देरी का अंतरराष्ट्रीय खेल कैलेंडर से कोई लेना-देना नहीं है और इसके बजाय यह मिनिस्ट्री के भीतर चल रही एक अलग प्रक्रिया से जुड़ी है।
जैसे-जैसे भारत CWG और एशियाई खेलों में भाग लेने की तैयारी कर रहा है, अब यह देखना दिलचस्प होगा कि मंत्रालय पिछले साल की सिफारिशों और इस साल पदक जीतने वालों के बीच कैसे संतुलन बनाती है।
