MMA Fighter Ritu Phogat Exclusive Interview: मशहूर पेंटर मकबूल फिदा हुसैन ने अपनी तस्वीरों में कभी मां का चेहरा नहीं बनाया, क्योंकि उनके जन्म के कुछ दिनों बाद ही मां का देहांत हो गया था और वो मां के चेहरे के भाव का अनुभव उनकी गोद में बैठकर नहीं कर सके। मां के रूप, प्यार और भावनाओं को एक सांचे में संजो पाना मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन है यह बात हुसैन साहब को अच्छी तरह से समझ आ गई थी। इसलिए उनकी कूची ने कैनवास पर मां के चेहरे को उकेरने की हिमाकत कभी नहीं की।
ऋतु फोगाट।
पूर्व पहलवान और भारतीय की टॉप मिक्स्ड मार्शल आर्ट (MMA) फाइटर होने का गौरव हासिल करने वाली ऋतु फोगाट अपनी बंद मुट्ठी और मुक्कों से भारतीय मां की अकल्पनीय तस्वीर बनाने जा रही हैं। पिछले साल मां बनने का सुखद अहसास करने वाली ऋतु एक ऐसी जंग लड़ने जा रही हैं, जहां वो रिंग में मुक्के तो विरोधी के ऊपर बरसाएंगी, लेकिन चोट का एहसास उन भारत में बैठे उन दकियानूसी सोच वालों को होगा, जिन्होंने उन्हें मां बनने के बाद घर बैठने की सलाह दी थी। ऋतु 20 फरवरी को कतर की राजधानी दोहा में होने वाले ONE 171: Qatar इवेंट में करियर की तीसरी पारी का आगाज करने उतरेंगी। इस मुकाबले में भारतीय फाइटर ऋतु का सामना जापानी फाइटर अयाका मियूरा से होगा। यह MMA की एटमवेट कैटेगरी की फाइट होगी। टाइम्स नाउ नवभारत के संवाददाता शेखर झा से साक्षात्कार के दौरान ऋतु ने कहा कि भारत में मां बनने के बाद खेल में वापसी करना काफी कठिन है। समाज की सोच मां को मैदान पर दोबारा लौटने नहीं देती है। उन्हें भी समाज की इसी सोच का सामना करना पड़ा, लेकिन अब वो परिवार के सपोर्ट की बदौलत रिंग में वापसी कर रही हैं।
सवाल- मां बनने के बाद रिंग में वापसी कितनी कठिन रही?
ऋतु- मां बनने के बाद खेल के रिंग में वापसी करना मुश्किल है। बदलते दौर में भी भारत में लोगों की ऐसी ही सोच है। खिलाड़ियों को इसका सामना करना पड़ता है। मां बनने के बाद मुझे भी लोगों ने घर पर बैठने की सलाह दी, कहा- मां बन गई हो, अब बाल-बच्चे और परिवार को संभालो। अब और कितना खेलोगी। लेकिन मां चाह ले तो क्या नहीं कर सकती है। मैं अपनी वापसी से उन सभी मांओं को संदेश देना चाहती हूं कि बच्चे को जन्म देने के बाद उनके लिए दुनिया खत्म नहीं हो जाती है, वो उसके बाद भी जो चाहे वो कर सकती हैं।
ऋतु फोगाट।
सवाल- अपने सपने को साकार करने के लिए आप अपने बच्चे से दूर हैं, यह आपके लिए कितना मुश्किल है? ऐसे में ट्रेनिंग पर कैसे फोकस कर पाती हैं?
ऋतु- एक मां के लिए अपने सपनों को पूरा करने के लिए बच्चे से दूर रहना सबसे बड़ी चुनौती होती है। मैं भी उससे दूर हूं। यह फैसला करना मेरे लिए भी काफी कठिन था। लेकिन मेरे पति ने इस मामले में मेरा साथ दिया, उन्होंने कहा कि तुम्हें जो हासिल करना है उसके लिए जुट जाओ मैं बच्चे को संभाल लूंगा। उसके बाद मैं ट्रेनिंग के लिए अपने बच्चे से सात समंदर पार (अमेरिका) आई हूं ताकि भविष्य में मेरा बेटा मुझपर गर्व कर सके।
सवाल- आपके लिए यह फाइट कितनी महत्वपूर्ण है?
ऋतु- कतर में होने वाली फाइट मेरे लिए काफी महत्वपूर्ण है। जिस दिन मैंने मिक्स्ड मार्शल आर्ट की रिंग में कदम रखा था उसी दिन से मेरे जेहन में ये बात साफ थी कि मुझे अपने और देश के लिए क्या करना है। मुझे भारत की पहली एमएमए चैंपियन बनकर इतिहास रचना है। यही वजह है कि मैं मां बनने के करीब ढ़ाई साल बाद रिंग में वापसी करने जा रही हूं। मेरा केवल एक और एक ही लक्ष्य है एमएमए वर्ल्ड चैंपियन बनना। इसके लिए मैं हर संभव कोशिश कर रही हूं। मैंने तैयारी में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी है।
ऋतु फोगाट।
सवाल- आप रेसलर रही हैं, रेसलिंग से मिक्स्ड मार्शल आर्ट के रंग में ढलना कितना कठिन रहा?
ऋतु- मुझे पापा (महावीर फोगाट) ने समझाया कि खेल चाहे कोई भी हो हमें अपने देश का नाम ऊंचा करना है। इसी सोच के साथ मैंने रेसलिंग करियर की शुरुआत की थी। अब वैश्विक स्तर पर मिक्स्ड मार्शल आर्ट में भारत का प्रतिनिधित्व कर रही हूं। मैं रेसलर रह चुकी हूं। इसलिए मुझे मिक्स्ड मार्शल आर्ट के साथ तालमेल बैठाने में ज्यादा दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ा। मेरे लिए यह नया खेल जरूर अलग था। लेकिन मुझे इसके दांव पेंच नए सिरे से सीखने पड़े। यही वजह है कि मुझे अबतक की 10 फाइट में से 7 में जीत मिली।
सवाल- एमएमए में आपका अबतक का रिकॉर्ड बेहद शानदार रहा है, लेकिन इस बार कौन सी खिलाड़ी है जो आपको कड़ी टक्कर दे सकती है?
ऋतु- रिंग में उतरने के बाद किसी भी खिलाड़ी को हल्के में नहीं लिया जा सकता। हर खिलाड़ी में कोई न कोई खूबी होती है। इसलिए मैं सोच-समझकर दांव-पेंच लगाती हूं। वैसे अगर बात करें तो अभी मेरी कैटेगरी में चैंपियन स्टैम्प फेयरटेक्स और अंतरिम चैंपियन डेनिस जाम्बोआंगा हैं, जिनके साथ मुझे दो-दो हाथ करने में मजा आएगा।
