World Junior Shooting Championships: भारतीय निशानेबाजों ने जर्मनी में आयोजित हुई आईएसएसएफ विश्व जूनियर चैंपियनशिप में सात स्वर्ण पदक जीतकर पदक तालिका में शीर्ष स्थान हासिल किया। भारत ने पिस्टल और राइफल स्पर्धाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन के दम पर अपने अभियान का शानदार समापन किया, लेकिन शॉटगन स्पर्धा में उसे कोई पदक नहीं मिला। भारत 24 पदकों (सात स्वर्ण, आठ रजत और नौ कांस्य) के साथ तालिका में शीर्ष पर रहा। व्यक्तिगत तटस्थ खिलाड़ियों ने छह स्वर्ण सहित 14 पदक जीते जबकि इटली ने छह स्वर्ण सहित 10 पदकों के साथ तीसरा स्थान हासिल किया।
विश्व जूनियर शूटिंग चैंपियनशिप (फोटो- bsf_india)
भारतीय टीम ने जीता 7 स्वर्ण
भारत ने अपने अभियान की शानदार शुरुआत की। सेजल कांबले ने महिलाओं की 10 मीटर एयर पिस्टल में स्वर्ण पदक जीता, जबकि हिमांशी ने कांस्य पदक हासिल किया। इसके बाद सेजल, वंशिका चौधरी और नव्या बिश्नोई की तिकड़ी ने टीम स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर चैंपियनशिप में भारत को शुरुआती बढ़त दिलाई। इसके बाद समीर ने पुरुषों की 25 मीटर रैपिड फायर पिस्टल स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता और रोहित कन्यान ने पुरुषों की 50 मीटर राइफल थ्री-पोजिशन प्रतियोगिता में पहला स्थान हासिल किया।
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प्राची गायकवाड़ ने जीता रजत
प्राची गायकवाड़ ने महिलाओं की 50 मीटर राइफल थ्री-पोजिशन स्पर्धा में रजत पदक जीता, जबकि भारत ने पुरुषों की 50 मीटर राइफल थ्री-पोजिशन टीम स्पर्धा और पुरुषों की 25 मीटर रैपिड फायर पिस्टल टीम स्पर्धा में कांस्य पदक हासिल किए। भारत का पदक जीतने का सिलसिला इसके बाद भी जारी रहा। अन्वी राठौड़ ने महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में कांस्य पदक जीता, जिसके बाद प्रीतम केंद्रे ने पुरुषों की 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में स्वर्ण पदक हासिल किया। भारत ने पुरुषों और महिलाओं की 25 मीटर पिस्टल टीम स्पर्धाओं में कांस्य पदक जीते।
पुरुषों की 10 मीटर एयर पिस्टल में दोहरी सफलता
पुरुषों की 10 मीटर एयर पिस्टल में शिव नरवाल ने रजत पदक और युग प्रताप सिंह राठौर ने कांस्य पदक जीतकर देश को दोहरी सफलता दिलाई। इसके बाद नरवाल ने संदीप बिश्नोई और चिराग शर्मा के साथ मिलकर पुरुषों की टीम स्पर्धा में रजत पदक हासिल किया और फिर वंशिका चौधरी के साथ जोड़ी बनाकर 10 मीटर एयर पिस्टल मिश्रित टीम प्रतियोगिता में एक और रजत पदक जीता। शॉटगन में पुरुषों के ट्रैप और स्कीट निशानेबाजों का अभियान विशेष रूप से निराशाजनक रहा, क्योंकि कोई भी खिलाड़ी आठ निशानेबाजों के फाइनल में नहीं पहुंच सका और टीमें रैंकिंग में काफी नीचे रहीं।
