EXCLUSIVE: एशियन गेम्स 2026 वुशु की महिलाओं के सांडा 60 किग्रा फाइनल में भारत की रोशिबिना देवी चीन की झांग शियाओयू से दोनों राउंड में 0-5 से हार गईं। हालांकि, उन्होंने सिल्वर मेडल जीता और इतिहास रचा। रोशिबिना ने 2018 एशियाई खेलों में ब्रॉन्ज़ और 2022 में सिल्वर मेडल जीतने के बाद, वुशु में यह उनका लगातार तीसरा एशियाई खेल मेडल है। इस तरह, वह अपने खेल में ऐसा करने वाली एकमात्र भारतीय महिला बन गई हैं।
एशियन गेम्स में सिल्वर मेडल जीतने के बाद रोशिबिना देवी ने की 'स्पोर्ट्स नाउ' से खास बातचीत (PTI/Sports Now)
रोशिबिना देवी का जापान एशियाई खेलों में प्रदर्शन शानदार रहा, जिसमें उन्होंने वियतनाम की 2023 की वर्ल्ड चैंपियन गुयेन थी थू थुय को हराया। बुधवार को, रोशिबिना ने सेमीफाइनल में इंडोनेशिया की थानिया कुसुमानिंगत्यास को 2-0 से हराकर खिताबी मुकाबले में अपनी जगह पक्की की। इस ऐतिहासिक जीत के बाद रोशिबिना ने अपनी खुशी और विचार एक विशेष बातचीत में 'स्पोर्ट्स नाउ' के साथ साझा किए। आइए जानते हैं उन्होंने क्या कहा।
सवालः आपने इसके लिए बहुत मेहनत की है, आपके पास तैयारी का समय भी कम था, ये सिल्वर मेडल आपके लिए क्या मायने रखता है?
रोशिबिनाः ये मेडल मेरे लिए बहुत जरूरी है, सिल्वर-ब्रान्ज पहले भी लोग जीत चुके हैं। तीसरी बार मैं पहली बार जीत रही हूं, अच्छा लगा कि ये कर पाई।
सवालः आपके लिए ये एशियन गेम्स में सफर आसान नहीं रहा, आप ट्रायल में हार गई थीं, घर चली गई थीं, उसके बाद 10 सितंबर के करीब आप टीम में शामिल हुईं, आपने डिस्टर्बेंस की बात भी की, आपको लगता है कि वो सब चीजें ना होतीं तो तैयारी बेहतर हो सकती थी?
रोशिबिनाः हां तैयारी, ट्रायल में थोड़ा खराब हुआ था लेकिन मैंन गलत फील नहीं किया, मैंने इसे स्वीकार किया। वो मेरा अति-आत्मविश्वास था, उसके बाद मैंने और अच्छी तैयारी की और आगे से ऐसी गलतियां नहीं होने दूंगी।
सवालः जब हम बात करते हैं वुशु की तो आप जैसे एथलीट आते हैं, तो आपको लगता है कि अब लोग इस खेल को और जानेंगे?
रोशिबिनाः हां, पहले भी मैं मणिपुर में भी कई खिलाड़ी देख चुकी हूं, और हमलोग हर कोने में जाकर वुशु को बढ़ा नहीं सकते, लेकिन ऐसे ही हम वुशु की छवि को बढ़ा सकते हैं।
सवालः आपके पिता शुरुआत में आपको वुशु की इजाजत नहीं दे रहे थे, फिर उन्होंने मंजूरी दे दी, अब तो उनको अच्छा लगता होगा कि उनकी बेटी इतने मेडल पर मेडल जीतती है?
रोशिबिनाः पहले ये था कि वो लोग बॉक्सिंग ज्यादा पसंद करते थे, बचपन में हम चाइनीज फिल्म वगैरा बहुत देखते रहते थे, उसमें पाम एंड फिस्ट (Palm and Fist) का इस्तेमाल ज्यादा होता था, वो पसंद आ गया था। वुशु भी वैसा ही है, पापा लोग भी सही लगा और उन्होंने भी मंजूरी दी। ओलंपिक वगैरा कुछ नहीं सोचा था बस पाम एंड फिस्ट सोचते हुए इस खेल को चुन लिया था।
सवालः आप ये पदक किसको समर्पित करती हैं, आपका खेलों में आदर्श कौन रहा है?
रोशिबिनाः यहां तक आना आसान नहीं था, इसमें कोच ने बहुत सपोर्ट किया है, फेडरेशन ने भी समर्थन दिया और उनको धन्यवाद कहना चाहती हूं। जब मैं छोटा था तब मैंने मैरीकॉम के बारे में सुना था, हम लड़कों के साथ खेला करते थे। इसके अलावा संध्यारानी दीदी और सनाथोई दीदी (Sanathoi Devi) हैं, उनको देखकर काफी प्रेरित हुई।
सवालः भारत की मिट्टी तो बात है ही, लेकिन मणिपुर की मिट्टी में भी कुछ बात है, आपने जिन लोगों के नाम लिए, मीराबाई हैं उन्होंने सिल्वर मेडल जीता, आपने भी सिल्वर जीता, कल हम मीरा से बात कर रहे थे तो वो भी कह रही थीं कि रोशिबिना भी मेडल जरूर लाएगी, तो आपसे में आप लोगों की बात होती है?
रोशिबिनाः हां, कभी-कभी बीच में बात होती है, दीदी अच्छी है, वो अच्छा फीडबैक देती हैं, अच्छे से जवाब देती हैं। अच्छा लगता है कि मणिपुर से मीराबाई दीदी और मैं आई और आने वाले भी वहां से व भारत से और अच्छा करेंगे।
सवालः एशियन गेम्स हो चुके हैं, अब आगे किस चीज पर फोकस करेंगी?
रोशिबिनाः अभी हम लोग को सक्रेटेरी सर ने बोला है कि कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप और वर्ल्ड चैंपियनशिप आने वाला है, उसके लिए तैयारी करेंगे।
