Explainer: पिच का पेंच और श्रीलंकाई स्पिनर्स की मुश्किल चुनौती, कैसे निपटेगी टीम इंडिया?

WTC फाइनल की रेस में बने रहने से ज्यादा भारतीय टीम के सामने श्रीलंका की स्पिन फ्रेंडली पिचों पर अच्छी बल्लेबाजी करने की चुनौती रहेगी। इसकी सबसे बड़ी वजह श्रीलंका में स्पिनर्स का दबदबा है। श्रीलंका में पिछले 50 सालों में स्पिन गेंदबाजों का राज रहा है। वहीं, पिछले दो सालों में भारतीय बल्लेबाजों का स्पिन के खिलाफ प्रदर्शन बेहद निराशाजनक है।

स्पोर्ट्स डेस्क, नई दिल्ली। श्रीलंका के खिलाफ दो टेस्ट मैच की सीरीज से पहले अभ्यास मैच में बल्लेबाजों ने खासकर देवदत्त पडिक्कल और रवींद्र जडेजा ने अपनी छाप छोड़ी। केएल राहुल ने भी अच्छी बल्लेबाजी की। 15 अगस्त से शुरू होने वाली टेस्ट का पहला मैच गॉल में खेला जाएगा। शुभमन गिल की अगुआई वाली टीम इंडिया के लिए यह दौरा बेहद अहम रहने वाला है। यह सीरीज तय करेगी की भारत वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के मौजूदा साइकल के फाइनल की रेस में बनी रहेगी या फिर नहीं।

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श्रीलंका की स्पिन फ्रेंडली पिच पर होगी भारतीय बल्लोबाजों की परीक्षा।

हालांकि, WTC फाइनल की रेस में बने रहने से ज्यादा भारतीय टीम के सामने श्रीलंका की स्पिन फ्रेंडली पिचों पर अच्छी बल्लेबाजी करने की चुनौती रहेगी। इसकी सबसे बड़ी वजह श्रीलंका में स्पिनर्स का दबदबा है। श्रीलंका में पिछले 50 सालों में स्पिन गेंदबाजों का राज रहा है। यहां स्पिनर्स का 31.71 का औसत एशिया के सभी देशों मे सबसे उम्दा है। यही नहीं, पिछले पांच दशक में स्पिनर ने भारत के बाद श्रीलंका में ही सबसे ज्यादा विकेट हासिल किए हैं। भारत में स्पिनर्स ने 3647 विकेट लिए हैं तो वहीं, श्रीलंका की पिचों पर स्पिनर्स ने 2730 विकेट चटकाए हैं। खास बात यह है कि इन 50 सालों में भारत में श्रीलंका से 59 टेस्ट मैच ज्यादा खेल गए हैं। यानी कि श्रीलंका में खेले गए टेस्ट मैचों की संख्या भारत में खेले गए टेस्ट मैचों की संख्या से कम है।

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