आज भारत अपना 77वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। देश भर में लोगों के बीच देशभक्ति की भावना उमड़ रही है। क्या बच्चे और क्या बूढ़े हर कोई इस आजादी के जश्न में डूब जाना चाहता है। यह दिन न केवल देश को स्वतंत्रता हासिल करने वाले बलिदानों को याद करने का दिन है बल्कि सीमा पर तैनात अपने जवानों के प्रति आभार व्यक्त करने का भी दिन है।
भारत-पाकिस्तान (साभार-ICC Screenshot and Indian Army)
आज हम आपको देशभक्ति की भावना से प्रेरित ऐसे ही एक मैच की कहानी बताएंगे जब हमारे जवान सीमा पर पाकिस्तान के खिलाफ दो-दो हाथ कर रहे थे और टीम इंडिया ने उन्हें झूमने का एक छोटा सा मौका दिया था।
कारगिल में गोलियां और मैदान में IND vs PAK
भारत-पाकिस्तान का मुकाबला अपने आप में अतिरिक्त दबाव साथ लाता है। ऐसे में टीम जब मुकाबला वर्ल्ड कप का हो तो फिर क्या ही कहना? लेकिन 1999 में परिस्थिति इससे भी विपरीत थी। इधर कारगिल में हमारे जवान दुश्मनों से भिड़ रहे थे तो मैदान पर भारत और पाकिस्तान की टीम आमने-सामने थी।
टीम इंडिया ने दिया जवानों को झूमने का मौका
मोहम्मद अजहरुद्दीन की कप्तानी में टीम इंडिया ने पहले बल्लेबाजी करते हुए राहुल द्रविड़ के 61, अजहर के 59 और सचिन की 45 रन की पारी के दम पर 50 ओवर में 6 विकेट के नुकसान पर 227 रन बनाए। उस वक्त यह लक्ष्य पाकिस्तान के लिए आसान नहीं था, लेकिन इसे और मुश्किल बनाया भारतीय गेंदबाजों ने जिन्होंने स्टार बल्लेबाजों से सजी पाकिस्तान की टीम को रोक दिया।
180 के स्कोर पर ढेर पाकिस्तान
सीमा पर जो हो रहा था उसको देखते हुए पूरा देश इस मैच में टकटकी लगाए बैठा था। भारतीय गेंदबाजों ने न अपने जवानों को और न ही अपने देशवासियों को निराश किया। नतीजा पाकिस्तान की टीम पूरे ओवर भी नहीं खेल पाई और 180 रन बनाकर ढेर हो गई। पाकिस्तान की ओर से इंजमाम-उल-हक ने सर्वाधिक 41 जबकि सईद अनवर ने 36 और मोइन खान ने 34 रन बनाए। भारत की ओर से वेंकटेश प्रसाद ने 27 रन देकर 5 जबकि जवागल श्रीनाथ ने 3 और अनिल कुंबले ने 2 विकेट चटकाए। टीम इंडिया ने यह मुकाबला 47 रन के अंतर से जीता और उस तनाव की स्थिति में अपने जवानों की ऊर्जा को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया।
