T20 World Cup: पाकिस्तान में बनना चाहता था फाइटर पायलेट, अब वही बना मैदान पर काल

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  • Updated Oct 28, 2022, 08:00 AM IST

जिंबाब्वे को पाकिस्तान के खिलाफ पर्थ में खेले गए टी20 विश्व कप के अहम मुकाबले में जीत दिलाने वाले सिकंदर रजा पाकिस्तान एयरफोर्स में शामिल होकर फाइटर पायलट बनना चाहते थे। लेकिन उसी देश की टीम के खिलाफ वो जिंबाब्वे की जीत के हीरो बनकर उभरे हैं।

पर्थ: जिंबाब्वे के ऑलराउंडर सिकंदर रजा पाकिस्तान एयरफोर्स में फाइटर पायलट बनना चाहते थे। लेकिन उसके टेस्ट में फेल होने वाला वही शख्स गुरुवार को पाकिस्तान की जिंबाब्वे के खिलाफ टी20 विश्व कप 2022 में एक रन के अंतर से हार की अहम वजह बना। जिंबाब्वे के खिलाफ जीत के लिए 130 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए पाकिस्तानी टीम 20 ओवर में 8 विकेट खोकर 129 रन बना सकी और एक रन के अंतर से मुकाबला गंवा दिया।

Sikandar-Raza

सिकंदर रजा( साभार ICC)

शानदार गेंदबाजी के लिए चुने गए प्लेयर ऑफ द मैच

पर्थ में पाकिस्तान के खिलाफ सिकंदर रजा गेंद के साथ शानदार फॉर्म में थे। उन्होंने कांटे की टक्कर वाले इस मुकाबले में 25 रन देकर 3 विकेट लिए वहीं बल्लेबाजी के दौरान 16 गेंद में केवल 9 रन का योगदान किया। जिंबाब्वे की जीत के बाद शानदार गेंदबाजी प्रदर्शन के लिए मैन ऑफ द मैच चुना गया। टी20 विश्व कप 2022 में क्वालीफायर्स दौर से लेकर अबतक सिकंदर रजा जिंबाब्वे के लिए शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं और तीन बार ये पुरस्कार जीत चुके हैं।

सियालकोट में हुआ था जन्म

36 वर्षीय सिकंदर रजा का जन्म पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के सियालकोट में हुआ था। लेकिन सिकंदर के एयरफोर्स के टेस्ट में फेल होने के बाद उनका परिवार जिंबाब्वे चला गया। इसके बाद सिकंदर अपनी उच्च शिक्षा के लिए स्कॉटलैंड चले गए। लेकिन क्रिकेट उन्हें बुला रहा था और वो खुद को नहीं रोक सके। स्कॉटलैंड से लौटकर उन्होंने जिंबाब्वे में घरेलू क्रिकेट खेलनी शुरू की। साल 2013 में वो राष्ट्रीय टीम में जगह बनाने में सफल रहे।

कड़ी मेहनत से सीखा है क्रिकेट खेलनासिकंदर ने कहा, मैंने कड़ी मेहनत से क्रिकेट खेलना सीखा है। मैंने देरी से क्रिकेट खेलना शुरू किया और अब उस खोए वक्त की भरपाई कर रहा हूं। मैंने जिंबाब्वे के लिए खेलते हुए बहुत कुछ सीखा है। हमें बड़ी टीमों के खिलाफ ज्यादा मैच खेलने को नहीं मिलते हैं। हमें फ्लड लाइट्स में खेलने के ज्यादा मौके नहीं मिलते हैं। यह पर्थ में मेरा पहला मैच था।

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