भारत के महान पूर्व बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर जब भी कोई बात रखते हैं तो क्रिकेट फैंस के लिए वो काफी मायने रखती है। इस बार उन्होंने भारतीय क्रिकेट टीम के साथ अपने कप्तानी के कार्यकाल के बारे में खुलकर बात की और उस दौर पर अपनी ईमानदार राय रखी। सचिन तेंदुलकर, जिन्हें सर्वकालिक महान खिलाड़ियों में से एक माना जाता है, ने बताया कि उन्हें अपनी पसंद के खिलाड़ियों को टीम में चुनने की पूरी आजादी नहीं थी। उन्होंने ये भी कहा कि उस समय की तुलना में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) अब कहीं अधिक पेशेवर हो गया है।
सचिन तेंदुलकर
सचिन ने अपने कार्यकाल के अंत में भारतीय क्रिकेट को प्रभावित करने वाले मैच-फिक्सिंग विवाद का भी जिक्र किया और उस दौर को राष्ट्रीय टीम के लिए एक 'काला अध्याय' (डार्क फेज़) बताया। रेडिट पर 'आस्क मी एनीथिंग' (मुझसे कुछ भी पूछें) सेशन के दौरान एक सवाल का जवाब देते हुए सचिन ने कहा, "कप्तान के तौर पर टीम का नेतृत्व करना मेरे लिए बहुत सम्मान की बात थी। हालांकि, मुझे हमेशा अपनी टीम खुद चुनने की पूरी आजादी नहीं थी। 1990 के दशक की तुलना में आज का BCCI कहीं अधिक पेशेवर संगठन है। उस दौर में भारतीय क्रिकेट एक बहुत ही बुरे दौर से भी गुजरा था।"
इसके अलावा, जब सचिन से उन कप्तानों के बारे में पूछा गया जिनके नेतृत्व में उन्होंने खेला था, तो उन्होंने सौरव गांगुली और महेंद्र सिंह धोनी का नाम लिया। आपको बता दें कि सचिन तेंदुलकर ने 1996-1997 और 1999-2000 के बीच दो अलग-अलग दौर में भारतीय टीम की कप्तानी की थी।उन्होंने 25 टेस्ट मैचों में टीम का नेतृत्व किया, जिनमें से भारत ने केवल चार मैच जीते और नौ मैचों में हार का सामना किया। वहीं, 12 मैच ड्रॉ पर खत्म हुए। वनडे क्रिकेट की बात करें तो, उन्होंने 73 मैचों में कप्तानी की, जिनमें से भारतीय टीम ने 23 मैच जीते और 43 मैचों में हार झेली।
अपने पहले कार्यकाल के दौरान सचिन को अचानक कप्तानी से हटा दिया गया था, क्योंकि मोहम्मद अजहरुद्दीन की वापसी हुई और उन्होंने 1999 विश्व कप तक टीम की कमान संभाली। उस बड़े टूर्नामेंट में टीम के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद, सचिन फिर से कप्तान बने, लेकिन एक साल बाद ही उन्होंने यह पद छोड़ दिया। उनके बाद सौरव गांगुली कप्तान बने, जिसके साथ ही भारतीय क्रिकेट में एक नए दौर की शुरुआत हुई।
