नई दिल्ली: दुनिया के सर्वकालिक महान क्रिकेट खिलाड़ियों में शुमान वेस्टइंडीज के ब्रायन लारा ने अपने क्रिकेट करियर में कई बेमिसाल पारियां खेलीं। उन्होंने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में नाबाद 501*, टेस्ट क्रिकेट में 400*, 375, 277 रन की बेमिसाल पारियां खेली हैं। लेकिन एक पारी जो महज 153 रन की थी लेकिन उसने ब्रायन लारा के महान क्रिकेट खिलाड़ी बनाने में अहम भूमिका निभाई वो पारी उन्होंने 30 मार्च, 1999 को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बारबाडोस टेस्ट में खेली थी।
ब्रायन लारा(साभार ICC)
कंगारुओं के खिलाफ दिलाई यादगार जीत
ब्रायन लारा और ऑस्ट्रेलियाई टीम के बीच हमेशा छत्तीस का आंकड़ा रहा। लारा ने कंगारुओं को अकेले दम पटखनी देने का कोई भी मौका हाथ से खाली नहीं जाने दिया। अधिकांश मौकों पर लारा शेन वॉर्न, ग्लेन मैक्ग्रा जैसे सर्वकालिक महान गेंदबाजों और स्टार खिलाड़ियों से सजी ऑस्ट्रेलियाई टीम और जीत के बीच रोड़ा बने और अपनी टीम को यादगार जीत दिलाई।
चौथी पारी में खेली 153 रन की नाबाद पारी
ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ लारा ने बारबाडोस में 153 रन की पारी खेलकर टीम को 1 विकेट से यादगार जीत दिलाई थी। उस मुकाबले में जीत के लिए चौथी पारी में 311 रन की दरकार थी। टीम ने पांच विकेट महज 105 रन पर गंवा दिए थे। एक छोर पर लारा टिके थे और कंगारू गेंदबाजों की जमकर धुनाई कर रहे थे। देखते देखते मेजबान टीम 248 रन पर 8 विकेट गंवा दिए। दूसरे छोर पर कर्टली एंब्रोस और कर्टनी वॉल्श जैसे बल्लेबाज थे। लेकिन लारा ने हार नहीं मानी और अपनी टीम को 1 विकेट से यादगार जीत दिलाकर वापस लौटे।
लारा ने अपनी 256 गेंद में नाबाद 153 रन की पारी के दौरान 19 चौके और एक छक्का जड़ा। उन्होंने 118 गेंद में अपना अर्धशतक पूरा किया लेकिन शतक केवल 169 गेंद में 14 चौकों और एक छक्के की मदद से पूरा कर लिया। इस यादगार मैच जिताऊ पारी के लिए लारा को प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया था।
अन्य बल्लेबाज नहीं कर पाए थे 40 का आंकड़ा भी पार
लारा की ये पारी इस वजह से भी खास थी कि उन्होंने उस मुश्किल विकेट पर नाबाद शतक जड़ा जिसपर दोनों टीमों का और कोई बल्लेबाज आखिरी दो पारियों में 40 रन का आंकड़ा भी पार नहीं कर सका। उस पिच पर लारा ने खूंटा गाड़ दिया और कंगारू गेंदबाजों के छक्के छुड़ा दिए। ग्लेन मैक्ग्रा ने पारी में पांच और जेसन गेलेस्पी ने 3 विकेट झटके लेकिन दोनों ही गेंदबाज लारा का बाल भी बांका नहीं कर सके।
