नई दिल्ली: मुकेश कुमार को राष्ट्रीय टीम में चयन के बारे में तब तक पता नहीं चला था जब तक उन्हें भारतीय टीम के आधिकारिक वाट्सएप ग्रुप में शामिल नहीं किया गया। मुकेश ने राजकोट से पीटीआई से कहा, 'मैं बहुत भावुक हो गया। सब धुंधला सा लग रहा था। मुझे सिर्फ अपने दिवंगत पिता काशी नाथ सिंह का चेहरा याद आ रहा था। जब तक मैं बंगाल के लिये रणजी ट्रॉफी में नहीं खेला, तब तक मेरे पिता को नहीं लगा कि मैं पेशेवर तौर पर खेलने के लिये अच्छा हूं। उनको शक था कि मैं काबिल हूं भी या नहीं।'
रणजी फाइनल्स से पहले हो गया था पिता का निधनरणजी फाइनल्स से पहले ही उनके पिता का ‘ब्रेन स्ट्रोक’ से निधन हो गया। मुकेश सुबह ट्रेनिंग करते और अस्पताल में अपने पिता के बिस्तर के पास समय बिताते। बिहार के गोपालगंज जिले के मुकेश ने कहा, 'आज मेरी मां की आंखों में आंसू थे। वह भी बहुत भावुक हो गयी थीं। घर पर हर किसी ने रोना शुरू कर दिया।'
