स्पोर्ट्स डेस्क, नई दिल्ली। हारने का कोई अच्छा समय नहीं होता। खासकर तब जब आप T20I में भारत की तरह लगातार जीत रहे हों। 2023 से शुरू होकर तीन साल तक कोई सीरीज या टूर्नामेंट न हारे हों। T20 वर्ल्ड कप को सफलतापूर्वक डिफेंड करने वाली पहली टीम बनने के तुरंत बाद लगातार सीरीज और पांच मैच हारना उनके लिए बहुत बड़ा झटका साबित हुआ। बॉलिंग, बैटिंग की कलई खुल गई है। टीम इंडिया के खिलाड़ी घरेलू परिस्थितियों की बैटिंग पिच पर खेलने का हैंगओवर झेल रहे हैं।
भारतीय टी20 टीम की कमियों को दूर करने का समय।
असल में, श्रेयस अय्यर और सिलेक्टर्स के लिए यह सबसे बुरा समय हो सकता है, क्योंकि यह वर्ल्ड कप जीतने वाले कैप्टन के बाहर होने के ठीक बाद और उस प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट के बाहर होने के दौरान आया है। भले ही सूर्यकुमार यादव को हटाना और संजू सैमसन को बाहर करना भारत की हार का कारण नहीं है, लेकिन इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता है कि उनके खेलने से शायद कहानी दूसरी हो सकती थी। ऐसे में पूरी टीम के लिए यह समय सबक का है।
कमियों को दूर करने का समय
लगातार 16 सीरीज में बिना हारे जीतना तो किसी न किसी मोड़ पर खत्म होना ही था। टी20 के बदलते फॉर्मेट में लगातार हार का सामना करना ये उलटफेर एक नए दौर की शुरुआत में हुए हैं, जिसमें अगला वर्ल्ड कप दो साल दूर है। ऑस्ट्रेलिया में खेलने जाने वाले टी20 वर्ल्ड कप 2028 में टाइटल बचाने के लिए अभी भी समय है। हालांकि, कुछ कमियां हैं, जिन्हें दूर करने की बेहद जरूरत है।
सबसे पहले, यह याद दिलाना जरूरी है कि भारत अपने शानदार प्रदर्शन के आखिर में T20 में परफेक्ट लाइन-अप के साथ नहीं उतरा था। टीम में स्ट्रक्चरल कमियां थीं। घरेलू हालात ने कमजोर लोअर मिडिल ऑर्डर को छिपा दिया, जहां तिलक वर्मा ने अपनी जगह से बाहर बैटिंग की। जसप्रीत बुमराह और हार्दिक पांड्या पर बहुत ज्यादा भरोसा था, जो उनकी गैरमौजूदगी में साफ दिख रहा है।
बन सकती है उम्दा टीम
वरुण चक्रवर्ती का प्रदर्शन खराब हो रहा था, जो फिटनेस की दिक्कतों के साथ जारी रहा। अब विदेशी दौरे पर ये सभी दिक्कतें एक ही समय में सामने आ गईं। कोचिंग स्टाफ का कहना है कि खिलाड़ी अभी भी महीनों तक बैटिंग की दुनिया में खेलने का हैंगओवर झेल रहे हैं। अगर आप वर्ल्ड कप स्क्वॉड से बुमराह, हार्दिक और अक्षर पटेल (अक्षर की जगह अब क्रुणाल पांड्या ले सकते हैं) को निकाल दें, तो इंडिया में इतना टैलेंट है कि फर्स्ट-चॉइस इंडिया स्क्वॉड को चैलेंज करने के लिए आसानी से कोई दूसरी स्क्वॉड चुन सकते हैं।
इम्पैक्ट प्लेयर रूल ने बिगाड़ा बैलेंस
दूसरी तरफ, आईपीएल में ऑलराउंडर्स को डेवलप करने का मामला उलटा पड़ता जा रहा है। वॉशिंगटन सुंदर और शिवम दुबे, जो इंटरनेशनल टीम में ऑलराउंडर के तौर पर खेलते हैं, लेकिन आईपीएल में मुश्किल से ही बॉलिंग करते हैं, क्योंकि इम्पैक्ट प्लेयर एक साइड को बैलेंस करने का चैलेंज खत्म कर देता है। नीतीश कुमार रेड्डी को हार्दिक पांड्या के रिप्लेसमेंट के तौर पर तैयार किया जा रहा था, लेकिन उनकी फिटनेस एक समस्या रही है। वरुण की गेंदबाजी पर भी बारीकी से नजर रखनी होगी। यह कोई नई बात नहीं है कि बैट्समैन अब पहले से ज्यादा उन्हें स्टेप-हिट करने लगे हैं।
असिस्टेंट कोच ने भी उठाए सवाल
ब्रिस्टल में चौथे T20I में हार के बाद इंडिया के असिस्टेंट कोच रयान टेन डोएशेट ने कहा, मुझे लगता है कि हमने एडैप्टेबिलिटी के बारे में बहुत बात की है, लेकिन मुझे लगता है कि अब यह उस पॉइंट पर आ गया है जहां आपको असल में उस सूटकेस को खोलना होगा। साइकोलॉजिकली या मेंटली, मुझे लगता है कि ग्रुप के लिए चैलेंज यह मानना रहा है कि हम विदेशी कंडीशन में अच्छा नहीं कर रहे हैं और प्लेयर्स को चैलेंज देना और कहना कि देखो, बड़ा प्राइज दो साल बाद ऑस्ट्रेलिया में है।
मुश्किल हालात में खेलने की चुनौती
उन्होंने आगे कहा, क्या हम ऐसी टीम बनना चाहते हैं जो इंडिया में तो 250 रन बनाए और ईडन गार्डन्स में 80 मीटर छक्के मारें? या हम ऐसी टीम बनाए जों मैनचेस्टर और साउथैम्प्टन जैसी जगहों पर उम्दा खेले, जहां चीजें थोड़ी अलग हैं? और फिर MCG और ऐसी जगहों पर, जहां हालात भारत से बिल्कुल अलग हों। हम ऐसी टीम बनना चाहते हैं जो अलग-अलग कंडीशन में सच में अच्छा करे और हमारे पास उन एडजस्टमेंट को करने की मेंटैलिटी है और यही मेंटल चैलेंज है और हमें प्लेयर्स से यही करवाना है।
टैक्टिकल तैयारी को करना होगा सही
टीम मैनेजमेंट खिलाड़ियों से अप्रोच में बदलाव करने के लिए कहता है, लेकिन उन्हें खुद से पूछना चाहिए कि क्या वे प्लेइंग इलेवन को सही तरीके से बना रहे हैं। क्या वे ऐसे बैट्समैन बना रहे हैं जो एक-दूसरे के साथ हैं? क्या बॉलर्स के प्लान एकदम सही हैं? क्या टैक्टिकल तैयारी उतनी ही सही है जितनी राहुल द्रविड़ और उनके टीम मैनेजमेंट के समय हुआ करती थी? प्लेंइंग इलेवन में बल्लेबाजों की बैटिंग पोजिशन फिक्स है?
फिर से कायम किया जा सकता है दबदबा
जाहिर है, मैनेजमेंट अभी ODI टीम पर ज्यादा ध्यान दे रहा है, जो बुमराह और हार्दिक को टी20 बाइलेटरल सीरीज से आराम देने से दिखता है। अभी से लेकर 2027 ODI वर्ल्ड कप के बीच अभी भी समय है, जब भारत टी20 टीम के लिए बैक-अप प्लान तैयार करने पर विचार कर सकता है। ऐसे में नतीजों और उम्मीदों को नैचुरल बनाना होगा। एक T20 राज खत्म हो गया है, लेकिन फिर से दबदबा बनाया जा सका है।
