Ishan Kishan: विकेटकीपर बल्लेबाज ईशान किशन ने खुलासा किया कि भारतीय टीम से लगभग दो साल तक बाहर रहने पर निराश होने के बजाय उन्होंने प्रदर्शन में अधिक निरंतरता लाने के लिए अपने खेल में सुधार करने पर ध्यान केंद्रित किया। किशन ने इस साल की शुरुआत में न्यूजीलैंड के खिलाफ टी20 अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला और टी20 विश्व कप के लिए भारतीय टीम में वापसी की। इससे पहले उन्होंने घरेलू सत्र में शानदार प्रदर्शन किया जिससे उनकी राष्ट्रीय टीम में वापसी संभव हो पाई। उन्होंने सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में 500 से अधिक रन बनाए। उनकी कप्तानी में झारखंड में इस प्रतियोगिता का खिताब जीता था।
ईशान किशन (फोटो साभार- IPL)
'खुद को लेकर रोना नहीं रो सकता था'
आईपीएल में सनराइजर्स हैदराबाद की तरफ से खेलने वाले किशन ने जिओहॉटस्टार से कहा, ’’जब मैं भारतीय टीम से बाहर था तो मैंने खुद से कहा कि मैं इसको लेकर रोना नही रो सकता या उदास नहीं हो सकता। किसी भी खिलाड़ी के लिए ऐसा करना सबसे आसान होता है। इससे शायद कुछ लोगों की सहानुभूति मिल जाए, शायद आपको अच्छा भी लगे, लेकिन इससे कुछ हासिल नहीं होगा।’’ उन्होंने कहा, ’’राष्ट्रीय टीम में वापसी करने का एकमात्र तरीका रन बनाना था। मैं बस अपने खेल में सुधार करना चाहता था और जितना हो सके उतने रन बनाना चाहता था, भले ही इसका मतलब किसी भी अन्य बल्लेबाज से ज्यादा छक्के लगाना हो।’’ किशन ने कहा कि राष्ट्रीय टीम से बाहर रहने के दौरान खेल के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और भी बढ़ गई और इसी लगन ने उन्हें घरेलू क्रिकेट में ढेरों रन बनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा, ’’लगातार रन बनाने से ही आप टीम में वापसी कर सकते हैं। यदि एक सत्र में 300 रन काफी नहीं हैं तो 400 रन बनाएं। अगर यह भी काफी नहीं है तो 500 रन बनाएं। आखिर क्रिकेट ही हमारी रोजी-रोटी है।’’
'टीम से बाहर होने पर समझ आती है अहमियत'
किशन ने कहा, ’’जब आप टीम से बाहर होते हैं तो आपको इसकी अहमियत समझ आती है और आप हर मैच का सम्मान करने लगते हैं। आपके अंदर अच्छा प्रदर्शन करने और जीत हासिल करने की ललक जाग उठती है। मेरा भी यही लक्ष्य था कि मैं अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करूं।’’ किशन ने तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करने के बारे में कहा कि इससे उन्हें पारी को गति देने और आखिर तक बल्लेबाजी करने का आत्मविश्वास मिला है। उन्होंने कहा, ’’इतने वर्षों तक तीसरे नंबर के बल्लेबाज के रूप में खेलने के बाद अगर आप अच्छी तरह से सामंजस्य बिठा लेते हैं तो फिर आप आखिर तक बल्लेबाजी करने और बड़ा स्कोर बनाने की कोशिश करते हैं। मैं चीजों को सरल बनाए रखने पर ध्यान केंद्रित करता हूं।’’
