Why Foreign Players Cannot Earn More Than 18 crores: इंडियन प्रीमियर लीग 2026 के मिनी ऑक्शन का आयोजन 16 दिसंबर 2025 को किया जाने वाला है। इस नीलामी में 350 खिलाड़ियों की बोली लगने वाली है जो कि 77 स्लॉट जो भरे जाने हैं उसमें अपना नाम शुमार करना चाहेंगे।इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) हमेशा से भारी-भरकम बोलियों और अंतरराष्ट्रीय सितारों के बीच होने वाली जंग के लिए मशहूर रहा है। इसमें एक बार फिर से ये उम्मीद जताई जा रही है कि विदेशी खिलाड़ी है सबसे ज्यादा महंगा बिकेगा लेकिन इसके इतर आगामी IPL 2026 मिनी-नीलामी के करीब आते ही चर्चा का केंद्र यह नहीं है कि कौन सबसे बड़ी बोली लगाएगा, बल्कि यह है कि विदेशी खिलाड़ी वास्तव में कितना पैसा अपने घर ले जा पाएंगे। इसके पीछे एक बड़ा नियम है जिसने विदेशी खिलाड़ियों के अरमानों पर पानी फेर दिया है। आइए जानते हैं क्या है वह नियम जिसके चलते विदेशी खिलाड़ी केवल 18 करोड़ रुपए ही घर ले जा सकते हैं।
आईपीएल में विदेशी खिलाड़ी की अधिक कमाई पर क्यों लगी रोक? (फोटो- BCCI)
पिछले सीज़न में मिनी-नीलामी ने विदेशी सितारों के लिए चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए थे। उदाहरण के लिए, 2024 की नीलामी में मिचेल स्टार्क और पैट कमिंस जैसे गेंदबाजों ने 20 करोड़ रुपये से कहीं अधिक की राशि हासिल की थी। इस तरह के सौदों ने लीग के भीतर निष्पक्षता को लेकर चिंताएं पैदा कर दी थीं, खासकर तब जब कुछ विदेशी खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं के कारण केवल आधे सीज़न के लिए ही उपलब्ध होते थे। कई टीमों ने शिकायत की थी कि विदेशी खिलाड़ी मिनी-नीलामी का लाभ उठाकर भारी अनुबंध तो हासिल कर लेते हैं, लेकिन उनकी उपलब्धता हमेशा संशय में रहती है। ऐसे में बीसीसीआई ने एक बड़ा कदम उठाते हुए नियम में बदलाव किया है।
क्या है मेक्सिमम फीस नियम?
अक्सर देखा गया है कि मिनी-नीलामी में खिलाड़ियों की आपूर्ति कम और मांग अधिक होने के कारण विदेशी खिलाड़ियों की कीमतें आसमान छूने लगती थीं। मिनी-नीलामी में बजट की अधिकता और खिलाड़ियों की कमी का फायदा उठाकर कुछ विदेशी सितारे रिकॉर्ड तोड़ अनुबंध हासिल कर लेते थे। इसी को रोकने के लिए बीसीसीआई मेक्सिमम फीस नियम लेकर आई है जिसके तहत कोई भी विदेशी खिलाड़ी आईपीएल ऑक्शन में 18 करोड़ रुपए से ज्यादा नहीं कमा सकता है। ये नियम कहता है कि मिनी ऑक्शन में किसी विदेशी खिलाड़ी की मैक्सिमम फीस हाईएस्ट रिटेंशन स्लैब (INR 18 करोड़) और पिछले मेगा ऑक्शन में मिली सबसे ज़्यादा कीमत (इस मामले में ऋषभ पंत के लिए INR 27 करोड़) में से जो भी कम हो, वह होगी। ऐसे में 18 करोड़ कम है तो इसीलिए विदेशी खिलाड़ियों को 18 करोड़ से ज्यादा नहीं मिलेंगे।
18 करोड़ से ज्यादा लगी बोली तो पैसा किसके पास जाएगा?
2026 की मिनी-नीलामी से, 18 करोड़ रुपये से अधिक की कोई भी बोली राशि खिलाड़ी को नहीं दी जाएगी। इसके बजाय, इस अतिरिक्त राशि को बीसीसीआई द्वारा अपने पास रख लिया जाएगा और इसका उपयोग खिलाड़ी कल्याण और विकास पहलों के लिए किया जाएगा। इसका मतलब यह है कि फ्रेंचाइजी आक्रामक बोली लगाकर यह तो बता सकती हैं कि वे किसी खिलाड़ी को कितनी अहमियत देती हैं, लेकिन अतिरिक्त धन व्यक्तिगत वेतन को बढ़ाने के बजाय पूरे क्रिकेट इकोसिस्टम को लाभ पहुंचाएगा। उदाहरण के तौर पर, यदि कैमरन ग्रीन पर 25 करोड़ की बोली लगती है, तो उन्हें केवल 18 करोड़ मिलेंगे और बाकी के 7 करोड़ बीसीसीआई के पास जमा हो जाएंगे। बोर्ड इसका उपयोग क्रिकेट के भले के लिए करेगा।
