भारत और इंग्लैंड के बीच 'केनिंग्टन ओवल' में टेस्ट सीरीज का पांचवां मैच खेला जाना है। इस मैदान से जुड़ा एक किस्सा ऐसा है जिसके बाद टीम इंडिया को सावधान रहना चाहिए। हालांकि, इस सीरीज में गेंदबाजों की खूब पिटाई हुई है और 17 शतक अब तक लग चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद इस पिच के व्यव्हार के बार में कोई अनुमान नहीं लगा सकता है। कम से कम आंकड़े तो यही कहते हैं। एक वक्त था जब इस मैदान पर ऑस्ट्रेलियाई टीम के पसीने छूट गए थे और टीम 50 रन से नीचे ढेर हो गई थी। टीम इडिया के लिए खतरे की बात तो नहीं है, लेकिन सावधान रहने की जरुरत है। यह मुकाबला अगस्त 1896 में खेला गया था। टॉस जीतकर इंग्लैंड ने बल्लेबाजी चुनते हुए पहली पारी में 145 रन बना दिए।
भारत और इंग्लैंड (साभार-BCCI)
ओवल के मैदान पर कप्तान विलियम ग्रेस ने इस पारी में स्टेनली जैक्सन के साथ 54 रन की ओपनिंग साझेदारी की। ग्रेस 24 रन बनाकर पवेलियन लौटे थे, जिसके बाद जैक्सन ने 45 रन बनाते हुए टीम को संभालने की कोशिश की। अंग्रेजों की इस टीम में कुमार श्री रणजीतसिंहजी भी थे, जिन्होंने आठ रन की पारी खेली, जबकि बॉबी एबेल ने 26 और आर्ची मैकलारेन ने 20 रन का योगदान टीम के खाते में दिया।
मेहमान टीम की ओर से ह्यूग ट्रम्बल ने सर्वाधिक छह शिकार किए, जबकि जॉर्ज गिफेन और टॉम मैककिबिन को दो-दो विकेट मिले। इसके जवाब में ऑस्ट्रेलियाई टीम पहली पारी में 119 रन पर सिमट गई। इस पारी में जो डार्लिंग ने 47, जबकि फ्रैंक इरेडेल ने 30 रन टीम के खाते में जोड़े। इंग्लैंड की ओर से जैक हर्न ने सबसे ज्यादा छह विकेट हासिल किए।
इंग्लैंड के पास पहली पारी के आधार पर 26 रन की बढ़त थी। टीम अगली पारी में 84 रन पर सिमट गई। ऐसे में ऑस्ट्रेलिया को जीत के लिए 111 रन का टारगेट मिला। यूं तो लक्ष्य मुश्किल नहीं था, लेकिन ऑस्ट्रेलियाई टीम 11 के स्कोर तक अपने छह विकेट गंवा बैठी। यहां से टीम के लिए संभलना मुश्किल था।ऑस्ट्रेलियाई टीम ने अपनी दूसरी पारी में 26 ओवर खेले और महज 44 रन पर ऑलआउट हो गई। इंग्लैंड की तरफ से बॉबी पील ने छह विकेट हासिल किए, जबकि जैक हर्न ने चार शिकार किए।
