Rohit Yadav On Neeraj Chopra: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के जेवलिन थ्रो फाइनल में भारत के नीरज चोपड़ा ने रजत पदक और यशवीर सिंह ने कांस्य पदक जीता। वहीं श्रीलंका के रमेश पथिरागे ने 89.75 मीटर के साथ गोल्ड मेडल पर कब्जा किया। इस इवेंट में भारतीय भाला फेंक टीम के उभरते चेहरे रोहित यादव को पदक का अहम दावेदार माना जा रहा था। हालांकि, वह 31 जुलाई को हुए फाइनल में 81.56 मीटर के साथ 7वें स्थान पर रहे। अब रोहित यादव ने बताया है कि उन्होंने फाइनल में क्यों अच्छा प्रदर्शन नहीं किया। उन्होंने बताया कि दूसरों से आगे निकलने की जल्दी में उन्होंने अपना प्लान बिगाड़ लिया। ग्लास्गो से लौटने के बाद पीटीआई से बात करते हुए 27 साल के रोहित ने माना कि उनका दूसरा थ्रो 81.56 मीटर का था। इस थ्रो के बाद उन्हें लगा कि वो टॉप-8 में तो आसानी से रहेंगे। इसके बाद उनकी सोच बदल गई।
रोहित यादव और नीरज चोपड़ा (फोटो साभार-neeraj____chopra/rohit________yadav)
ओवर कॉन्फिडेंस में बिगाड़ा अपना गेम
रोहित के मुताबिक, "मेरा दूसरा प्रयास अच्छा गया था। मुझे लगा मैं फाइनल में बना रहूंगा। फिर मैंने देखा कि श्रीलंका के रमेश पथिरागे ने 89.75 मीटर फेंककर गोल्ड ले लिया। नीरज भैया 85.83 और यशवीर 85.41 पर थे। उस वक्त दिमाग में आया कि मैं भी उन नंबरों को छू सकता हूं।" यही सोच उन्हें महंगी पड़ गई। रोहित ने कहा कि वो पथिरागे के थ्रो को टक्कर देना चाहते थे। यहां तक कि उनके मन में ये भी आया कि वो उस दिन नीरज चोपड़ा से भी बेहतर कर सकते हैं। इसी अति आत्मविश्वास में उन्होंने बाकी के चार प्रयासों में पूरी ताकत झोंक दी। नतीजा उनके हक में नहीं रहा। उनका तीसरा और पांचवा थ्रो फाउल हो गया। जबकि वह चौथे में सिर्फ 73.70 मीटर और आखिरी प्रयास में 79.55 मीटर ही भाला फेंक पाए।
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रोहित यादव ने स्वीकार की गलती
रोहित ने अपनी गलती स्वीकारते हुए कहा, "मैंने जल्दबाजी की। जब आपका एक अच्छा थ्रो आ जाए तो उसी लय को पकड़कर आगे बढ़ना चाहिए। लेकिन मैं स्कोरबोर्ड देखने लगा। दूसरे एथलीट क्या कर रहे हैं ये सोचने लगा। इसी वजह से फोकस हटा और तकनीक बिगड़ गई।" रोहित के लिए ये सीख भरा टूर्नामेंट रहा। उन्होंने कहा कि अब वो इसी गलती से सीखकर आगे बढ़ेंगे। इंटरनेशनल लेवल पर दबाव को संभालना और अपने खेल पर टिके रहना सबसे जरूरी है। रोहित का मानना है कि 81 मीटर की शुरुआत अच्छी थी। अगर वो उसी रिदम को आगे भी रख पाते तो नतीजा कुछ और हो सकता था।
