Atiqa Mir: यूनान में चैंपियंस ऑफ द फ्यूचर एकेडमी (सीओटीएफए) के दूसरे दौर में शानदार सफलता हासिल करने वाली भारत की 11 वर्षीय रेसर अतिका मीर ने खेल मंत्री मनसुख मांडविया से मुलाकात की। मांडविया ने रविवार को अपने आवास पर अतिका और उसके परिवार से मुलाकात की और मुंबई में जन्मी इस युवा रेसर को फॉर्मूला वन तक पहुंचने के सफर में मदद करने का वादा किया। कोई भी महिला ड्राइवर 1992 के बाद फॉर्मूला वन में भाग नहीं ले पायी है। अतिका को फॉर्मूला वन अकादमी से समर्थन हासिल है।
खेल मंत्री मनसुख मंडाविया से मिलीं 11 वर्षीय रेसर अतिका मीर (Instagram)
अतिका ने सोशल मीडिया पर लिखा, "सर, प्रोत्साहन और बहुमूल्य सलाह के लिए आभार। माननीय मंत्री ने मेरे हाल के प्रदर्शनों की सराहना की। उन्होंने मुझे फॉर्मूला वन में जगह बनाने के मेरे सपने को साकार करने में हर संभव मदद और समर्थन का आश्वासन भी दिया है।"
खेल मंत्री ने भी बैठक की तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा कीं। अतिका मई के आखिरी सप्ताह में सीओटीएफए के इतिहास में चैंपियनशिप के राउंड 2.2 में क्वालीफाइंग और हीट में शीर्ष स्थान हासिल करने के बाद फाइनल में बड़े अंतर से जीत हासिल करने वाली केवल तीसरी ड्राइवर बनी थी।
अतिका मीर की बड़ी उपलब्धियां
- अतिका मीर ने छह साल की उम्र में यूएई में प्रतिस्पर्धी कार्टिंग शुरू की। 2022-23 सीज़न में, वह मिनी आर श्रेणी में यूएई आईएएमई राष्ट्रीय कार्टिंग चैंपियनशिप में उपविजेता रहीं।
- अतिका मीर 2024 में इटली के साउथ गार्डा में होने वाली रोटैक्स यूरो ट्रॉफी के फाइनल के लिए क्वालीफाई करने वाली पहली भारतीय महिला ड्राइवर बनीं।
- वह 2024 में आयरन डेम्स यंग टैलेंट कार्यक्रम के लिए चयनित होने वाली एकमात्र एशियाई ड्राइवर भी बनीं।
- जनवरी 2025 में, अतिका WSK कार्टिंग सीरीज़ में प्रतिस्पर्धा करने के लिए इटली में बेबीरेस ड्राइवर अकादमी में दाखिला लिया।
- इसके बाद, फरवरी 2025 में, उन्होंने अबू धाबी के यास मरीना सर्किट में आयोजित आईएएमई समर कप में पोडियम स्थान हासिल किया।
- मीर ने फ्रांस के ले मैन्स में आयोजित रोटैक्स मैक्स चैलेंज इंटरनेशनल ट्रॉफी (आरएमसीआईटी) में माइक्रो मैक्स श्रेणी में एक रेस जीती और इस सीरीज में रेस जीतने वाली पहली महिला रेसर बन गईं।
- साल 2025 में, मीर को फॉर्मूला 1 अकादमी के "डिस्कवर यॉर ड्राइव" कार्यक्रम के लिए चुना गया, जिसका उद्देश्य मोटरस्पोर्ट में युवा महिला प्रतिभाओं को विकसित करना है। वहां वो चुनी गई एकमात्र एशियाई और सबसे कम उम्र की प्रतिभागियों में से एक थीं। इसके कुछ ही समय बाद, उन्हें यूएई स्थित कार्टिंग टीम एकेसेल जीपी ने अनुबंधित कर लिया, जो एफ1 अकादमी से संबद्ध है।
भारत में फॉर्मूला वन और इंडियन ग्रां प्रि का क्या हुआ?
खेल मंत्री मांडविया भारत में फॉर्मूला वन की वापसी के लिए उत्सुक हैं। भारत ने आखिरी बार 2013 में फॉर्मूला वन की मेजबानी की थी। गौतम बुद्ध नगर में स्थित बुद्ध अंतरराष्ट्रीय सर्किट में पहली बार 2011 में इंडियन ग्रां प्रि का पहली बार आयोजन किया गया था जिसे जर्मनी के सेबेस्टियन वेटेल ने जीता था। उसके बाद 2012 और 2013 के इंडियन ग्रां प्रि संस्करण में भी सेबेस्टियन वेटेल ही चैंपियन बने और हैट्रिक लगाई। हालांकि इसके बाद कई प्रशासनिक कारणों के चलते दोबारा इंडियन ग्रां प्रि का आयोजन नहीं हो पाया है और मौजूदा सरकार इसको वापस लाने की कोशिश में जुटी है।
