Why People Crying During Prayer: हाल ही में अयोध्या के राम मंदिर के शिखर पर धर्म ध्वज स्थापित किया। यह शुभ काम स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों पूरे विधि-विधान से हुआ। मंदिर के शिखर पर सनातन की पताका लहराता देख पीएम मोदी काफी भावुक नजर आए। उनकी तस्वीरें और वीडियोज सोशल मीडिया पर भी वायरल हुईं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि पूजा-पाठ के दौरान लोग भावुक क्यों हो जाते हैं। कुछ लोग तो इतने भावुक हो जाते हैं कि उनके आंसू निकल पड़ते हैं। आइए जानते हैं कि पूजा के दौरान भावनाओं के छलकने के पीछे क्या कारण होते हैं:
पूजा करते वक्त कुछ लोग भावुक क्यों हो जाते हैं (Photo: ANI)
भावनाओं का उमड़ पड़ना
जीवन की आशंकाएं, तनाव, चिंता, शिकायतें और दबा हुआ दुख, ये सब इंसान के अंत:मन में जमा रहता है। अपने दुख के निवारण के लिए वह ईश्वर की शरण में पहुंचता है। वहां पूजा का वातावरण शांत, पवित्र और सुरक्षित होता है। जब इतनी परेशानियों से घिरा इंसान ईश्वर के सामने अपना दिल खोलता है, तो वो जमा हुआ भाव अचानक बाहर आने लगता है। आंसू उसी भावनात्मक रिलीज का हिस्सा हैं। यह वैसा ही है जैसे लंबे समय बाद मन को आराम मिले और वह खुद-ब-खुद हल्का होने लगे।
आध्यात्मिक ऊर्जा का जादू
ज्योतिष और आध्यात्मिक परंपराओं में माना जाता है कि मंदिर में या फिर पूजा करते समय एक अलग तरह की सकारात्मक ऊर्जा का एहसास होता है। ऐसा लगता है जैसे किसी ने भीतर से छू लिया हो। मंत्रों की ध्वनि, जलती दीपक की लौ, अगरबत्ती की खुशबू और शांत वातावरण मिलकर मन को बहुत कोमल कर देते हैं। ऐसे में इंसान खुद को ईश्वर के करीब महसूस करता है और यह अनुभव कई बार आंखों को नम कर देता है। इसी कारण प्रार्थना के समय बहने वाले आंसू आत्मिक शुद्धता का प्रतीक भी माना जाता है।
अपराध बोध का टूटना
कभी-कभी हम अपने किए हुए गलत या कठोर व्यवहार को लेकर मन में बोझ रखते हैं। पूजा के दौरान जब व्यक्ति आत्मचिंतन करता है, तो उसे अपनी कमियां दिखाई देती हैं। ऐसे में पछतावे के आंसू निकलना भी सामान्य है। यह भी मन की सफाई का एक तरीका है।
ईश्वर का आभार
जब कोई व्यक्ति अपनी जिंदगी में आई खुशियों, उपलब्धियों या मुश्किल वक्त में मिली मदद के बारे में सोचता है, तो ईश्वर के प्रति कृतज्ञता का भाव उत्पन्न होता है। यह आभार भी कई बार आंसू के रूप में बाहर आता है। इस आंसू को कभी कमजोरी नहीं समझना चाहिए।
चंद्रमा का असर
ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को मन और भावनाओं का कारक माना गया है। ज्योतिषाचार्यों का मत है कि अगर किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में चंद्रमा संवेदनशील भावों में स्थित है या फिर उसकी दशा चल रही हो, तो वह जल्दी भावुक हो जाता है। पूजा या प्रार्थना के दौरान दिमाग शांत और ईश्वर पर केंद्रित होता है। ऐसी अवस्था में चंद्रमा का प्रभाव और गहरा हो जाता है। इसी कारण अकसर पूजा के दौरान आंखें नम हो जाती हैं।
उम्मीद करते हैं कि आपको समझ में आ गया होगा कि पूजा-प्रार्थना के दौरान रोना कोई बुरा संकेत नहीं है। जब मन लंबे समय तक दबे तनाव, पीड़ा या अपराध-बोध को ढोता है, तो प्रार्थना के दौरान वह स्वाभाविक तौर पर हल्का होने लगता है। इसलिए इस दौरान बहने वाले आंसुओं को आत्मा की सफाई का माध्यम माना जाता है।
