Janmashtami 2025: जन्माष्टमी की रात 12 बजे क्यों काटा जाता है खीरा? जानें, लड्डू गोपाल को खीरे में क्यों रखते हैं?

Krishna Janmashtami 2025: सदियों से ही कृष्ण जन्म के समय मध्यरात्रि को खीरा काटने की रस्म चली आ रही है। ऐसी मान्यता है कि खीरे के बगैर बांके बिहारी की पूजा अधूरी है। पूजा में इस्तेमाल किया जाने वाला खीरे डंठल वाला होना चाहिए। यहां से जानें जन्माष्टमी की रात 12 बजे क्यों खीरा काटा जाता है और लड्डू गोपाल को खीरे में क्यों रखा जाता है।

Krishna Janmashtami 2025: कल कृष्ण जन्माष्टमी है। इसे देशभर में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। जन्माष्टमी के दिन खीरे का विशेष धार्मिक और प्रतीकात्मक महत्व होता है। यह परंपरा केवल एक फल चढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि श्रीकृष्ण के जन्म और अवतार की गहराई से जुड़ी हुई है। यहां से आपको खीरा और जन्माष्टमी के बारे में विस्तार में जानकारी मिलेगी।

जन्माष्टमी पर खीरा क्यों काटा जाता है? (photo source: canva)

जन्माष्टमी पर लड्डू गोपाल को खीरे में क्यों रखते हैं?

कृष्ण जन्माष्टमी के दिन छोटे लड्डू गोपाल की मूर्ति को बिठाया जाता है, जैसे गर्भ में बालक हो। खीरे में लड्डू गोपाल को रखने का मतलब है कि भगवान ने गर्भ से जन्म लिया है। लड्डू गोपाल को खीरे में रखना भगवान के अवतार की स्मृति है। यह परंपरा हमें भक्ति, प्रतीकवाद और सजीव अनुभव की अद्भुत भावना प्रदान करती है।

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