वो कवि जिनकी रचनाओं में बहती है कृष्ण भक्ति की अनंत धारा, जानिए क्यों आज भी अमर हैं सूरदास

Surdas Ji Jeevan Parichay: संत सूरदास कौन थे। पढ़ें उनका जीवन परिचय, उनकी प्रसिद्ध रचनाएं, कृष्ण भक्ति का महत्व और अकबर-तानसेन से जुड़ा प्रसिद्ध प्रसंग इस विशेष लेख में।

Surdas Ji Jeevan Parichay: कृष्ण भक्ति की जब भी बात होती है, संत सूरदास का नाम सबसे पहले लिया जाता है। दृष्टिहीन होने के बावजूद उन्होंने अपनी रचनाओं से भक्ति, प्रेम और भावनाओं की ऐसी दुनिया रच दी, जिसने सदियों से लोगों के हृदय को छू रखा है। अपनी दिव्य काव्य प्रतिभा, भावनात्मक गहराई और कृष्ण भक्ति में डूबी रचनाओं के कारण सूरदास भारतीय साहित्य के आकाश में ऐसे चमकते हैं, जैसे भक्ति के सूर्य। उनकी वाणी में प्रेम था, करुणा थी और भगवान कृष्ण के प्रति अटूट समर्पण का अनुपम भाव था। वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी पर उनकी जयंती (Surdas Jayanti) मनाई जाती है। जानिए कौन थे संत सूरदास, उनकी अमर रचनाएं और अकबर-तानसेन से जुड़ा वह रोचक प्रसंग जिसने उनकी ख्याति को और भी महान बना दिया।

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कौन थे सूरदास जो बने कृष्ण भक्ति की अमर आवाज

सूरदास जी: भक्ति में डूबा एक संत कवि

सूरदास का जन्म लगभग 15वीं शताब्दी में माना जाता है। उनके जन्मस्थान को लेकर अलग-अलग मत मिलते हैं, लेकिन प्रचलित मान्यता के अनुसार उनका जन्म हरियाणा के सीही गांव या आगरा-मथुरा क्षेत्र के आसपास हुआ था। कहा जाता है कि वे जन्म से ही दृष्टिहीन थे, परंतु उनकी आंतरिक दृष्टि अत्यंत प्रखर थी।

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