विद्या आरंभ संस्कार आज का शुभ मुहूर्त 23-January 2026: विद्यारंभ संस्कार 16 संस्कारों में से एक है, जिसका खास महत्व है। आज बसंत पंचमी के दिन भी विद्यारंभ संस्कार किया जाता है। कहते हैं कि इस संस्कार के लिए शुभ मुहूर्त देखकर बच्चे की शिक्षा की शुरुआत करने से एकाग्रता बढ़ती है, बच्चा तेजस्वी- ज्ञानवान और विवेकी बनता है। इस दिन माता सरस्वती और गुरुजन का आशीर्वाद विशेष रूप से फलदायी होता है। तो यहां से आप जान सकते हैं कि आज बसंत पंचमी के दिन विद्यारंभ संस्कार करने का शुभ समय क्या है। साथ ही यहां विद्यारंभ संस्कार की पूरी विधि और नियम के बारे में भी विस्तार से बताया गया है।
क्या है विद्यारंभ संस्कार?
हिंदू संस्कृति में विद्यारंभ संस्कार यानी शिक्षा की औपचारिक शुरुआत को बेहद पवित्र और शुभ माना गया है। बच्चे के जीवन में यह वह क्षण होता है जब वह ज्ञान की ओर पहला कदम बढ़ाता है। ऐसे में यदि शिक्षा की शुरुआत शुभ मुहूर्त में की जाए, तो माना जाता है कि बच्चे को विद्या, बुद्धि, समझदारी और सफलता का आशीर्वाद प्राप्त होता है। विद्यारंभ समारोह भारत के विभिन्न राज्यों में वहां की संस्कृति और परंपरा के अनुसार अलग-अलग तरीकों से संपन्न किया जाता है। कुछ जगहों पर बच्चों को चावल या स्लेट में पहले अक्षर लिखाना सिखाया जाता है।
विद्यारंभ संस्कार मुहूर्त 23 जनवरी 2026-
आज विद्यारंभ संस्कार के लिए दो शुभ मुहूर्त हैं। पहला मुहूर्त सुबह 09:03 से 11:49 बजे तक का है और दूसरा मुहूर्त दोपहर 01:25 से 03:20 तक है। इस बीच आप अपने बच्चे को चॉक या पेंसिल पकड़ाकर और स्कूल में एडमिशन कराकर उन्हें शिक्षा की पहली सीढ़ी चढ़ा सकते हैं।
जनवरी में विद्यारंभ संस्कार के बचे हुए शुभ मुहूर्त-
अगर आप किसी कारण से आज विद्यारंभ संस्कार नहीं कर पाते हैं तो आपके साथ इस महीने में 3 और शुभ मुहूर्त बचे हुए हैं। यहां देखें-
- 25 जनवरी 2026- सुबह 08:49 से 11:41, दोपहर 01:17 से रात 07:47
- 29 जनवरी 2026- शाम 05:11 से 07:00
- 30 जनवरी 2026- सुबह 08:29 से 09:57, सुबह 11:22 से शाम 05:07
विद्यारंभ संस्कार विधि-
विद्यारंभ संस्कार की शुरुआत शुभ मुहूर्त में गणेश जी और मां सरस्वती के पूजन से होती है। इस संस्कार में माता-पिता या गुरु बच्चे का हाथ पकड़कर स्लेट, कॉपी या चावल पर ऊं, अ या श्री लिखवाते हैं। परंपरा अनुसार चांदी के पेन से शहद या घी में डुबोकर बच्चे की जीभ पर भी अक्षर लिखे जाते हैं, जिससे वाणी में मधुरता, बुद्धि की तीव्रता और विद्या की प्राप्ति मानी जाती है। अंत में बड़ों का आशीर्वाद और प्रसाद वितरण कर बच्चे के ज्ञानमय जीवन का शुभारंभ किया जाता है।
