चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri) का पावन पर्व इस साल 22 मार्च से 31 मार्च तक रहेगा। 30 मार्च को राम नवमी (Ram Navami 2023) मनाई जाएगी और 31 को नवरात्रि व्रत का पारण किया जाएगा। इसके अलावा कन्या पूजन (Kanya Pujan) नवरात्रि अष्टमी (Navratri Ashtami) और नवरात्रि नवमी (Navratri Navami) यानी 29 और 30 मार्च में होगा। इस नवरात्रि जहां बेहद ही शुभ योगों का निर्माण हो रहा है वहीं नवरात्रि के ठीक 1 महीने बाद एक बेहद अशुभ योग भी बनने जा रहे है। इस अशुभ योग की चपेट में 3 राशियां आने वाली हैं।
अगले सात महीने तक गुरु चांडाल योग बना रहेगा ऐसे में 3 राशि वालो को सतर्क रहना होगा।
दरअसल 22 अप्रैल को गुरु मेष राशि में प्रवेश करेंगे जहां पहले से ही राहु की उपस्थिति रहेगी। इन दोनों ग्रहों के एक राशि में होने से गुरु चांडाल योग बनेगा। ज्योतिष में ये योग बेहद अशुभ माना जाता है। ये योग अगले 7 महीने तक बना रहेगा। इस अशुभ योग की चपेट में 3 राशि वाले आ जायेंगे। ऐसे में इन राशियों के लोगों को बेहद सावधानी बरतनी होगी।
गुरु चांडाल योग से सावधान रहें ये राशियां । These Zodiac Signs Should Be Careful With Guru Chandal Yoga
मेष राशि (Aries)
गुरु चांडाल योग इस राशि के लग्न भाव में बनेगा। ऐसे में 7 महीने आपके लिए बेहद मुश्किल साबित होने वाले हैं। इस दौरान आपके कार्यों में निराशा झेलनी पड़ सकती है। आर्थिक नुकसान होने की संभावना रहेगी। सेहत बिगड़ने के भी आसार दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में आपको बेहद सतर्क रहना होगा।
मिथुन राशि (Gemini)
गुरु चांडाल योग आपको भी परेशान करने वाला है। इस दौरान आपको अशुभ समाचार सुनने को मिलेंगे। धन हानि की प्रबल आशंका है। साथ ही स्वास्थ्य भी बिगड़ सकता है। कार्यस्थल पर आपको कई परेशानियां आएंगी। बनते हुए काम अटक जाएंगे। ऐसे में आपको अधिक सतर्क रहते हुए कोई भी काम करना होगा।
धनु राशि (Sagittarius)
गुरु चांडाल योग आपको परेशान कर सकता है। वाहन चलाते समय अधिक सावधानी बरतनी होगी। बिजनेस में घाटा हो सकता है। अचानक से खर्च बढ़ सकते हैं। आर्थिक पक्ष काफी कमजोर रहने वाला है। नौकरी और व्यापार में तमाम परेशानियां झेलनी पड़ सकती हैं।
गुरु चांडाल योग के उपाय । Guru Chandal Yoga Remedies
गुरु चांडाल का बुरे प्रभाव से बचने के लिए रोजा अपने माथे पर हल्दी और केसर का तिलक लगाएं। अपने बड़ों का सम्मान करें। गायत्री मंत्र का 108 बार जाप करें। भगवान शिव को दूध चढ़ाएं। भगवान गणेश की पूजा करें।
