Shukra Guru Labh Yog 2026: 4 नवंबर 2026 की दोपहर 3 बजकर 57 मिनट पर शुक्र और देवगुरु बृहस्पति के बीच 60 डिग्री का कोण बनने जा रहा है। ज्योतिष में ग्रहों की इस स्थिति को लाभ या त्रिएकादश योग कहा जाता है। इस समय गुरु सिंह राशि में और शुक्र तुला राशि में गोचर कर रहे हैं। ग्रहों की यह स्थिति मेष, कर्क, तुला, धनु और कुंभ राशि वालों के लिए विशेष रूप से शुभ संकेत दे रही है। इन राशियों को धन, बिजनेस, करियर, विवाह और आमदनी से जुड़े मामलों में लाभ मिलने के अवसर बन सकते हैं।
शुक्र और गुरु का त्रिएकादश योग किन राशि वालों के लिए शुभ रहेगा (Image AI Generated and Newsroom Verified)
शुक्र धन, सुख-सुविधा, प्रेम, वैवाहिक जीवन, कला और भौतिक सुखों के कारक हैं। वहीं गुरु ज्ञान, भाग्य, शिक्षा, समृद्धि और विस्तार का प्रतिनिधित्व करते हैं। जब दोनों ग्रह एक-दूसरे से तीसरे और ग्यारहवें स्थान पर होते हैं, तो लाभ या त्रिएकादश संबंध बनता है। यह स्थिति आर्थिक योजनाओं, कारोबार, सामाजिक संपर्कों और रिश्तों के लिए अनुकूल मानी जाती है। खास बात यह है कि शुक्र इस समय अपनी स्वराशि तुला में वक्री हैं, जबकि गुरु सिंह राशि में गोचर कर रहे हैं। ऐसे में पुराने संपर्कों और पहले से चल रही योजनाओं से भी लाभ मिलने की संभावना है।
शुक्र और गुरु का लाभ या त्रिएकादश योग क्यों है खास
4 नवंबर को गुरु सिंह राशि में और शुक्र तुला राशि में रहेंगे। राशि चक्र में सिंह से तुला तीसरी और तुला से सिंह ग्यारहवीं राशि है। इसी कारण दोनों ग्रहों के बीच त्रिएकादश संबंध बन रहा है।
ज्योतिष में तीसरे भाव को साहस, प्रयास, कम्युनिकेशन और संपर्कों से जोड़ा जाता है, जबकि ग्यारहवां भाव आमदनी, लाभ, बड़े नेटवर्क और इच्छाओं की पूर्ति का है। इस संबंध के कारण दोनों ग्रहों के कारक तत्वों से जुड़े मामलों में अवसर बन सकते हैं।शुक्र इस समय तुला राशि में अपनी स्वराशि में हैं। इससे धन, व्यापार, प्रेम संबंध, कला और सुख-सुविधाओं से जुड़े मामलों को मजबूती मिल सकती है। वहीं गुरु सिंह राशि में हैं, जो नेतृत्व, आत्मविश्वास, शिक्षा और मान-सम्मान से जुड़े विषयों को सक्रिय करते हैं।
हालांकि शुक्र वक्री अवस्था में हैं। ऐसे में पुराने रिश्तों को सुधारने, पुराने क्लाइंट से दोबारा संपर्क करने, अटकी हुई डील को आगे बढ़ाने और पहले से बनाई गई आर्थिक योजनाओं की समीक्षा करने से लाभ मिल सकता है।
मेष राशि
मेष राशि वालों के लिए गुरु पांचवें भाव और शुक्र सातवें भाव में गोचर कर रहे हैं। पांचवां भाव शिक्षा, बुद्धि, संतान और रचनात्मकता से जुड़ा है, जबकि सातवां भाव विवाह, जीवनसाथी और बिजनेस पार्टनरशिप का प्रतिनिधित्व करता है। दोनों ग्रहों का यह संबंध मेष राशि वालों के लिए निजी और व्यावसायिक जीवन में अच्छे अवसर बना सकता है।
मेष राशि के लिए गुरु नौवें भाव के स्वामी होकर पांचवें भाव में हैं। इससे भाग्य, शिक्षा और रचनात्मक कामों को सहयोग मिल सकता है। विद्यार्थियों को पढ़ाई में अच्छे परिणाम मिलने की संभावना है। वहीं शुक्र दूसरे और सातवें भाव के स्वामी होकर अपनी स्वराशि तुला में सातवें भाव में बैठे हैं। इससे बिजनेस पार्टनरशिप और वैवाहिक जीवन को मजबूती मिल सकती है।
व्यापार करने वाले जातकों को नए क्लाइंट और पार्टनर मिल सकते हैं। पुराने समझौते से दोबारा लाभ मिलने की संभावना है। अविवाहित लोगों के विवाह की बातचीत आगे बढ़ सकती है। प्रेम संबंधों में भी आपसी तालमेल बेहतर हो सकता है। हालांकि वक्री शुक्र के कारण पुराने रिश्तों से जुड़ा कोई विषय दोबारा सामने आ सकता है। बातचीत में स्पष्टता बनाए रखना आपके लिए फायदेमंद रहेगा।
कर्क राशि
कर्क राशि के जातकों के लिए गुरु दूसरे भाव और शुक्र चौथे भाव में गोचर कर रहे हैं। दूसरा भाव धन, बचत और परिवार का है, जबकि चौथा भाव घर, जमीन-जायदाद, वाहन और पारिवारिक सुख से संबंधित है। ऐसे में शुक्र और गुरु का यह संयोग कर्क राशि वालों के लिए आर्थिक मामलों में सकारात्मक संकेत दे रहा है।
गुरु आपके नौवें भाव के स्वामी होकर दूसरे भाव में हैं। भाग्येश का धन भाव में होना आमदनी और बचत के लिए अच्छा संकेत माना जाता है। नौकरीपेशा लोगों को वेतन वृद्धि या अतिरिक्त आय के अवसर मिल सकते हैं। बिजनेस करने वालों को पुराने ग्राहकों और संपर्कों से लाभ मिल सकता है।
शुक्र चौथे और ग्यारहवें भाव के स्वामी होकर अपनी स्वराशि तुला में चौथे भाव में हैं। इससे प्रॉपर्टी, वाहन और घर से जुड़े मामलों में अनुकूल परिस्थितियां बन सकती हैं। घर की खरीदारी, मरम्मत या किसी पारिवारिक संपत्ति से जुड़ी योजना आगे बढ़ सकती है। महिला जातकों और रचनात्मक क्षेत्र से जुड़े लोगों को भी लाभ मिल सकता है। हालांकि प्रॉपर्टी से जुड़ा कोई सौदा करते समय कागजात अच्छी तरह जांच लें।
तुला राशि
तुला राशि वालों के लिए शुक्र पहले भाव यानी लग्न में और गुरु ग्यारहवें भाव में गोचर कर रहे हैं। सबसे खास बात यह है कि शुक्र आपकी राशि के स्वामी हैं और अपनी ही राशि में विराजमान हैं। वहीं गुरु का ग्यारहवें भाव में होना आमदनी, लाभ और इच्छाओं की पूर्ति के लिए शुभ संकेत दे रहा है।
शुक्र का लग्न भाव में होना व्यक्तित्व, आकर्षण, आत्मविश्वास और सामाजिक संपर्कों को बेहतर बना सकता है। कार्यक्षेत्र में आपकी बातों और विचारों को महत्व मिल सकता है। मीडिया, फैशन, डिजाइन, कला, मार्केटिंग और पब्लिक डीलिंग से जुड़े लोगों को फायदा मिलने के योग हैं।
गुरु तीसरे और छठे भाव के स्वामी होकर ग्यारहवें भाव में हैं। इससे मेहनत, नौकरी और अपने संपर्कों के जरिए लाभ मिलने की संभावना है। पुराने क्लाइंट से दोबारा काम मिल सकता है। नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन या अतिरिक्त जिम्मेदारी मिल सकती है। बिजनेस में आमदनी बढ़ाने के नए रास्ते बन सकते हैं। शुक्र के वक्री होने के कारण पुराने संपर्क और पहले से चल रही योजनाएं विशेष रूप से काम आ सकती हैं।
धनु राशि
धनु राशि वालों के लिए गुरु नौवें भाव और शुक्र ग्यारहवें भाव में गोचर कर रहे हैं। नौवां भाव भाग्य, उच्च शिक्षा, लंबी यात्रा और गुरु का है। वहीं ग्यारहवां भाव आमदनी, लाभ और बड़े संपर्कों से जुड़ा है। इस लिहाज से यह संयोग धनु राशि वालों के लिए काफी अनुकूल है।
धनु राशि के स्वामी गुरु हैं और उनका नौवें भाव में होना भाग्य तथा उच्च शिक्षा के मामलों को मजबूती दे सकता है। विद्यार्थियों को अच्छे अवसर मिल सकते हैं। विदेश में पढ़ाई या नौकरी की योजना बना रहे लोगों को सफलता की दिशा में रास्ता मिल सकता है। नौकरी में तरक्की और बिजनेस विस्तार की योजनाएं आगे बढ़ सकती हैं।
शुक्र छठे और ग्यारहवें भाव के स्वामी होकर अपनी स्वराशि तुला में ग्यारहवें भाव में हैं। इससे आमदनी और लाभ के मामलों में अच्छे अवसर बन सकते हैं। नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन या वेतन वृद्धि का लाभ मिल सकता है। बिजनेस करने वालों को बड़े क्लाइंट, नए ऑर्डर और पुराने संपर्कों से फायदा हो सकता है। गुरु की स्थिति भाग्य का साथ देगी और शुक्र की मजबूत स्थिति लाभ के रास्ते खोल सकती है।
कुंभ राशि
कुंभ राशि के जातकों के लिए गुरु सातवें भाव और शुक्र नौवें भाव में गोचर कर रहे हैं। सातवां भाव विवाह, जीवनसाथी और बिजनेस पार्टनरशिप का है, जबकि नौवां भाव भाग्य, उच्च शिक्षा और लंबी यात्राओं से जुड़ा है। यह संयोग कुंभ राशि वालों के लिए रिश्तों और आर्थिक मामलों में अच्छे अवसर बना सकता है।
कुंभ राशि के लिए गुरु दूसरे और ग्यारहवें भाव के स्वामी होकर सातवें भाव में हैं। इससे बिजनेस पार्टनरशिप, व्यापारिक समझौते और पब्लिक डीलिंग से लाभ मिल सकता है। नए क्लाइंट मिल सकते हैं और पुराने व्यापारिक संबंधों से दोबारा फायदा हो सकता है। अविवाहित लोगों के विवाह की बातचीत आगे बढ़ सकती है।
शुक्र चौथे और नौवें भाव के स्वामी होकर अपनी स्वराशि तुला में नौवें भाव में हैं। कुंभ राशि के लिए शुक्र योगकारक ग्रह हैं। उनका भाग्य भाव में अपनी राशि में होना विशेष रूप से सकारात्मक स्थिति है। उच्च शिक्षा, विदेश यात्रा, प्रॉपर्टी और पारिवारिक सुख से जुड़े मामलों में अच्छे अवसर बन सकते हैं। पिता और गुरु से सहयोग मिल सकता है। नौकरी में भी भाग्य का साथ मिलने की संभावना है। यह गोचर कुंभ राशि वालों के लिए विवाह, बिजनेस और आर्थिक उन्नति के लिहाज से खास रह सकता है।
डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।
